अदालत ने कहा कि पूर्व आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से प्रमुख सचिव को व्यक्त …और पढ़ें
HighLights
- मामले की सुनवाई मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ में हुई।
- यह अवमानना याचिका मोहिनी जैन द्वारा दायर की गई है।
- आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया था।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के प्रमुख सचिव के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ में हुई। यह अवमानना याचिका मोहिनी जैन द्वारा दायर की गई है, जिसमें 18 जुलाई 2023 को पारित आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान मुख्य अभियंता वी.के. छारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। अदालत को बताया गया कि मामला अभी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव के विचाराधीन है और आदेश के पालन के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया।
हालांकि कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पूर्व आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
इसके बावजूद प्रमुख सचिव न तो अदालत में उपस्थित हुए और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया गया।
हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जुलाई 2023 में पारित आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें 13 मई 2026 को अदालत में उपस्थित कराया जा सके।
यह था पूरा मामला
- ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में यह मामला पीएचई विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रमोद कुमार जैन से जुड़ा था, जिनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मोहिनी जैन ने याचिका दायर की। मामला विभाग में वर्ष 2001 से 2005 के बीच हुए कथित वित्तीय गड़बड़ी और चेकों में छेड़छाड़ से संबंधित था।
- आरोप था कि बैंक से अधिक राशि निकाली गई, लेकिन खातों में कम रकम दर्ज की गई।
- विभागीय जांच के बाद पांच जुलाई 2018 को सरकार ने प्रमोद कुमार जैन की पूरी पेंशन स्थायी रूप से रोक दी थी।
- याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि जांच 2008 में पूरी हो गई थी, लेकिन कार्रवाई 10 साल बाद की गई। साथ ही नियम 9(1) के अनुसार किसी कर्मचारी की पूरी पेंशन नहीं रोकी जा सकती और न्यूनतम पेंशन देना अनिवार्य है।
- कोर्ट ने पाया कि बिना लोक सेवा आयोग (पीएससी) की सहमति के पूरी पेंशन रोकने का आदेश कानूनन गलत है। इसके बाद न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने पांच जुलाई 2018 का आदेश निरस्त करते हुए पेंशन तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।
- हालांकि सरकार को नियमों के तहत दोबारा कार्रवाई की छूट भी दी गई। जब इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो मामले में अवमानना याचिका दायर की गई।
#गवलयर #हई #करट #स #पएचई #वभग #क #परमख #सचव #क #खलफ #गर #जमनत #वरट #जर



Post Comment