मनेंद्रगढ़ । जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जरूरतमंदों तक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ पहुंचाई भी जा रही हैं।
ग्राम चिडोला की रहने वाली प्रेमबाई गोंड, जो पिछले वर्ष भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, उनकी परेशानी को समझते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सराहनीय पहल की।
सीएमएचओ के निर्देश पर गठित जिला मेडिकल बोर्ड की टीम बुधवार को स्वयं ग्राम चिडोला पहुंची और प्रेमबाई गोंड का घर पर ही स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान मेडिकल बोर्ड द्वारा 55 प्रतिशत दिव्यांगता की पुष्टि की गई।
इसके साथ ही दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है, जिससे पीड़िता को वन विभाग से मिलने वाली सहायता एवं बीमा राशि प्राप्त करने में सहूलियत होगी।
भालू के हमले में क्षतिग्रस्त हुई आंख
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम चिडोला निवासी प्रेमबाई गोंड पर 20 जून 2025 को जंगल क्षेत्र में भालू ने हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी एक आंख गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिससे उन्हें स्थायी शारीरिक क्षति पहुंची। घटना के बाद से उनका जीवन कठिनाइयों से घिर गया था।
वन विभाग से मिलने वाली सहायता एवं बीमा राशि प्राप्त करने के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र आवश्यक था, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने और शारीरिक अस्वस्थता के कारण उन्हें मनेंद्रगढ़ जिला अस्पताल तक आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
सीएमएचओ ने दिखाई तत्परता और संवेदनशीलता
जैसे ही यह मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के संज्ञान में आया, उन्होंने तत्काल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। पीड़िता की स्थिति और ग्रामीण क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए राहत प्रदान की।
डॉ. अविनाश खरे के निर्देशानुसार मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मौके पर पहुंचकर महिला का परीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया भी गांव में ही पूरी की। इससे पीड़िता और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली।
ग्रामीणों ने जताया आभार
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की ग्राम चिडोला सहित आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सराहना हो रही है। प्रेमबाई गोंड के परिजनों और ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे तथा जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब और असहाय लोगों के घर तक पहुंचकर मदद करना वास्तव में संवेदनशील शासन व्यवस्था का परिचायक है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस कदम से आम जनता का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रशासन इसी तरह जरूरतमंदों की समस्याओं का त्वरित समाधान करता रहेगा।
मानवता और सेवा का संदेश
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और जनसेवा का संदेश भी है। एक पीड़ित महिला को उसके अधिकार दिलाने के लिए मेडिकल बोर्ड का घर तक पहुंचना और मौके पर ही जांच कर दिव्यांगता की पुष्टि करना प्रशासन की सकारात्मक कार्यशैली का प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।
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