आरोप लगाया है कि मास्टर प्लान की सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर बगैर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए लोगों को बेदखल किया जा रहा है। उचित मुआवजा भी नहीं दिय …और पढ़ें
HighLights
- याचिकाकर्ता ने लगाए बगैर प्रविधान लोगों को बेदखल करने का आरोप
- याचिका में सोमवार को सुनवाई होना थी, लेकिन नियमित बैंच के अभाव में आगे बढ़ गई
- बगैर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए लोगों को बेदखल किया जा रहा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मास्टर प्लान की सड़क के नाम पर बगैर मुआवजा रजिस्ट्री वाली जमीन के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी। याचिका में सोमवार को सुनवाई होना थी, लेकिन नियमित बैंच के अभाव में आगे बढ़ गई।
याचिका जती कालोनी निवासी ओपी गौड़ ने प्रस्तुत की है। इसमें नगर निगम, शासन और इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) को पक्षकार बनाते हुए आरोप लगाया है कि मास्टर प्लान की सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर बगैर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए लोगों को बेदखल किया जा रहा है। बेदखल किए जा रहे लोगों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।
सुभाष मार्ग और चंदन नगर का भी मुद्दा उठाया
याचिका में नेताजी सुभाष मार्ग और चंदन नगर से एयरपोर्ट रोड तक प्रस्तावित सड़क का उल्लेख करते हुए कहा है कि नेताजी सुभाष मार्ग के चौड़ीकरण में 92 मकान पूरी तरह प्रभावित होंगे, जबकि 203 मकानों का बड़ा हिस्सा उपयोग लायक नहीं बचेगा। बावजूद इसके कोई मुआवजा नहीं दिया जा रहा। नगर निगम जमीन मालिकों को नकद मुआवजा देने के बजाय एफएआर और टीडीआर देने की बात कर रहा है, जबकि लोगों को नकद मुआवजे की आवश्यकता है।
नियमों का पालन नहीं हो रहा
याचिका में यह भी कहा है कि कार्रवाई भूमि अधिग्रहण कानून-2013, नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम और संविधान के अनुच्छेदों का उलंघन है। मास्टर प्लान में जिंसी चौराहा से चौथी पल्टन तक की सड़क 24 मीटर प्रस्तावित है, जबकि निगम 30 मीटर बताकर नोटिस जारी कर रहा है।
निगम को अधिकार ही नहीं योजना बनाने का
याचिका में यह भी कहा है कि इंदौर विकास प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद नगर निगम को योजना बनाने और इन योजनाओं के क्रियान्वयन का अधिकार ही नहीं है। प्रविधानों के अनुसार निगम को सिर्फ आइडीए बनने तक काम करना था, लेकिन वह आज भी योजना बना रहा है और उनका क्रियान्वयन कर रहा है।
निगम याचिका निरस्त करने की मांग कर चुका है
निगम याचिका का विरोध करते हुए इसे निरस्त करने की मांग कर चुका है। निगम का कहना है कि याचिकाकर्ता का स्वयं का मकान सुभाष मार्ग पर है। याचिका में उन्होंने इस सड़क का उल्लेख किया है। स्पष्ट है कि वे स्वयं प्रभावित व्यक्ति हैं। ऐसी स्थिति में जनहित याचिका स्वीकार योग्य नहीं है। सोमवार को याचिका में इसी मुद्दे पर सुनवाई होना थी, लेकिन टल गई। अब मामले में चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
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