धार की ऐतिहासिक भोजशाला मामले में आए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के विस्तृत फैसले में एक ऐसा दावा भी दर्ज हुआ है, जिसने पूरे मामले को नया धार्मिक और ऐतिहासि …और पढ़ें
HighLights
- धार भोजशाला के नीचे भगवान हनुमान की बड़ी प्रतिमा दबी होने का दावा
- हाई कोर्ट के फैसले के शुरुआती विवरण में दर्ज है हिंदू पक्ष का यह तर्क
- अदालत का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं, याचिकाकर्ताओं के दावों का है हिस्सा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार की ऐतिहासिक भोजशाला मामले में आए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के विस्तृत फैसले में एक ऐसा दावा भी दर्ज हुआ है, जिसने पूरे मामले को नया धार्मिक और ऐतिहासिक आयाम दे दिया है। निर्णय में मंदिर पक्ष की ओर से यह दावा दर्ज किया गया कि भोजशाला परिसर के नीचे अब भी भगवान हनुमान की एक बड़ी प्रतिमा दबी हुई है।
कोर्ट का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता पक्ष के तर्कों का हिस्सा
बता दें, यह कोर्ट का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं है, बल्कि याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा रखे गए दावों और तथ्यों के विवरण का हिस्सा है, जिसे कोर्ट ने आदेश में रिकॉर्ड किया है। दरअसल, फैसले के शुरुआती हिस्से में कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं और पक्षकारों के तर्कों का उल्लेख किया है।
परिसर के नीचे दबी हैं अनेक प्रतिमाएं और शिल्प
इसी दौरान हिंदू पक्ष की ओर से यह कहा गया कि भोजशाला परिसर में अब भी देवी-देवताओं की अनेक प्रतिमाएं और शिल्प मौजूद हैं और कई मूर्तियां जमीन के नीचे दबी हुई हैं। इसी क्रम में एक बड़ी हनुमान प्रतिमा का भी उल्लेख किया गया।
स्थानीय लोगों में चर्चा तेज, प्रशासन का कोर्ट के आदेश पर फोकस
अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच इस दावे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे भोजशाला के धार्मिक इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं प्रशासन और संबंधित पक्ष फिलहाल कोर्ट के आदेश और आधिकारिक प्रक्रियाओं पर ही फोकस बनाए हुए हैं।
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