विश्व दुग्ध दिवस (1 जून) के अवसर पर जब देश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा हो रही है, तब मध्य प्रदेश भी एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ …और पढ़ें
HighLights
- खेती के साथ ‘डेयरी’ बनी किसानों की दूसरी फसल
- मालवा-निमाड़ में रोजाना नकद आय का मजबूत आधार
- प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध संग्रहण का कड़ा लक्ष्य
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। विश्व दुग्ध दिवस (1 जून) के अवसर पर जब देश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा हो रही है, तब मध्य प्रदेश भी एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य घोषित कर चुके हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने में मालवा-निमाड़ क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां डेयरी गतिविधियां किसानों की आय का मजबूत आधार बनती जा रही हैं।
देश का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक
पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा बेसिक एनिमल हसबेंडरी स्टेटिस्टिक्स (बीएएचएस)-2025 के अनुसार मध्य प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 9.12 प्रतिशत है। इस सूची में केवल उत्तर प्रदेश और राजस्थान ही मध्य प्रदेश से आगे हैं। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य का वार्षिक दुग्ध उत्पादन पिछले दो दशकों में चार गुना से अधिक बढ़कर 2.13 करोड़ टन से ज्यादा हो चुका है।
खेती के साथ डेयरी बनी दूसरी फसल
मालवा-निमाड़ के इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, खरगोन और खंडवा जिलों में डेयरी अब केवल पूरक गतिविधि नहीं रही। किसानों के लिए यह रोजाना नकद आय का सबसे भरोसेमंद जरिया बनती जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहां फसल से आय साल में एक या दो बार मिलती है, वहीं दूध प्रतिदिन आय सुनिश्चित करता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान डेयरी को व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं।
सहकारी समितियों से बढ़ी रफ्तार
प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों का तेजी से विस्तार हुआ है। हाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में 895 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन हुआ है और 15 हजार से अधिक नए दुग्ध उत्पादक किसान इस नेटवर्क से जुड़े हैं। वर्तमान में प्रदेश में 6200 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय हैं। इनमें इंदौर और उज्जैन दुग्ध संघ सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हैं।
तीसरे स्थान से शीर्ष की ओर
प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन क्षमता को भी मजबूत करना है। सरकार ने प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध संग्रहण का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन वृद्धि की वर्तमान रफ्तार बनी रही और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार होता रहा, तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में राजस्थान को कड़ी चुनौती दे सकता है।
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फैक्ट फाइल
- देश में मध्य प्रदेश की दुग्ध उत्पादन हिस्सेदारी: 9.12 प्रतिशत
- देश में स्थान: तीसरा
- वार्षिक दुग्ध उत्पादन: 2.13 करोड़ टन से अधिक
- नई दुग्ध सहकारी समितियां (एक वर्ष में): 895
- नए जुड़े दुग्ध उत्पादक: 15 हजार से अधिक
- सरकार का लक्ष्य: 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध संग्रहण
- लक्ष्य वर्ष: 2028 तक मिल्क कैपिटल बनने की तैयारी
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