इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की गलतियों का खामियाजा एक बार फिर शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जिंसी क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्य के कारण पहले से ही यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी थी, और अब दवा बाजार से लेकर छावनी तक के मुख्य मार्ग को भी आगामी अगस्त महीने तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस व्यस्त मार्ग के बंद होने से शहर की यातायात व्यवस्था का पूरी तरह से सत्यानाश होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि वाहन चालकों को जिन वैकल्पिक मार्गों से गुजरने की सलाह दी गई है, उनकी मरम्मत या सुदृढ़ीकरण की कोई सुध नहीं ली गई है। इसके परिणामस्वरूप आस-पास की तंग गलियों और अन्य मुख्य मार्गों पर वाहनों का भारी जमघट लगने लगा है, जिससे राहगीर घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं।
आधी सड़क पर काम करने का विकल्प था मौजूद
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर अगर थोड़ी भी सूझबूझ दिखाई जाती तो जनता को इस भारी परेशानी से बचाया जा सकता था। रोड सेफ्टी एक्सपर्ट राजेश शर्मा कहते हैं कि छावनी मार्ग के 60 फीट चौड़ीकरण के कार्य को देखते हुए यदि नगर निगम प्रबंधन चाहता, तो आधी सड़क पर निर्माण कार्य चालू रखकर शेष आधी सड़क को यातायात के सुचारू संचालन के लिए खुला रखा जा सकता था। ऐसा करने से वाहन चालकों को पहले की तरह कम से कम 30 फीट का मार्ग आसानी से मिल जाता। इससे न तो मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ता और न ही आस-पास की रिहायशी गलियों में ट्रैफिक का दम घुटता। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण अब पूरे इलाके के व्यापारियों और नागरिकों को लंबे समय तक इस गंभीर समस्या से जूझना पड़ेगा।
ठेकेदार की शिकायत पर निगम ने लिया कड़ा फैसला
सड़क निर्माण की जमीनी हकीकत और कार्ययोजना को लेकर पिछले दिनों निगम आयुक्त क्षितिज सिंगल और अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में तय किया गया कि 7 मीटर चौड़ाई और 200 मीटर लंबाई के हिस्से में सड़क निर्माण का कार्य सात दिनों की रिकॉर्ड अवधि में पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में केवल मूल ढांचा ही तैयार हो पाएगा, जबकि फिनिशिंग का काम बाद में लंबे समय तक खिंचेगा। इस बीच ठेकेदार एजेंसी ने मधुमिलन चौराहे के पास खुदाई का काम शुरू कर दिया है। ठेकेदार ने अधिकारियों के सामने यह समस्या रखी कि रास्ता बंद होने के बावजूद दोपहिया वाहन चालक किनारों से गाड़ियां निकाल रहे हैं, जिससे काम में बाधा आ रही है। इस शिकायत के बाद निगम ने सख्त कदम उठाते हुए इस मार्ग पर वाहनों का प्रवेश अगले तीन महीनों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
अगस्त के अंत तक मार्ग बंद रहने की सूचना जारी
नगर निगम की योजना शाखा ने इस संबंध में अपनी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस सरकारी आदेश के मुताबिक, 31 अगस्त तक इस पूरे मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अचानक फैसले के बाद पिछले पांच-सात दिनों से दवा बाजार, मधुमिलन चौराहा और उसके आसपास के क्षेत्रों में बेहद अराजक स्थिति निर्मित हो गई है। लोग अपने दोपहिया और चार पहिया वाहनों को फुटपाथों तथा सड़कों के किनारे जैसे-तैसे पार्क कर पैदल ही छावनी बाजार की ओर जाने को मजबूर हैं। बेतरतीब खड़े इन वाहनों के कारण पूरे क्षेत्र में रह-रहकर ट्रैफिक जाम की नौबत आ रही है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। अब छावनी की तरफ जाने के लिए अधिकांश वाहन चालक जावरा कम्पाउंड और नसिया रोड वाले वैकल्पिक रास्तों का सहारा ले रहे हैं, जिससे वहां भी दबाव बढ़ गया है।
निगम द्वारा सुझाए गए तीन वैकल्पिक मार्ग
यातायात को डायवर्ट करने के लिए नगर निगम ने नागरिकों के सामने तीन वैकल्पिक रास्ते पेश किए हैं और उनसे सहयोग की अपील की है। पहले विकल्प के तौर पर वाहन चालक एमवाय अस्पताल से होकर बीजेपी कार्यालय के पास से गुजरते हुए लक्ष्मीनारायण दूध-दही भंडार वाले मार्ग से छावनी क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। दूसरे विकल्प के रूप में जीपीओ चौराहा से होकर आने-जाने का रास्ता सुझाया गया है। तीसरे और अंतिम विकल्प के तौर पर नागरिकों को सरवटे बस स्टैंड की ओर से मिशन अस्पताल वाले मार्ग का उपयोग करते हुए छावनी तक पहुंचने की सलाह दी गई है। हालांकि, इन दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि इन सभी वैकल्पिक मार्गों पर पहले से ही यातायात का अत्यधिक दबाव है, जिससे आने वाले दिनों में वाहन चालकों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं।
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