नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे शहरवासियों का दर्द अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। जलसंकट समस्या को लेकर प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बुधवार को हाई कोर्ट की युगलपीठ ने नगर निगम को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने नगर निगम से कहा है कि वह बताए कि जलसंकट से निपटने के लिए उसने अब तक क्या किया। निगम को 8 जून को होने वाली सुनवाई से पहले जवाब देना है।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई के निर्देश
कोर्ट ने यह निर्देश भी दिए कि वर्षाकाल से पहले सभी शासकीय भवनों में लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई सुनिश्चित कर, इन्हें चालू कर लिया जाए ताकि पहली वर्षा से ही वर्षाजल जमीन में उतरने लगे। जहां रिचार्ज चैनल हैं उन्हें भी मानसून से पहले साफ करें। हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत हुई है।
जनता परेशान, जिम्मेदार मौन
इसमें कहा है कि पूरा इंदौर गंभीर जलसंकट से जूझ रहा है। शहर के कई इलाके हैं जहां कई-कई दिनों तक पानी नहीं मिल रहा। न नल आ रहे हैं न टैंकरों से पानी सप्लाइ किया जा रहा है। आम जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है। परेशान लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं। नगर निगम के जिम्मेदार जलसंकट से निपटने के उपाय करने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
अतिक्रमण और नियमों की अनदेखी
कान्ह नदी सूख रही है। तालाबों पर अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है। शासकीय भवनों पर लगाए गए रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बंद पड़े हैं। इनके रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार 1500 वर्गफीट से बड़े भूखंड पर बनाए मकान में एक पीट बनाना अनिवार्य होता है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
1157 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी बदहाल है कान्ह
याचिका में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया, गजेंद्र चौहान, आयुष चौधरी ने बताया कि कान्ह नदी के शुद्धिकरण के नाम अब तक 1157 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन हालत जस के तस हैं। कान्ह नदी का बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड 70 से 104 एमजी प्रतिलीटर है जबकि यह अधिकतम 3 एमजी प्रतिलीटर होना चाहिए।
कुएं और बावडियां बंद करने का आरोप
याचिका में शहर के पुराने कुएं और बावडियों को बंद करने का मुद्दा भी उठाया गया है। कहा है कि इन्हें संरक्षित करने की कोई योजना निगम और प्रशासन के पास नहीं है। कुएं और बावडियों को धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। कान्ह नदी में आज भी कई आउटफाल हैं। इन्हें बंद करने की क्या योजना है यह किसी को नहीं पता। अधिकारियों की लापरवाही के चलते शहर में भू-जल स्तर तेजी से नीचे उतर रहा है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।
700 से ज्यादा टैंकरों का दावा, फिर भी रोज हो रहे हैं प्रदर्शन
शहर का शायद ही कोई क्षेत्र होगा जहां जलसंकट के चलते रहवासी प्रदर्शन न कर रहे हों। नगर निगम का दावा है कि शहर में 700 से ज्यादा टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। बावजूद इसके जलसंकट है। कांग्रेस ने हाल ही में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए 140 सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक की है जो बताती है कि शहर के कई क्षेत्रों में दूषित पानी सप्लाइ हो रहा है।
20 प्रतिशत शहर में आज भी नर्मदा लाइन नहीं
लगभग 48 वर्ष पहले नर्मदा का पहला चरण इंदौर आया था। अब तक तीन चरण इंदौर आ चुके हैं और नर्मदा के चौथे चरण के काम का भूमिपूजन हो चुका है। बावजूद इसके शहर का 20 प्रतिशत हिस्सा आज भी ऐसा है जहां नर्मदा पहुंच ही नहीं सकी। इन क्षेत्रों में रहवासी पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर हैं, लेकिन गर्मी के चलते बोरिंग दम तोड़ चुके हैं। यही वजह है कि अब रहवासी पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
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