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हाई कोर्ट ने दी राहत, कहा- जब जमीन पर जीएसटी लागू नहीं, तो कॉलोनी के विकास पर कैसे मांग सकते हैं

हाई कोर्ट ने दी राहत, कहा- जब जमीन पर जीएसटी लागू नहीं, तो कॉलोनी के विकास पर कैसे मांग सकते हैं

इंदौर क्षेत्र में ही करीब 500 ऐसे नोटिस भूस्वामी और डेवलपर दोनों को जारी कर दिए गए।सरकारी नोटिस से घबराए तमाम कालोनाइजरों और किसानों ने बीते दिनों टैक …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 14 May 2026 07:41:29 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 07:41:29 AM (IST)

कॉलोनी विकास पर जीएसटी चुकाने के फैसले पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. संयुक्त विकास अनुबंध पर अंतरिम राहत, 150 करोड़ की टैक्स मांग अटकेगी
  2. इंदौर हाई कोर्ट ने रियल एस्टेट सेक्टर और भूस्वामी किसानों को बड़ी राहत दी
  3. कॉलोनी विकास पर निकाली जीएसटी की मांग, हाई कोर्ट ने लगाई रोक

लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर। जब जमीन पर जीएसटी लागू नहीं होता तो कालोनी के विकास पर जीएसटी की चुकाने की मांग कैसे निकाली जा सकती है? इस दलील को स्वीकार करते हुए इंदौर हाई कोर्ट ने रियल एस्टेट सेक्टर और भूस्वामी किसानों को बड़ी राहत दी है।

कालोनी विकास के लिए बने संयुक्त विकास अनुबंध (जेडीए) पर टैक्स की मांग निकालते हुए दिए गए सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) के नोटिस पर स्थगन दे दिया गया है। इस एक राहत से इंदौर क्षेत्र में ही कम से कम 150 करोड़ रुपये की टैक्स की मांग अटकती दिख रही है। कोर्ट में सवाल उठा कि जीएसटी वस्तु या सेवा (गुड्स एंड सर्विस) की आपूर्ति पर लागू होता है। जमीन ना वस्तु ना सेवा इसीलिए जीएसटी के दायरे से बाहर है। पहली ही सुनवाई में कोर्ट ने जीएसटी द्वारा निकाली टैक्स की मांग पर रोक लगा दी।

जेडीए के आधार पर बीते दिनों से केंद्र और राज्य के जीएसटी विभाग द्वारा इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में जांच और छापे की कार्रवाई की गई थी। 2017 के बाद के तमाम कालोनी विकास के ऐसे अनुबंधों पर जीएसटी की मांग निकाली गई जहां किसी किसान या भूस्वामी ने अपनी जमीन कालोनी विकास करने के लिए किसी डेवलपर को सौंपी। इंदौर क्षेत्र में ही करीब 500 ऐसे नोटिस भूस्वामी और डेवलपर दोनों को जारी कर दिए गए।सरकारी नोटिस से घबराए तमाम कालोनाइजरों और किसानों ने बीते दिनों टैक्स चुकाया भी। इस बीच इंदौर के रियल एस्टेट समूह ईशान होम्स और धरा एसोसिएट्स ने जीएसटी मांग के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

असंवैधानिक मांग

याचिकाकर्ता के वकील सुमित नेमा और सीए नवीन खंडेलवाल की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि जमीन पर जीएसटी की मांग निकालना ही असंवैधानिक है। एडवोकेट नेमा के अनुसार दरअसल जीएसटी एक्ट में जमीन पर कोई जीएसटी लागू नहीं होता। जीएसटी अधिकारियों ने बीते दिनों धड़ाधड़ नोटिस जारी किए। इन्होंने हवाला दिया कि भूस्वामी अपनी जमीन पर विकास के अधिकार किसी ओर को दे रहा है। यह आपूर्ति है। इसलिए 18 प्रतिशत टैक्स जमीन मालिक और 18 प्रतिशत डेवलपर दे।

हमने कोर्ट में कहा कि जमीन वस्तु या सेवा नहीं हो सकती। उस पर सड़क-ड्रेनेज डाली जा रही है तो भी बेची जमीन जा रही है। इससे वह वस्तु या सेवा नहीं बन जाती। सीए खंडेलवाल के अनुसार जीएसटी सिर्फ उन्हीं विषयों पर लगता है जो राज्य और केंद्र के संयुक्त अधिकार क्षेत्र में हो। जमीन के कानून राज्य के अधिकार में आते हैं। इस लिहाज से भी जीएसटी की मांग अवैधानिक है। खुद जीएसटी विभाग पूर्व में सर्कुलर जारी कर चुका है कि जमीन जीएसटी मुक्त है। सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कह चुकी है कि सरकारी अधिकारी अपने ही विभाग के सर्कुलरों को अनदेखा नहीं कर सकते।

ये होगा असर

  • प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में 500 करोड़ से ज्यादा की टैक्स मांग खटाई में
  • जीएसटी के ऐसे नोटिसों को अब देशभर में मिलेगी चुनौती
  • पहले जिन्होंने टैक्स चुका दिया है वे अंतिम निर्णय के बाद रिफंड के लिए आवेदन करेंगे

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