मुख्यमंत्री का फ्री हेड मिलने के बावजूद अब तक तालाबों के अतिक्रमणों पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चला है। इससे वर्षाकाल में जल संवर्धन की योजना अधूरी रह …और पढ़ें
HighLights
- मानसून की दस्तक, लेकिन अब तक चैनल के अतिक्रमण ही हो रहे चिह्नित
- छोटा बिलावली तालाब के कैचमेंट एरिया में रेस्टोरेंट संचालन की तैयारी है
- चैनल के पास दीवार बनाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को अवरूद्ध कर दिया गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में गहराते जल संकट के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया था कि तालाबों और चैनलों पर हुए सभी अतिक्रमण हटाए जाए। मुख्यमंत्री का फ्री हेड मिलने के बावजूद अब तक तालाबों के अतिक्रमणों पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चला है। इससे वर्षाकाल में जल संवर्धन की योजना अधूरी रह सकती है।
मानसून की दस्तक हो चुकी है, लेकिन अतिक्रमण ही चिह्नित किए जा रहे हैं, जबकि छोटा बिलावली तालाब के कैचमेंट एरिया में रेस्टोरेंट संचालन की तैयारी है और चैनल के पास दीवार बनाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को अवरूद्ध कर दिया गया है। वहीं बिचोली मर्दाना तालाब के कैचमेंट एरिया में तालाब पर कब्जा कर दुकानें खोल कर किराये पर चढ़ा दी गई है।
शहर में गहराता जल संकट प्रशासन और नगर निगम की गंभीर अनदेखी का परिणाम है, जिसने वर्षों से शहर के तालाबों को बदहाल होने के लिए छोड़ दिया। कभी शहर की जल संरचना की रीढ़ माने जाने वाले तालाब आज अतिक्रमण, उपेक्षा और लापरवाही की भेंट चढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा।
हालत यह है कि जल संकट से जुझ रही जनता को राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने जल संकट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तालाबों के अतिक्रमण को सख्ती से हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक तालाबों के केचमेंट एरिया और केनालों से अतिक्रमण नहीं हटाए गए है।
बिचोली मर्दाना, बड़ा बिलावली और छोटा बिलावली जैसे अधिकांश तालाब अब अपना प्राकृतिक स्वरूप खोते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि जो तालाब सालभर पानी से भरे रहते थे, वे अब गर्मी शुरू होते ही सूख गए।छोटा बिलावली तालाब का गहरीकरण तो शुरू कर दिया गया, लेकिन केचमेंट एरिया में निर्माण जारी है। रेस्टोरेंट खोले जा रहे है, लेकिन प्रशासन मुक दर्शक बनकर देख रहा है। वहीं छोटा बिलावली से पिपल्यापाला तालाब में पानी ले जाने वाली चैनल के पास दीवार खड़ी कर दी गई है। तालाबों की सीमाएं लगातार सिकुड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को यह अवैध कब्जे नजर नहीं आ रहे।
भराव कर खोले गैरेज और दुकानें
बिचाेली मर्दाना के तालाब के केचमेंट एरिया भी अतिक्रमण का शिकार हो चुका है। रिंग रोड की दूसरी तरफ पिपल्याहाना क्षेत्र की तरफ तालाब के पूरे हिस्से को गायब कर दिया गया है। यहां पर मिट्टी डालकर भराव कर दुकानें खोल कर किराये पर चढ़ा दी गई। रसुखदारों द्वारा लाखों रुपये महीना किराया लिया जा रहा है, लेकिन प्रशासन और नगर निगम को अतिक्रमण नजर नहीं आ रहे है।
तालाबों का सीमांकन कराया जा रहा है
तालाबों का सीमांकन कराया जा रहा है और इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। तालाबों की चैनल और केचमेंट एरिया में किसी तरह के अतिक्रमण नहीं होने दिए जाएंगे, जहां पर चन्हित होंगे वहां पर रिमूव्ल की कार्रवाई की जाएगी। – शिवम वर्मा, कलेक्टर
योजनाबद्ध तरीके से हटाएंगे
बिचौली और बिलावली तालाब के आसपास और चैनलों पर अतिक्रमण की जानकारी लगी है। जल्द ही योजनाबद्ध तरीके से इन दोनों जगह अतिक्रमण हटाए जाएंगे। हमारा लक्ष्य वर्षाकाल से पहले तालाबों के अतिक्रमण हटाना है और हम इसे पूरा कर लेंगे। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर
इंदौर के छोटा बिलावली तालाब पर प्रशासन की बेरुखी, अतिक्रमण और लापरवाही ने छीना पानी
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