धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप शुक्रवार को निर्धारित हो जाएगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले में पांच जनहित याचिकाए …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप शुक्रवार को निर्धारित हो जाएगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले में पांच जनहित याचिकाएं और एक अपील पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। छह अप्रैल से 12 मई 2026 तक नियमित सुनवाई हुई। 24 दिन, 43 घंटे सुनवाई के बाद 12 मई को कोर्ट ने सभी याचिकाओं में निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जो 14 मई को जारी होगा। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी यह फैसला सुनाएंगे। इसके बाद ही तय होगा कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद।
वर्ष 2013 से लंबित याचिकाओं पर विभिन्न पक्षों की मांग
हाई कोर्ट में वर्ष 2013 से भोजशाला मामले की सुनवाई चल रही है। पांच जनहित याचिकाओं में से दो मंदिर पक्ष ने, एक मस्जिद पक्ष ने, एक जैन समाज ने और एक स्थानीय रहवासियों ने दायर की है। मंदिर पक्ष भोजशाला को मंदिर घोषित करने और यहां 24 घंटे पूजा का अधिकार देने की मांग कर रहा है, जबकि मस्जिद पक्ष इसे मस्जिद घोषित करने और नमाज की अनुमति मांग रहा है। जैन समाज भोजशाला को जैन गुरुकुल बताते हुए जैन धर्मावलंबियों को पूजा का अधिकार देने की मांग कर रहा है। वहीं स्थानीय रहवासियों की याचिका में इस पूरे मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की मांग है।
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