इंदौर में कान्ह सरस्वती नदी को उसके पुराने गौरवशाली स्वरूप में वापस लाने के लिए एक बड़े जन अभियान की शुरुआत हुई है। कृष्णपुरा छत्री घाट पर शहर की तमाम प्रमुख सामाजिक संस्थाएं और पर्यावरण प्रेमी एकजुट हुए। इस दौरान सभी उपस्थित नागरिकों ने नदी को पुनर्जीवित करने का कड़ा संकल्प लिया और इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए पूरे शहर को जागरूक करना बेहद जरूरी है। घाट पर मौजूद समाजसेवियों ने स्पष्ट किया कि नदी सुधार के लिए एक विस्तृत और ठोस योजना तैयार की जा रही है और अब इसे जनभागीदारी के माध्यम से धरातल पर उतारा जाएगा। अभ्यास मंडल के नेतृत्व में आयोजित किए गए इस विशेष कार्यक्रम में शहरवासियों की अच्छी संख्या और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
नदी पुनर्जीवन के लिए बहुस्तरीय प्रयासों की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान भूजल विशेषज्ञ सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नदी को उसके मूल और प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण है और इसके लिए बहुत ही व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे। उन्होंने समझाया कि जहां से इस नदी का उद्गम स्थल है, वहां से लेकर इसके शहर में प्रवेश करने तक के पूरे मार्ग की मिट्टी के संरक्षण और हरियाली को फिर से पुराने ढर्रे पर लाना होगा। इसके अलावा उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जब तक नदी में सीधे मिलने वाले सीवरेज के गंदे पानी और कचरे को पूरी तरह से नहीं रोका जाता, तब तक कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सकता।
हर आयु और वर्ग के नागरिकों को अभियान से जोड़ने की तैयारी
अभ्यास मंडल की माला ठाकुर ने इस आंदोलन की भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम इस पुनीत कार्य में समाज के हर वर्ग को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए शहर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही महिला मंडलों, बुजुर्गों के ग्रुप्स और अन्य सामाजिक संगठनों को भी लगातार संवाद के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। उनका मानना है कि इस अभियान में इंदौर के आम नागरिकों की जितनी अधिक और सक्रिय भागीदारी रहेगी, उतनी ही तेजी से हमें नदी की स्थिति को बेहतर बनाने और उसे स्वच्छ करने में कामयाबी हासिल होगी।
वर्षों से जारी है नदी को बचाने का निरंतर संघर्ष
अभ्यास मंडल के रामेश्वर गुप्ता ने कार्यक्रम के अंत में बताया कि कान्ह सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का यह कार्य कोई नया नहीं है, बल्कि इसके लिए पिछले कई वर्षों से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभ्यास मंडल इस दिशा में हर संभव स्तर पर अपनी पूरी ताकत से कार्य कर रहा है। उन्होंने अंत में अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यह एक बेहद विशाल और दीर्घकालिक कार्य है, जिसे केवल प्रशासनिक स्तर पर पूरा नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए इंदौर के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी और भागीदारी अनिवार्य है।
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