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कानपुर से 700 किमी का सफर तय कर इंदौर जू आएगा हिप्पोपोटेमस सतीश, 20 हजार लीटर पानी स्प्रे करते हुए लाएंगे यहां

कानपुर से 700 किमी का सफर तय कर इंदौर जू आएगा हिप्पोपोटेमस सतीश, 20 हजार लीटर पानी स्प्रे करते हुए लाएंगे यहां

कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर। कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में मादा हिप्पोपोटेमस (दरियाई घोड़ा) डिंपी को जल्द ही नया साथी मिलेगा। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत कानपुर चिड़ियाघर से नर हिप्पो सतीश को लाने की अनुमति मिल गई है। महीनेभर के भीतर सतीश को दर्शक निहार सकेंगे। खास बात यह है कि सतीश को कानपुर से लाने को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

करीब 700 किलोमीटर के इस सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विशेषज्ञों की मौजूदगी में लाया जाएगा। इस दौरान पूरे सफर में हिप्पो को नहाते-नहाते लाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक इंदौर चिड़ियाघर से एक शेर (लायन) भेजा जाएगा।

2017 में ग्वालियर से आई थी डिंपी

ग्वालियर चिड़ियाघर में तीन हिप्पो थे, जिसमें अप्पू (नर), डिंपी (मादा) और गोलू (बेबी हिप्पो) थे। 2017 में ग्वालियर से मादा हिप्पो डिंपी को इंदौर प्राणी संग्रहालय लाया गया था। इस दौरान गोलू को डिंपी के पिंजरे में रखा गया। चूंकि नर हिप्पो नहीं होने के चलते चिड़ियाघर में इनकी संख्या नहीं बढ़ी है। इसके चलते अब कानपुर से नर हिप्पो सतीश को लाया जा रहा है। चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक डिंपी की अभी उम्र बीस साल है, जबकि गोलू को आठ साल का हो चुका है।

भेजे गए सात शेर

इंदौर चिड़ियाघर में शेरों की संख्या 13 पहुंच गई है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत हिप्पो के बदले में शेरनी वीरा को कानपुर भेजेंगे। इसके लिए सेंट्रल जू अथारिटी ने मंजूरी दे दी है। पूर्व में भी चिड़ियाघर से सात शेर को भेजा गया है, जिसमें रायपुर, चेन्नई और गुजरात का जामनगर चिड़ियाघर शामिल है। इनके बदले में इंदौर चिड़ियाघर में चार पीले एनाकोंडा, दो शुतुरमुर्ग सहित अन्य जानवरों को लाया गया है।

अकेला है शंकर

एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत कानपुर चिड़ियाघर से हिप्पो सतीश को लाया जा रहा है, जो अगले महीने तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बदले में इंदौर चिड़ियाघर से शेरनी वीरा को भेजने की अनुमति मिल गई है। अधिकारियों के मुताबिक कानपुर चिड़ियाघर में शेर शंकर काफी समय से अकेला है। उसके लिए नई साथी शेरनी वीरा जाएगी। फिलहाल चिड़ियाघर में शंकर, उसकी मां उमा और बहन नंदिनी हैं।

20 हजार लीटर पानी का होगा इस्तेमाल

सतीश को इंदौर चिड़ियाघर लाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पिंजरे में उसे पूरे रास्ते पानी की सुविधा दी जाएगी, क्योंकि हिप्पो ऐसा जानवर हैं जो अपना ज्यादातर समय पानी में बिताना पसंद करता है। उसका शरीर पानी के संपर्क में रहने से ठंडा और नम बना रहता है। अगर लंबे समय तक पानी न मिले तो उन्हें परेशानी हो सकती है।

इसके चलते सतीश के लिए एक विशेष पिंजरा तैयार किया जा रहा है। इसमें ऐसी व्यवस्था होगी, जिससे सफर के दौरान उस पर पानी की बौछार की जा सके। जरूरत पड़ने पर रास्ते में कर्मचारियों द्वारा बाल्टियों से भी पानी डाला जाएगा। इस पूरी यात्रा में सतीश को नहलाने और शरीर की नमी बनाए रखने के लिए करीब 20 हजार लीटर पानी खर्च होने का अनुमान है।

पानी में रहना पसंद

हिप्पो को आमतौर पर पानी का जीव माना जाता है, लेकिन वह जमीन पर भी रह सकता है। उसके शरीर की बनावट और त्वचा की जरूरतों के कारण पानी उसके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही कारण है कि चिड़ियाघर प्रशासन ने उसके सफर के दौरान हर छोटी जरूरत का ध्यान रखने की योजना बनाई है। इसके लिए कानपुर चिड़ियाघर में सतीश की सुरक्षा, भोजन, आराम और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी।

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इंदौर जू में अभी मादा हिप्पो है

चिड़ियाघर में कानपुर से नर हिप्पो सतीश को लाने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद यहां हिप्पो का जोड़ा पूरा हो जाएगा, क्योंकि अभी मादा में सिर्फ डिंपी मौजूद है। वैसे सतीश को लाने के लिए महीनेभर का समय लगेगा। हिप्पो के बदले में शेर दिया जाएगा। – डॉ. उत्तम यादव, प्रभारी, कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय

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