शासकीय अस्पतालों में व्यवस्थाओं में सुधार के सिर्फ दावे होते हैं, हकीकत यह है कि मरीजों को इलाज के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। एमजीएम मे़डिकल कॉल…और पढ़ें
HighLights
- आउटसोर्स बीवीजी कंपनी पर पांच बार लाखों का जुर्माना, लेकिन नहीं सुधरे हालात
- अस्पतालों में अभी भी बीवीजी के कंपनी के कर्मचारी नजर नहीं आते हैं
- यहां मरीजों के स्वजन ही इलाज के लिए उन्हें स्ट्रेचर पर धकाते हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शासकीय अस्पतालों में व्यवस्थाओं में सुधार के सिर्फ दावें होते हैं, हकीकत यह है कि मरीजों को इलाज के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। एमजीएम मे़डिकल कॉलेज से जुड़े एमवायएच सहित सभी अस्पतालों में मरीजों को अभी भी स्ट्रेचर और व्हीलचेयर स्वजन को धकेलना पड़ रहे हैं।
हाल ही में एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें माता-पिता अपने बेटे को भीषण गर्मी में स्ट्रेचर पर लेकर भटक रहे थे। मामले में कालेज प्रबंधन ने आउटसोेर्स बीवीजी कंपनी पर एक लाख रूपये जुर्माना लगाया था और इसे ब्लैक लिस्टेड करने की अनुसंशा भी की थी। लेकिन हालात में इसके बावजूद कोई सुधार नहीं आया है।
अस्पतालों में अभी भी बीवीजी के कंपनी के कर्मचारी नजर नहीं आते हैं। यहां मरीजों के स्वजन ही इलाज के लिए उन्हें स्ट्रेचर पर धकाते हैं। हालात यह है कि कई बार बुजुर्ग तक स्ट्रेचर को धकाते हैं। कंपनी और अस्पतालों के जिम्मेदार अधिकारी यह स्थिति देखते हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है।
गौरतलब है कि कंपनी को हर माह साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर करोड़ों रूपये का भुगतान किया जाता है। गौरतलब है प्रबंधन द्वारा कंपनी द्वारा किए जा रहे कार्यो कि निगरानी तक नहीं की जा रही है। बता दें कि कंपनी द्वारा लापरवाही बरतने के बावजूद भी आईएसबीटी सहित अन्य प्रमुख स्थानों की जिम्मेदारी इसे दे दी गई है।
मां को व्हीलचेयर पर लेकर भटकती रही बेटी
एमवाय अस्पताल ओपीडी में मां के पैर का एक्स-रे कराने आई बेटी परेशानी होती रही। पीड़ित उमा बाई ने बताया कि डाक्टर ने जांच लिखी थी। पहले नई ओपीडी भेजा गया, फिर वहां से पुरानी बिल्डिंग जाने को कहा गया। मां चल नहीं सकती, इसलिए व्हीलचेयर पर बड़ी मुश्किल से लेकर जाना पड़ा। यही स्थिति रोज अस्पताल आने वाले कई मरीजों की है। कई बार मरीज शिकायत करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। ऐसे ही एक बुजुर्ग अपनी पत्नी को स्ट्रेचर पर धकाते हुए इलाज के लिए लेकर पहुंचे।
कंपनी पर चार माह में पांच बार जुर्माना
कंपनी द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है। हाल ही में सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल की पार्किंग में कार में शराब की पेटियां मिली थीं। तब भी सुरक्षा की बात सामने आई थी। चार मेडिकल कालेज में बीवीजी कंपनी का कार्य अच्छा नहीं होने पर इसे ब्लैकलिस्टेड किया गया है। कंपनी पर चार माह में पांच बार लाखों रूपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
जब रास्ता महज पांच मिनट का, तो अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे 39 मिनट की देरी…आखिर क्यों!
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