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नहीं चला एसआईआर का बहाना: 30 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले प्रदेशभर के 176 प्राचार्यों से मांगा जवाब

नहीं चला एसआईआर का बहाना: 30 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले प्रदेशभर के 176 प्राचार्यों से मांगा जवाब

प्रदेशभर के ऐसे 176 स्कूलों के प्राचार्यों को विशेष प्रशिक्षण और समीक्षा बैठक के लिए बुलाया गया, जिनका परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहा। इनमें इंदौ …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 06 Jun 2026 08:11:37 AM (IST)Updated Date: Sat, 06 Jun 2026 08:11:37 AM (IST)

खराब रिजल्ट पर मांगा जवाब। (एआई इमेज)

HighLights

  1. कहा- दूसरे स्कूलों की भी लगी थी ड्यूटी, फिर उनके नतीजे अच्छे कैसे आए?
  2. प्रदेशभर के ऐसे 176 स्कूलों के प्राचार्यों को समीक्षा बैठक के लिए बुलाया गया
  3. इंदौर संभाग के 13 और इंदौर जिले के सात शासकीय स्कूल शामिल हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में बेहद कमजोर प्रदर्शन करने वाले शासकीय स्कूलों के प्राचार्यों को गुरूवार और शुक्रवार को भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय मप्र में सीधे जवाब देना पड़ा।

प्रदेशभर के ऐसे 176 स्कूलों के प्राचार्यों को विशेष प्रशिक्षण और समीक्षा बैठक के लिए बुलाया गया, जिनका परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहा। इनमें इंदौर संभाग के 13 और इंदौर जिले के सात शासकीय स्कूल शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रत्येक प्राचार्य से वन-टू-वन चर्चा कर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर उनके स्कूलों का परिणाम इतना खराब क्यों रहा और अगले वर्ष इसे सुधारने के लिए क्या योजना बनाई गई है।

खराब परिणाम का कारण शिक्षकों की एसआईआर में लगी ड्यूटी को बताया

अधिकांश प्राचार्यों ने खराब परिणाम का कारण शिक्षकों की एसआईआर में लगी ड्यूटी को बताया, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हुई और परिणाम कमजोर रहे। इसपर अधिकारियों ने फटकार लगाते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों और स्कूलों के शिक्षकों की भी ड्यूटी एसआईआर सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में लगी थी, लेकिन वहां के विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया।

प्राचार्यों से भरवाए फॉर्म

लोक शिक्षण संचालनालय मप्र पहुंचे प्राचार्यो से माध्यमवार फार्म भी भरवाएं है। जिसमें सभी विषयों के परिणाम के संबंध में अलग-अलग जानकारी मांगी गई। इसके साथ ही वर्ष 2024, 2025 के परिणाम की भी जानकारी मांगी। वहीं स्कूलों में प्रयोगशाला, खेल मैदान, आइब्रेरी, आईसीटी लैब आदि की भी जानकारी मांगी।

परीक्षा के समय प्रयास से नहीं सुधरते परिणाम

वन-टू-वन चर्चा के दौरान अधिकारियों ने प्राचार्यों से यह भी पूछा कि स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान के लिए क्या प्रयास किए गए, कितने नियमित टेस्ट आयोजित हुए और बोर्ड परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता किस प्रकार दी गई। प्राचार्यों को बताया कि केवल परीक्षा के समय प्रयास करने से परिणाम नहीं सुधरते।

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