टीम नईदुनिया, इंदौर। भोजन केवल स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि अच्छे समाज और देश का भी आधार है। यह जीवन के लिए तो अत्यावश्यक है ही, समाज और मानवता का भी जरूरी अंग है। किसी भी समाज में यदि एक भी नागरिक भूखा है तो वह खुद को इस परिभाषा में शामिल करने का दावा नहीं कर सकता।
हमारी संस्कृति और परंपरा का मर्म ही है कि कोई भूखा न रहे। इसके बावजूद आज भी हर व्यक्ति तक भोजन पहुंचा पाना सुनिश्चित नहीं किया जा सका है। सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था और स्थान बढ़ाए जाने की आवश्यकता आज भी है।
सात जून को खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है
सुरक्षित, पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए विश्व भर में सात जून को खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के संदर्भ में नईदुनिया की टीम ने प्रदेश में चल रही ऐसी योजनाओं और संस्थाओं की गतिविधियां देखीं।
महज पांच रुपये में एक समय का भोजन उपलब्ध कराते हैं
प्रदेश में सरकारी स्तर पर महज पांच रुपये में एक समय का भोजन उपलब्ध कराने की दीनदयाल रसोई योजना हर जिला मुख्यालय के अलावा छह धार्मिक नगरों मैहर, अमरकंटक, महेश्वर, ओंकारेश्वर, चित्रकूट और ओरछा में भी संचालित होती है। इसकी शुरुआत सात अप्रैल, 2017 को की गई।
इनसे 400 से अधिक सेवा प्रदाता संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं
प्रदेश में इसके 191 रसोई केंद्र हैं। इनसे 400 से अधिक सेवा प्रदाता संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। चार लाख से अधिक लोग रोज इससे लाभ उठाते हैं। दरअसल, नगरीय क्षेत्रों में व्यवसाय एवं श्रम से जुड़े काम के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से गरीब परिवारों का आगमन होता है। उनके लिए भोजन की समुचित व्यवस्था करना कठिन होता है।
गरीबों के लिए इस तरह की योजनाएं बड़ा सहारा बनती हैं
कई गरीब शहरी परिवारों के पास भी पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं होता। इस तरह की योजनाएं बड़ा सहारा बनती हैं। इंदौर में पांच स्थानों पर प्रतिदिन सुबह 10 से तीन बजे के बीच पांच रुपये में भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। खंडवा में दीनदयाल रसोई केंद्र के अलावा रामकृष्ण परमहंस मिशन और जिला अस्पताल परिसर में लायंस क्लब मरीजों और उनके स्वजन को नाममात्र शुल्क पर भोजन उपलब्ध कराता है।
खरगोन में सार्वजनिक सेवा समिति ट्रस्ट वर्ष 1997 से जिला अस्पताल के पास मात्र 10 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है। रतलाम में श्री बद्रीनारायण सेवा मंडल ट्रस्ट, श्री अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र और कालिका माता सेवा मंडल सहित कई संस्थाएं वर्षों से निश्शुल्क अन्नक्षेत्र संचालित कर रही हैं।
विदिशा में सार्वजनिक भोजनालय सेवा समिति द्वारा मरीजों के स्वजन को एक रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। मानव सेवा न्यास द्वारा पिछले 30 वर्षों से रोज बुजुर्गों को निश्शुल्क भोजन कराया जाता है। सागर में सीताराम रसोई इसी तरह की सेवा में 23 वर्ष से लगी हुई है।
गुना में सेवा भारती और कामधेनु जैसी संस्थाएं मरीजों के स्वजन को भोजन उपलब्ध कराती हैं। जबलपुर में पांच स्थानों पर दीनदयाल रसोई केंद्र संचालित हो रहे हैं। ग्वालियर में समर्पण कृष्णायन वेलफेयर संस्था, ग्वालियर सेवाभाव समिति, अचलेश्वर न्यास जैसी संस्थाएं पुण्य कार्य में संलग्न हैं।
सामाजिक संगठनों और दानदाताओं से भी सहयोग मिलता है
दानदाता ही बड़ा आधार दीनदयाल रसोई योजना के लिए राज्य सरकार की ओर से गेहूं और चावल उपलब्ध कराया जाता है। रसोई केंद्रों से जुड़े सामाजिक संगठनों और दानदाताओं से भी सहयोग मिलता है। सरकार और समाज के सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो जाता है।
पोषण आहार पर प्रतिवर्ष करीब 1400 करोड़ खर्च, पिछले वर्ष गंभीर कुपोषित 7.37 लाख बच्चों में से आधे भी नहीं उबर पाए कुपोषण से
Source link
#खदय #सरकष #दवस #दनदयल #रसई #और #समजक #ससथए #रज #लख #लग #क #उपलबध #करव #रह #भजन



Post Comment