नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। उज्जैन सिंहस्थ-2028 को देखते हुए रेलवे द्वारा रतलाम मंडल अंतर्गत इंदौर के मुख्य रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य किया जा रहा है। सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट की तर्ज पर रेलवे स्टेशन नया एवं भव्य आकार लेगा, लेकिन निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। वर्षाकाल के दौरान ही वर्तमान रेलवे स्टेशन भवन को जमींदोज करने का काम होगा। जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ेगी।
प्लेटफार्म एक पर स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही पार्सल कार्यालय के पास वाले हिस्से में काम चल रहा है। इससे यात्रियों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। स्टेशन से कुल 23 कार्यालय स्थानांतरित होंगे। यात्रियों को ये पता करने में भी परेशानी का सामना करना होगा कि कौन-सा कार्यालय कहां पर स्थानांतरित हुआ है।
पटेल ब्रिज की तरफ पार्सल कार्यालय के पास पिछले आठ महीने से खोदाई जारी है। अब तक सिर्फ वाटर प्रूफिंग का काम पूरा हुआ है। वहीं, लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन को जनवरी 2026 में पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का रेलवे अधिकारियों ने दावा किया था, लेकिन यहां भी निर्माण कार्य अधूरा है। इसको पूरा होने में लगभग छह महीने और लगेंगे। उधर, इंदौर-धार, इंदौर-खंडवा, इंदौर-मनमाड़ और इंदौर-बुधनी रेल परियोजनाओं के काम भी धीमी गति से चल रहे हैं।
यात्रियों के लिए आवागमन होगा बंद
मोंटे कार्लो लिमिटेड कंपनी को 412 करोड़ रुपये की लागत से मुख्य रेलवे स्टेशन पर जी-प्लस सेवन भवन का निर्माण कार्य 42 महीने में पूरा करना है। इसमें मल्टीलेवल पार्किंग, यात्री प्रतीक्षालय कक्ष, हाईटेक प्लेटफार्म और अन्य सुविधाएं रहेंगी। पार्सल कार्यालय के पास वाटर प्रूफिंग का काम पूरा हो गया है। यह काम सबसे महत्वपूर्ण था, इसलिए समय लगा।
बिल्डिंग फाउंडेशन का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही पार्सल कार्यालय के पास फुटओवर ब्रिज (एफओबी) को तोड़कर आगे के हिस्से में काम शुरू होगा। वर्तमान स्टेशन से यात्रियों के लिए आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यात्रियों को आवागमन जीआरपी थाने के पास बने एफओबी से करना होगा। यात्रियों की भीड़ बढ़ने से एक ही एफओबी से आवागमन में बहुत परेशानियां आएंगी।
खासकर बुजुर्ग महिला-पुरुष, दिव्यांगों, गर्भवती और छोटे बच्चों को ज्यादा परेशानी होगी। वर्षाकाल में पैर फिसलकर गिरने का खतरा भी ज्यादा होगा। उधर, कान्ट्रेक्टर कंपनी का कहना है स्टेशन बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद ही काम में तेजी आएगी। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि भवन की शिफ्टिंग की तैयारी अंतिम चरण में है। अगले एक महीने में प्लेटफार्म-एक से शिफ्टिंग हो जाएगी। फिर डिस्मेंटल और आगे के काम के लिए हिस्सा दे दिया जाएगा।
ये काम हो चुके
- पार्सल कार्यालय का स्थानांतरण।
- दोपहिया पार्किंग एक नंबर. प्लेटफार्म सामने बना।
- कुली कक्ष स्थानांतरित किया।
- आरपीएफ थाना, मुख्य टीसी कार्यालय प्लेटफार्म नंबर चार पर स्थानांतरित किया।
- डिप्टी एसएस कमर्शियल का कार्यालय प्लेटफार्म नंबर चार पर स्थानांतरित किया।
अगले महीने तक होने हैं ये काम
- प्लेटफार्म नंबर एक टूटेगा। ऐसे में यात्रियों की दिक्कतें बढ़ेंगी।
- जीआरपी थाना वर्तमान में बने अस्थायी पार्सल कार्यालय के पास स्थानांतरित होगा।
- पूछताछ कार्यालय प्लेटफार्म नंबर चार पर स्थानांतरित होगा।
- पीआरओ कार्यालय आरक्षण कार्यालय के पास स्थानांतरित होगा।
- आईआरसीटीसी कार्यालय भी आरक्षण कार्यालय के पास स्थानांतरित होगा।
लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन
वर्तमान लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के नए भवन में 12 जून से काम शुरू होगा। स्टेशन मास्टर कार्यालय स्थानांतरित हो रहा है। फिर पुराने स्टेशन भवन को जमींदोज किया जाएगा। अगले दो से तीन महीने में इस हिस्से में पटरी बिछाने व प्लेटफार्म बनाने का निर्माण होगा।
निर्माण कार्य में लेटलतीफी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार 12 मीटर चौड़ा एफओबी का काम चल रहा है, जो अगस्त तक पूरा होगा। यहां पर कुल पांच प्लेटफार्म हो जाएंगे।
इंदौर-धार रेलवे परियोजना
मालवा और आदिवासी अंचल की बहुप्रतीक्षित इंदौर-दाहोद रेल परियोजना शिलान्यास के लगभग 18 वर्ष बाद भी अधूरी है। आठ फरवरी 2008 को शुरू हुई महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई 204.76 किमी है। मात्र 45 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना का 32.30 किमी हिस्सा वर्तमान में संचालित हो रहा है। इंदौर-टीही (21 किमी) व गुजरात क्षेत्र का कटवारा-दाहोद (11.30 किमी) खंड शामिल है।
इंदौर-धार के बीच महत्वपूर्ण एवं तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण तीन किमी लंबी टीही-पीथमपुर टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। टनल निर्माण में अपेक्षा से कुछ ज्यादा विलंब हुआ है। टनल के अंदर ब्लास्ट लैंस ट्रैक बिछाने और अन्य तकनीकी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इंदौर-धार रेलखंड पर 31 मार्च 2026 को सफल ट्रायल टावर वैगन से किया जा चुका है, जिससे मार्ग पर रेल संचालन की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
टनल से जुड़े शेष कार्य निर्धारित समय में पूर्ण हो जाते हैं तो अगस्त 2026 तक इंदौर-धार रेल संपर्क शुरू होने की उम्मीद है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद, धार स्टेशन भवन, प्लेटफार्म व अन्य यात्री सुविधा के कार्य प्रगति पर है। सागौर, गुणावद, धार में ओवरहेड इक्विपमेंट पूरा हो चुका है। सागौर से पीथमपुर तक विद्युतीकरण का काम जारी है। पीथमपुर से धार तक सिग्नलिंग तक का कार्य पूरा नहीं हुआ।
खंडवा-महू रेलवे परियोजना
महू-खंडवा-महू (डॉ. अंबेडकर नगर) मीटरगेज से ब्राडगेज में परिवर्तन की प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक है। इंदौर-खंडवा के बीच सीधी ब्राडगेज रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच वैकल्पिक रेल कारिडोर बंद है। ब्राडगेज लाइन परिवर्तन के लिए 2017 से रेल मार्ग बंद है।
खंडवा-महू प्रस्तावित ब्राडगेज लाइन 156 किमी लंबी है। काम की धीमी गति के कारण पांच साल में पूरा होने वाला काम नौ साल बाद भी अधूरा है। पूरा होने में अभी दो से तीन साल और लगने की संभावना है। ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही सिग्नलिंग, यार्ड व विद्युतीकरण का काम चल रहा है।
ओंकारेश्वर, मुख्त्यार-बलवाड़ा की तरफ काम जारी है। फिलहाल खंडवा से सनावद तक मेमू ट्रेन का संचालन हो रहा है। परियोजना में सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा महू से ओंकारेश्वर रोड के बीच का है। महू-ओंकारेश्वर रोड खंड के लगभग 90 किमी हिस्से में वन क्षेत्र से जुड़ी स्वीकृति सहित अन्य प्रक्रिया चल रही है।
इसके लिए रेलवे वन विभाग को लगभग 100 करोड़ रुपये जमा कर चुका है। सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। वन विभाग द्वारा पातालपानी के आगे पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है। कटाई के बाद टनल बनाने का काम शुरू होगा। ओंकारेश्वर स्टेशन के पहले नर्मदा पर ब्रिज बनाने के लिए कालम निर्माण हो चुका है। वहीं, खंडवा से आकोट के बीच भी गेज परिवर्तन का कार्य चलने से वहां भी ट्रेन का संचालन बंद है।
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