भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पिछले शुक्रवार को एक शहर काजी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और अब कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। पिछली याचिका पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है।
धार भोजशाला को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। अब मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई हो सकती है। यह याचिका कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी की तरफ से लगाई गई है। भोजशाला मामले को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दायर की गई है, ताकि उनका पक्ष सुने बिना स्थगन न दिया जा सके। कैविएट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट उनका पक्ष भी सुने।
‘सरकारी रिकॉर्ड में मस्जिद के नाम से खसरे दर्ज हैं’
कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद का सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका पर कहना है कि मुस्लिम समाज 700 साल से परिसर में नमाज पढ़ता आ रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में मस्जिद के नाम से खसरे दर्ज हैं।
पहले खुद एएसआई परिसर को कमाल मौला मस्जिद बताता आया है, लेकिन अब रिपोर्ट में मंदिर बताया गया है। भोजशाला में किए गए एएसआई के सर्वे को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में भी यह बात रखी गई थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं आया। अब वे सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।
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