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इंदौर: राजस्व रिकॉर्ड में विभागीय त्रुटियों का खामियाजा भुगत रहे आमजन, सुधार के लिए हो रहे परेशान, 239 प्रकरण अब भी लंबित

इंदौर: राजस्व रिकॉर्ड में विभागीय त्रुटियों का खामियाजा भुगत रहे आमजन, सुधार के लिए हो रहे परेशान, 239 प्रकरण अब भी लंबित

जिले में अभिलेख दुरुस्ती के 1537 प्रकरण दर्ज हुए थे, जिनमें से 1266 मामलों के निराकरण का दावा किया गया है, जबकि 239 प्रकरण अब भी लंबित हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 09 May 2026 08:39:29 AM (IST)Updated Date: Sat, 09 May 2026 08:39:29 AM (IST)

राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के लिए आमजन हो रहे परेशान। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. जिला प्रशासन राजस्व रिकार्ड को लेकर चलाता रहा है अभियान, फिर भी परेशानी
  2. गलतियों को सुधारने के लिए लोग महीनों से तहसील और एसडीएम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं
  3. कई मामलों में ऑपरेटर की टाइपिंग मिस्टेक और दस्तावेजों की बिना जांच जारी किए आदेश से विवाद खड़े हो रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राजस्व रिकॉर्ड में विभागीय त्रुटियों का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। खसरा नकल, नाम, सीमांकन और अन्य अभिलेखों में हुई गलतियों को सुधारने के लिए लोग महीनों से तहसील और एसडीएम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। कई मामलों में आपरेटर की टाइपिंग मिस्टेक और दस्तावेजों की बिना जांच जारी किए आदेश से विवाद खड़े हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा अभिलेख दुरुस्ती अभियान चलाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों की परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रहीं।

जिले में अभिलेख दुरुस्ती के 1537 प्रकरण दर्ज हुए थे, जिनमें से 1266 मामलों के निराकरण का दावा किया गया है, जबकि 239 प्रकरण अब भी लंबित हैं। सबसे अधिक लंबित मामले महू क्षेत्र में सामने आए हैं, जहां 158 में से 69 प्रकरण अब तक अटके हुए हैं। इसके अलावा राऊ में 60, हातोद में 34 और सांवेर में 32 मामले लंबित बताए गए हैं। देपालपुर तहसील में 312 में से 310 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि केवल 2 मामले लंबित हैं। वहीं कनाड़िया, खुडैल और मल्हारगंज में भी अपेक्षाकृत बेहतर कार्य हुआ है।आमजन को समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं देरी और जटिल प्रक्रिया से आमजन परेशान है।

गलती सुधारने में मशक्कत

आवेदकों का कहना है कि रिकॉर्ड में हुई विभागीय गलतियों को सुधारने के लिए भी उनसे बार-बार दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। कई लोग महीनों से एक ही प्रकरण को लेकर तहसील पहुंच रहे हैं, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। आनलाइन सुधार प्रक्रिया में आईडी से ओटीपी की आवश्यकता होने के कारण भी देरी हो रही है।मार्च से मई तक विशेष अभियान चलाया गया था।इसके बाद भी प्रकरणों का निराकरण रूका है।

जमीन संबंधी कार्य प्रभावित

अभिलेखों में त्रुटियां होने से आमजन जमीन से जुड़े कार्य नहीं कर पा रहे है। जमीन की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, बैक ऋण और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। त्रुटियां होने से उपार्जन, केसीसी ऋण जैसे कार्य में देरी हो रही है। इससे किसान और संपत्ति धारक परेशान हो रहे है।

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