विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्वाड देशों की बैठक में साफ कर दिया है कि स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सुरक्षित और अबाधित समुद्री वाणिज्य बेहद जरूरी है। दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में हुई इस अहम बैठक में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और समुद्री निगरानी में सहयोग बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
वैश्विक संकट और मजबूत आपूर्ति शृंखला पर चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में दुनिया के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व और क्वाड की जिम्मेदारियां बहुत ज्यादा बढ़ेंगी। बैठक में आर्थिक मजबूती के लिए आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने के साथ-साथ ऊर्जा, खाद उर्वरक और महत्वपूर्ण खनिजों की आसान उपलब्धता पर गंभीर मंथन हुआ।
समुद्री निगरानी और पोर्ट निर्माण के लिए नई पहल
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ‘इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल’ की घोषणा की, जो इस क्षेत्र के देशों की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही ‘इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ योजना का भी विस्तार किया जाएगा। क्वाड देशों ने मिलकर प्रशांत महासागर के द्वीपों में बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए एक नई विशेष पहल शुरू करने का फैसला किया है।
रुबियो ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार का 60 प्रतिशत हिस्सा हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा केवल क्वाड देशों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के अनगिनत देशों के लिए बेहद जरूरी है।
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आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन करने की बात दोहराते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ‘शून्य सहिष्णुता’ होनी चाहिए और आतंकी हमलों का शिकार होने वाले देशों को अपनी आत्मरक्षा करने का पूरा अधिकार है। क्वाड के सभी सदस्य देशों ने साझा सहयोग से इस खतरे से निपटने का संकल्प लिया।
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