स्थानीय रहवासियों का कहना है कि बिचोली मर्दाना तालाब से पानी कैनाल के जरिए दूसरी तरफ पहुंचता था, पिपल्याहाना की तरफ की भरपूर पानी रहता था। …और पढ़ें
HighLights
- रिंग रोड के दूसरी तरफ बिचौली तालाब के हिस्से पर खुले गैरेज, दुकानें
- शहर के प्रमुख जल स्रोत अतिक्रमण के कारण अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
- कभी पानी से लबालब रहने वाले इस क्षेत्र में अब अतिक्रमण की बाढ़ आ चुकी है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के प्रमुख जल स्रोत अतिक्रमण के कारण अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। यही हाल बिचौली मर्दाना तालाब का है, जिसके पिपल्याहाना क्षेत्र वाले हिस्से में तालाब का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया। कभी पानी से लबालब रहने वाले इस क्षेत्र में अब अतिक्रमण की बाढ़ आ चुकी है।
तालाब के हिस्से में मिट्टी डालकर गैरेज और दुकानें संचालित होने लगी है, लेकिन प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदारों को यह अतिक्रमण नजर नही आ रहे। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि बिचोली मर्दाना तालाब से पानी कैनाल के जरिए दूसरी तरफ पहुंचता था, पिपल्याहाना की तरफ की भरपूर पानी रहता था।
तालाब में मिट्रटी भरकर पूरा हिस्सा ही खत्म कर दिया
पानी की आवाजाही के लिए रिंग रोड बनाए जाने के दौरान पानी की निकासी के लिए पुलिया भी बनाई गई थी। अब यहां सिर्फ पतली नाली बची है और तालाब में मिट्रटी भरकर पूरा हिस्सा ही खत्म कर दिया गया, आसमान से देखने में सिर्फ छोटी सी तलैया नजर आती है। तालाब को खत्म करने का काम अब भी जारी है।
हटाएंगे अतिक्रमण
जिन तालाबों में अतिक्रमण की शिकायत मिल रही है, वहां टीम जांच कर रही है। जहां भी अतिक्रमण चिन्हित हो रहे है उनको हटाया जाएगा। हमारा लक्ष्य वर्षाकाल से पहले सभी तालाबों और चेनलों को अतिक्रमण मुक्त करना है। – क्षितिज सिंघल, आयुक्त नगर निगम
अंडर ग्राउंड मेट्रो के लिए बंगाली चौराहे पर शुरु हुआ मृदा परीक्षण
इंदौर: बंगाली चौराहे पर मेट्रो के अंडर ग्राउंड हिस्से के निर्माण के लिए मृदा परीक्षण कार्य शुरु कर दिया गया है। इस चौराहे के अासपास करीब चार स्थानों पर जमीन की 30 मीटर गहराई तक चट्टानों के परीक्षण के लिए पाइलिंग कर मृदा परीक्षण का कार्य किया जा रहा है। मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत बंगाली चौराहे से रीगल तक का करीब चार किलोमीटर हिस्सा भी अंडरग्राउंड किया जाना प्रस्तावित है। गौरतलब है कि पूर्व में मेट्रो प्रबंधन द्वारा इस हिस्से में ओवरहेड मेट्रो बनाने की योजना थी । जनप्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इस हिस्से को अंडरग्राउंड करने का निर्णय लिया गया।
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