भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश और पंचाचूली क्षेत्र का दौरा किया। अपने निजी दौरे के दौरान उन्होंने भगवान शिव के पवित्र धाम आदि कैलाश में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लिया। पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि ऋषभ पंत जैसे लोकप्रिय क्रिकेटर के इस दौरे से आदि कैलाश, पंचाचूली और दारमा घाटी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे न केवल धार्मिक और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। 10 जून को पंचाचूली का किया दीदार
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत ने 10 जून को पिथौरागढ़ की दारमा घाटी पहुंचकर अपने सीमांत क्षेत्र के दौरे की शुरुआत की। यहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पंचाचूली पर्वत श्रृंखला और आसपास की प्राकृतिक वादियों का भ्रमण किया। नाबी गांव के होम स्टे में रुके
दारमा घाटी दौरे के दौरान ऋषभ पंत नाबी गांव स्थित एक होम स्टे में ठहरे। उनके आगमन की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल बन गया और कई लोग उनसे मिलने पहुंचे। 12 जून को आदि कैलाश पहुंचकर की पूजा-अर्चना
होम स्टे संचालक सुरेंद्र सिंह नबियाल ने बताया कि 12 जून को ऋषभ पंत ज्योलिंगकांग स्थित आदि कैलाश पहुंचे। यहां उन्होंने शिव-पार्वती मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और पवित्र धाम में कुछ समय बिताया। आईटीबीपी के जवानों से की मुलाकात
आदि कैलाश दौरे के दौरान ऋषभ पंत ने भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं तथा कई फैंस को ऑटोग्राफ देकर अपने दौरे का समापन किया। गंगोलीहाट में है पैतृक गांव
ऋषभ पंत का उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव है। उनका पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र से है। यही वजह है कि उनका आदि कैलाश और दारमा घाटी का दौरा स्थानीय लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। सीमांत क्षेत्र पहुंचने पर लोगों ने उन्हें अपने बीच पाकर खुशी जताई, जबकि पंत ने भी स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के प्रति अपना लगाव प्रदर्शित किया।
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