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नीमच में रामपुरा के तत्कालीन तहसीलदार सहित छह आरोपियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज, दो हेक्टेयर जमीन की हेराफेरी का आरोप

नीमच में रामपुरा के तत्कालीन तहसीलदार सहित छह आरोपियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज, दो हेक्टेयर जमीन की हेराफेरी का आरोप

मृत व्यक्ति का फर्जी वारिस बनाकर दो हेक्टेयर जमीन की हेरफेर करने का आरोप है, जो जांच में प्रमाणित हुए हैं। ईओडब्ल्यू जांच कर आरोपियों पर कार्रवाई करेग …और पढ़ें

By jaswant purohitEdited By: Ramnath Mutkule

Publish Date: Sat, 23 May 2026 07:43:58 AM (IST)Updated Date: Sat, 23 May 2026 07:43:58 AM (IST)

(प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जनरेट)

HighLights

  1. आरोपियों में ग्राम पंचायत बैसला की सरपंच, सचिव व तत्कालीन पटवारी भी शामिल
  2. मृत व्यक्ति का फर्जी वारिस बनाकर लगभग दो हेक्टेयर की जमीन की हेरफेर करने का आरोप
  3. ईओडब्ल्यू जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी सहित अन्य आगामी कार्रवाई करेगा

नईदुनिया प्रतिनधि, नीमच। आर्थिक अपराध ब्यूरो मप्र (ईओडब्ल्यू) की उज्ज्जैन इकाई ने रामपुरा के तत्कालीन तहसीलदार सहित 6 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोपितों में ग्राम पंचायत बैसला की सरपंच, सचिव और तत्कालीन पटवारी भी शामिल है। इन पर मृत व्यक्ति का फर्जी वारिस बनाकर लगभग दो हेक्टेयर जमीन की हेरफेर करने का आरोप है, जो प्रारंभिक जांच में प्रमाणित हुए हैं। मामले में ईओडब्ल्यू जांच कर आरोपितों की गिरफ्तारी सहित अन्य आगामी कार्रवाई करेगा।

ईओडब्ल्यू मुख्यालय भोपाल को एक शिकायत मिली थी जिस पर शिकायत क्रमांक 772/25 दर्ज कर प्रारंंभिक जांच की गई थी। शिकायत के तथ्य और आरोप प्रमाणित होने पर ईओडब्ल्यू इकाई उज्जैन ने प्रकरण दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू से जारी जानकारी के अनुसार ग्राम बैसला के केदार पुत्र धुरा की मौत हो चुकी थी। केदार की लगभग दो हेक्टेयर भूमि का स्वामित्व और आधिपत्य हासिल करने के लिए बैसला के भगवान पुत्र भेरूलाल मीणा ने साजिश रची, जिसमें शामिल होकर ग्राम पंचायत बैसला की सरपंच प्रेमलता पत्नी अमर रावत व सचिव आनंद सक्सेना ने असत्य आधार पर भगवान मीणा को केदार को विधिक वारिस और पुत्र होने का प्रमाणीकरण किया।

बिना जांच किए असत्य आधार पर नामांतरण कर दिया

ग्राम पंचायत से जारी पुत्र और वारिसान प्रमाण पत्र के आधार पर भगवान मीणा ने मृतक नामांतरण हेतु आवेदन तहसीलदार न्यायालय रामपुरा में प्रस्तुत किया, जिस पर बैसला के तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार ने उक्त प्रकरण में असत्य वंशावली, पंचनामा और प्रतिवेदन तैयार किए। इसके बाद रामपुरा के तत्कालीन तहसीलदार बालकृष्ण मकवाना ने मृतक केदार के वैध वारिसों की जांच किए बिना असत्य आधार पर तत्कालीन पटवारी द्वारा पेश असत्य वंशावली, पंचनामा और प्रतिवेदन के आधार पर भगवान मीणा के पक्ष में दो हेक्टेयर जमीन का नामांतरण आदेश पारित कर दिया और राजस्व रिकार्ड में आरोपित भगवान मीणा का नाम भी दर्ज कर दिया।

साजिश रचकर पद का दुरुपयोग किया

इस तरह आरोपितों ने आपराधिक साजिश रचकर मिलीभगत कर पद का दुरुपयोग किया और आरोपित भगवान मीणा को लाभ पहुंचाने का कार्य अवैध रूप से किया। शिकायत में आरोपों के प्रमाणित होने पर ईओडब्ल्यू ने भगवान मीणा, सरपंच प्रेमलता पत्नी अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार, तत्कालीन तहसीलदार बालकृष्ण मकवाना सहित एक अन्य के खिलाफ भादवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 (ग) व 12 के तहत प्रकरण दर्ज कर मामला जांच में लिया है। ईओडब्ल्यू मामले में विधि अनुसार आगामी कार्रवाई करेगी। विदित रहे कि बालकृष्ण मकवाना वर्तमान में सिंगोली में नायब तहसीलदार और अनुराग पाटीदार राजस्व निरीक्षक के रूप में रामपुरा क्षेत्र में ही पदस्थ है।

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