बिचौली मर्दाना क्षेत्र में एक डिलीवरी बॉय पर तेंदुए ने हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। बुधवार को वन विभाग की टीम ने तेंदुए …और पढ़ें
HighLights
- इंदौर वनमंडल के जंगलों में ही 110 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है
- बिचौली मर्दाना क्षेत्र में एक डिलीवरी बॉय पर तेंदुए ने हमला कर दिया
- वन विभाग की टीम ने तेंदुए की तलाश में कई जगह सर्चिंग की, लेकिन उसके मौजूद होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के बाद अब ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में भी पहचान मिल चुकी है। प्रदेश में 3907 से अधिक तेंदुए हैं। अकेले इंदौर वनमंडल के जंगलों में ही 110 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। यही वजह है कि जंगल से सटे इलाकों, खासकर बायपास के आसपास की कॉलोनियों और टाउनशिप में तेंदुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
मंगलवार को बिचौली मर्दाना क्षेत्र में एक डिलीवरी बॉय पर तेंदुए ने हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। बुधवार को वन विभाग की टीम ने तेंदुए की तलाश में कई जगह सर्चिंग की, लेकिन उसके मौजूद होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके बावजूद विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की है।
वन अधिकारियों के मुताबिक रालामंडल और देवगुराड़िया का जंगल तेंदुओं का प्राकृतिक आवास है। इस पूरे क्षेत्र में 10 से अधिक तेंदुओं का नियमित मूवमेंट रहता है। भोजन की तलाश में ये अक्सर जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं। आवारा कुत्ते, छोटे पालतू जानवर और अन्य आसान शिकार इन्हें आबादी वाले क्षेत्रों तक खींच लाते हैं।
कुत्ते पहचानते हैं तेंदुए की हलचल
विशेषज्ञ देवेंद्र राजपूत बताते है कि कुत्तों की सूंघने और सुनने की क्षमता बेहद तेज होती है। वे तेंदुए की गंध या हल्की आहट भी जल्दी पकड़ लेते हैं। झुंड में रहने वाले कुत्ते अलग-अलग दिशाओं में बैठकर पूरे इलाके पर नजर रखते हैं। यदि किसी एक कुत्ते को तेंदुए का एहसास होता है, तो वह खास तरह से गुर्राकर या तेज आवाज में भौंककर पूरे झुंड को सतर्क कर देता है। ऐसे समय में कुत्तों का व्यवहार भी बदल जाता है। वे लगातार एक ही दिशा में देखते हैं और सामान्य भौंकने के बजाय चेतावनी देने वाली तेज आवाजें निकालते हैं।
मवेशियों पर भी हमला
इंदौर वनमंडल के जंगलों में 110 तेंदुएं है। अकेले चोरल में 40 से ज्यादा तेंदुए है। महू-मानपुर में 25 से 30 और बीस इंदौर रेंज में तेंदुए हो चुके है। जंगल से सटे गांवों में भी आए दिन तेंदुए के हमले की घटनाए होती है। अधिकारियों के मुताबिक 2025-26 के बीच 35 मवेशियों को शिकार बनाया है।
एक दर्जन घटनाएं
पिछले एक साल में बायपास से लगी कॉलोनियों और टाउनशिप में एक दर्जन से ज्यादा बार तेंदुए देखे जा चुके हैं। हालांकि, इनमें से केवल दो-तीन मामलों में ही वन विभाग उन्हें सुरक्षित पकड़ पाया। अधिकांश बार तेंदुए खुद ही वापस जंगल की ओर लौट गए। कुछ दिन पहले असरावर्द ग्रिड से एक तेंदुए का सफल रेस्क्यू किया गया था, जिसे बाद में सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। इससे पहले आईआईटी इंदौर और राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआरकैट) परिसर में भी तेंदुओं की गतिविधियां सामने आ चुकी हैं।
ये हैं प्रमुख मामले
- 20 मार्च 2025: बायपास के मांगलिया क्षेत्र की एक टाउनशिप में तेंदुआ देखा गया।
- 22 नवंबर 2023: सिल्वर स्प्रिंग फेस-2 में तेंदुए की मौजूदगी के बाद चार दिन तक सर्च अभियान चला।
- 15 दिसंबर 2025: सहारा सिटी से एक तेंदुए का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया।
कम होने लगा दायरा
तेंदुए की आबादी तेजी से बढ़ रही है। उसकी तुलना में जंगल का दायरा घट रहा है, क्योंकि सड़क-हाईवे और रेल प्रोजेक्ट के चलते जंगल कम हुआ है। इसे जानवरों की आवासी क्षेत्र बिगड़ गया है। इस वजह से तेंदुए जंगल से बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों में नजर आते है। -लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल
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