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इंदौर में पुलिस के लिए सिर्फ केस दर्ज करना नहीं, समय पर चार्जशीट देना असली कसौटी

इंदौर में पुलिस के लिए सिर्फ केस दर्ज करना नहीं, समय पर चार्जशीट देना असली कसौटी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। किसी भी शहर की कानून व्यवस्था का आकलन केवल इस बात से नहीं होता कि वहां कितने अपराध दर्ज हुए, बल्कि इससे भी तय होता है कि पुलिस उन मामलों में कितनी तेजी और मजबूती से चार्जशीट अदालत में पेश कर रही है। एनसीआरबी की ‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट में इंदौर पुलिस की यही तस्वीर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार 19 बड़े महानगरों की औसत चार्जशीटिंग दर 53 प्रतिशत रही, जबकि इंदौर की दर 63.4 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी इंदौर राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है, लेकिन देश के अग्रणी शहरों कोच्चि और कोलकाता से अभी काफी पीछे है।

रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता की चार्जशीटिंग दर 95.3 प्रतिशत और कोच्चि की 92.9 प्रतिशत रही। इन शहरों में दर्ज अधिकांश मामलों में पुलिस समयसीमा के भीतर जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश कर रही है। इसके मुकाबले इंदौर में कई मामलों की विवेचना लंबी खिंच रही है।

सबूत कमजोर होने पर आरोपियों को राहत मिल सकती है

अपराध दर्ज करना पुलिस की शुरुआती जिम्मेदारी है, लेकिन असली परीक्षा जांच पूरी कर मजबूत चार्जशीट अदालत में पेश करने की होती है। यदि समय पर चालान पेश नहीं होता तो मामलों में देरी बढ़ती है, साक्ष्य कमजोर पड़ते हैं और आरोपियों को कानूनी राहत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध, आनलाइन फ्राड, आर्थिक अपराध और संगठित अपराध तेजी से बढ़े हैं।

इन मामलों में तकनीकी जांच, बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल डेटा, डिजिटल ट्रेल और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच करनी पड़ती है। यही वजह है कि विवेचना में अधिक समय लग रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में फोरेंसिक रिपोर्ट और साइबर डाटा समय पर नहीं मिलने से भी चार्जशीट दाखिल करने में देरी होती है।

डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम

शहर के थानों में विवेचना अधिकारियों पर लगातार बढ़ता कार्यभार भी बड़ी वजह माना जा रहा है। एक अधिकारी के पास कई गंभीर प्रकरण लंबित रहते हैं। ऐसे में समयबद्ध जांच चुनौती बन जाती है। हालांकि इंदौर पुलिस ने हाल के वर्षों में साइबर सेल, तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम किया है, लेकिन अपराधों की बढ़ती जटिलता के मुकाबले संसाधन अभी पर्याप्त नहीं माने जा रहे।

एनसीआरबी रिपोर्ट ने इंदौर पुलिस को राष्ट्रीय औसत से बेहतर जरूर बताया है, लेकिन साथ ही यह संकेत भी दिया है कि यदि शहर को देश के शीर्ष महानगरों की श्रेणी में पहुंचना है तो विवेचना तंत्र, तकनीकी संसाधन और अभियोजन समन्वय को और मजबूत करना होगा।

दुष्कर्म दर में इंदौर की स्थिति चिंताजनक

  • दर 18.8 — देश के 19 महानगरों में यह चौथी सबसे ऊंची दर है। दिल्ली (14.0) से भी अधिक।
  • हिंसक अपराध में खतरनाक उछाल — दो साल में लगभग दोगुने
  • 2022 में 1308 से 2024 में 2405 — 84% की वृद्धि। चार्जशीटिंग दर 71.7%।
  • अपहरण में इंदौर गंभीर — हर तीन पीड़ितों में दो महिलाएं, 395 अभी भी लापता

विवेचना में सुधार के निर्देश

थाना प्रभारी और उपनिरीक्षकों को विवेचना का स्तर सुधारने के निर्देश दिए हैं। लगातार बैठक ली जा रही है। सहायक पुलिस आयुक्त को भी सुधार के निर्देश दिए हैं। – आरके सिंह अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय)

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