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हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में जजों के रिक्त पद भरने की मांग, बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख लंबित मामलों पर जताई चिंता

हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में जजों के रिक्त पद भरने की मांग, बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख लंबित मामलों पर जताई चिंता

पत्र में कहा है कि जजों की कमी की वजह से प्रकरणों के निराकरण की गति प्रभावित हो रही है। लंबित प्रकरणों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे पक…और पढ़ें

Publish Date: Fri, 03 Jul 2026 08:57:19 AM (IST)Updated Date: Fri, 03 Jul 2026 08:57:19 AM (IST)

इंदौर हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में रिक्त जजों के पदों को शीघ्र भरने की मांग की है
  2. पत्र में कहा है कि जजों की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है और लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है
  3. अध्यक्ष मनीष यादव और सचिव मनीष गड़कर के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा है कि इंदौर पीठ में जजों के 13 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात न्यायमूर्ति ही पदस्थ हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में रिक्त जजों के पदों को शीघ्र भरने की मांग की है।

पत्र में कहा है कि जजों की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है और लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अध्यक्ष मनीष यादव और सचिव मनीष गड़कर के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा है कि इंदौर पीठ में जजों के 13 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात न्यायमूर्ति ही पदस्थ हैं। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायाधीशों की संख्या कम होने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

लगातार बढ़ रही लंबित मामलों की संख्या

पत्र में कहा है कि जजों की कमी की वजह से प्रकरणों के निराकरण की गति प्रभावित हो रही है। लंबित प्रकरणों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे पक्षकार, अधिवक्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है। मांग की है कि इंदौर पीठ में स्वीकृत जजों के पद पर जल्द नियुक्तियां सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका में सुनवाई टली

इंदौर : उज्जैन-इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र को लेकर शासन द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में गुरुवार को सुनवाई होना थी, लेकिन टल गई। अब इस मामले में 10 जुलाई को सुनवाई होगी। याचिका में कहा है कि कानूनी बिंदुओं पर विचार किए बगैर अधिसूचना जारी की गई है।

संविधान के 74 वे संशोधन की मंशा स्थानीय निकायों को मजबूती प्रदान करने की है, लेकिन मेट्रोपालिटन क्षेत्र को लेकर जारी अधिसूचना में ऐसा नहीं किया गया। मेट्रोपालिटन क्षेत्र में जिन स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है उससे चर्चा भी नहीं की गई। न ही सुझाव लिए गए। मेट्रोपालिटन क्षेत्र में उज्जैन और इंदौर को शामिल किया गया है, लेकिन इन दोनों शहरों की प्रकृति अलग-अलग है।

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