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डिंडौरी में पैतृक संपत्ति हड़पने का बड़ा खेल, कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 4 पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

डिंडौरी में पैतृक संपत्ति हड़पने का बड़ा खेल, कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 4 पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए फर्जी वसीयत और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नामांतरण करने के मामले में कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 4 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनोडिया के आदेश पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

कोर्ट में परिवाद दायर किया था

जिला मुख्यालय के वार्ड-4 निवासी इन्द्रपाल सोनपाली ने कोर्ट में परिवाद दायर किया था। आवेदन के अनुसार उनके दादा बालमुकुन्द सोनपाली का निधन 1989 में हुआ था। उनकी डिंडौरी नगर व आसपास अचल संपत्ति है। बंटवारे को लेकर इन्द्रपाल के चाचा नंदलाल सोनपाली और उसके बेटे रोहित सोनपाली से विवाद चल रहा है। सिविल केस 28ए/2021 डिंडौरी कोर्ट में निराकृत होने के बाद हाईकोर्ट जबलपुर में अपील विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने 7 मई 2007 को अपील निराकरण तक संपत्ति विक्रय पर रोक लगाई थी।

फर्जी वसीयत से नामांतरण का आरोप

इन्द्रपाल का आरोप है कि नंदलाल सोनपाली ने दादी के नाम से फर्जी वसीयत बनाकर तहसीलदार के प्रकरण क्र. 0345/अ-6/2022-23 में आदेश दिनांक 4 जुलाई 2022 से वार्ड-5 की 3.245 हेक्टेयर पैतृक भूमि अपने नाम करा ली। इस जमीन पर मकान, कुआं और बगीचा है। इसके बाद 5 अगस्त 2022 को बेटे रोहित के नाम दानपत्र कर दी।

इसी तरह ग्राम सुबखार वार्ड-1 की खसरा नं. 104 की 3.5450 हेक्टेयर जमीन भी फर्जी वसीयत से प्रकरण क्र. 0346/अ-6/2022-23 में 4 जुलाई 2022 को अपने नाम कराकर 26 अक्टूबर 2022 को अनिल खनूजा को बेच दी।

कूटरचित शपथ पत्र से हुआ नामांतरण

आवेदन में कहा गया कि दोनों नामांतरण में इन्द्रपाल के फर्जी हस्ताक्षर से शपथ पत्र तैयार किए गए, जिसमें लिखा था कि नामांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है। इन्द्रपाल का कहना है कि वह कभी तहसील कोर्ट में पेश नहीं हुआ। हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविन्दराम सलामे ने पद का दुरुपयोग कर अवैधानिक नामांतरण किया।

बताया गया कि वार्ड-5 की जमीन पर पैतृक मकान व वृक्ष होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड से ‘परिवर्तित’ श्रेणी हटाकर कृषि भूमि दर्शा दी गई, ताकि कलेक्टर की अनुमति के बिना हस्तांतरण हो सके। दानपत्र में भी झूठा उल्लेख किया कि जमीन पर मकान, कुआं, वृक्ष नहीं है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ केस

सीजेएम कोर्ट ने दांडिक पुनरीक्षण क्र. 11/25 और सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत माधव विरुद्ध स्टेट ऑफ महाराष्ट्र 2013 के परिप्रेक्ष्य में थाना प्रभारी को अपराध दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। इस पर कोतवाली पुलिस ने नंदलाल सोनपाली, रोहित सोनपाली, पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविन्दराम सलामे के खिलाफ धारा 420, 468, 471 भादवि के तहत केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

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