सरदार सरोवर के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और आवंटित प्लाटों के पंजीयन में गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो …और पढ़ें
HighLights
- सरदार सरोवर प्रोजेक्ट में डूब प्रभावितों की परेशानी को लेकर जनहित याचिका समाजसेवी मेधा पाटकर ने दायर की है
- इसमें परियोजना के तहत विस्थापितों को आवंटित पुनर्वास भूखंडों के पंजीयन, स्वामित्व हस्तांतरण और अन्य अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है
- पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुनर्वास प्लाटों के पंजीयन की धीमी रफ्तार को लेकर नाराजगी जताई थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सरदार सरोवर के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और आवंटित प्लाटों के पंजीयन में गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में सभी पक्षों की अंतिम बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सरदार सरोवर प्रोजेक्ट में डूब प्रभावितों की परेशानी को लेकर जनहित याचिका समाजसेवी मेधा पाटकर ने दायर की है। इसमें सरदार सरोवर परियोजना के तहत विस्थापितों को आवंटित पुनर्वास भूखंडों के पंजीयन, स्वामित्व हस्तांतरण और अन्य अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुनर्वास प्लाटों के पंजीयन की धीमी रफ्तार को लेकर नाराजगी जताई थी।
28 अप्रैल तक की स्थिति में सरकार की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 25,602 आवंटित प्लाटों के लिए 15,330 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 194 दावे-आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बावजूद केवल 2,095 प्लाटों का ही पंजीयन पूरा हो सका। इस पर कोर्ट ने सरकार को प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश जारी किए थे। साथ ही लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए भी कहा था।
वहीं याचिकाकर्ता पाटकर ने आरोप लगाया था कि सुनवाई में गंभीर गड़बडिय़ां सामने आ रही है, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेजों से अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने की बात भी कोर्ट में रखी थी। डेढ़ साल पहले समाजसेवी पाटकर की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई इस याचिका पर 29 जून को पिछली सुनवाई हुई थी। उस समय सरकार और नर्मदा विकास प्राधिकरण की ओर से जवाब पेश किया गया था। जिसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षों को पूरे केस का संक्षिप्त सार कोर्ट में पेश करने के लिए कहा था।
कोर्ट ने सभी को दो पेज में पूरे केस की डिटेल देने के लिए कहा था। सभी पक्षों द्वारा कोर्ट के निर्देश पर अपनी ओर से पूरे केस का सार रख दिया था। गुरुवार को इस मामले में सभी पक्षों ने अपनी ओर से कोर्ट में अंतिम दलीलें पेश की गई। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान नर्मदा विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) डा. राजेश राजौरा को भी कोर्ट में पेश होना पड़ा था। सरकार द्वारा प्रभावितों के प्लॉट्स को लेकर कोई कार्रवाई नहीं करने पर कोर्ट ने उन्हें तलब किया था।
सरदार सरोवर बांध समझौते से तीन दशक का विवाद खत्म, डूब प्रभावित 192 गांवों का इंतजार बरकरार
Source link
#सरदर #सरवर #बध #क #वसथपत #क #ममल #म #सनवई #पर #इदर #हईकरट #न #फसल #रख #सरकषत



Post Comment