नाबालिग बेटी को तलाशने में पुलिस की असफलता से परेशान पिता ने जैसे ही कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत की बेटी खुद ही पुलिस थाने पहुंच गई। …और पढ़ें
HighLights
- पुलिस तलाश नहीं पा रही थी, याचिका दायर हुई तो खुद थाने पहुंच गई
- कोर्ट ने आदेश दिया जांच करें, अपराध हुआ हो तो प्रकरण भी दर्ज करें
- इंदौर के लसुड़िया क्षेत्र का मामला, कोर्ट ने दिए मेडिकल जांच के आदेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नाबालिग बेटी को तलाशने में पुलिस की असफलता से परेशान पिता ने जैसे ही कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत की बेटी खुद ही पुलिस थाने पहुंच गई। उसे कोर्ट में उपस्थित किया तो वह माता-पिता के साथ जाने के लिए तैयार हो गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि चूंकि नाबालिग 20 दिन गायब रही है उसके बयान दर्ज किए जाएं और मेडिकल जांच भी कराई जाए। जांच में किसी भी तरह का अपराध होना पाया जाए तो केस भी दर्ज किया जाए।
लापता होने पर हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
मामला लसुड़िया पुलिस थाना क्षेत्र का है। नाबालिग 4 मई को गायब हो गई थी। पिता ने इस संबंध में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, लेकिन जब पुलिस बेटी को तलाश नहीं सकी तो उन्होंने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। पिता ने बेटी के अपहरण की आशंका भी जताई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस से कहा था कि वह नाबालिग को तलाशे और 25 मई को कोर्ट के समक्ष उपस्थित करे, लेकिन पुलिस 24 मई तक भी नाबालिग को तलाश नहीं सकी।
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थाने पहुंची नाबालिग और कोर्ट का विधिक निर्देश
इस बीच नाबालिग खुद ही थाने में उपस्थित हो गई। वहां से उसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। नाबालिग माता-पिता के साथ जाने के लिए भी तैयार हो गई। कोर्ट ने इसकी अनुमति तो दे दी, लेकिन पुलिस से कहा कि वह नाबालिग के बयान दर्ज करे और उसकी मेडिकल जांच कराए। मेडिकल में नाबालिग के साथ किसी तरह का अपराध होना पाया जाए तो प्रकरण भी दर्ज करे।
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