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इंदौर वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: 100 एकड़ में बनेगा नया सिटी फॉरेस्ट… वॉकिंग ट्रैक से ओपन जिम तक मिलेंगी ये सुविधाएं

इंदौर वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: 100 एकड़ में बनेगा नया सिटी फॉरेस्ट… वॉकिंग ट्रैक से ओपन जिम तक मिलेंगी ये सुविधाएं

इंदौर विकास प्राधिकरण स्कीम-97 में 100 एकड़ में सिटी फॉरेस्ट विकसित करने जा रहा है।

Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 12:07:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 12:07:05 PM (IST)

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा ऑक्सीजन जोन (AI Generated Image)

HighLights

  1. 100 एकड़ में बनेगा सिटी फॉरेस्ट
  2. मियावाकी तकनीक से बनेगा घना जंगल
  3. वॉकिंग ट्रैक और ओपन जिम भी बनेगा

डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) शहर को एक और बड़ा हरित क्षेत्र देने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद स्कीम-97 (रेत मंडी क्षेत्र) में मिली 80 हेक्टेयर से अधिक जमीन में से 40 हेक्टेयर (करीब 100 एकड़) क्षेत्र को सिटी फॉरेस्ट के लिए आरक्षित किया गया है। इसी महीने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है, जहां करीब 2.5 लाख पौधे लगाए जाएंगे।

मियावाकी तकनीक से 3 से 4 साल में तैयार होगा घना जंगल

आईडीए ने पौधों की खरीद, रोपण और पांच वर्षों तक उनकी देखभाल के लिए ठेकेदारों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। परियोजना के तहत 2 से 3 स्थानों पर मियावाकी तकनीक अपनाई जाएगी। इस तकनीक से महज 3 से 4 वर्षों में घना जंगल तैयार हो सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह सिटी फॉरेस्ट शहर के बीच एक बड़े ‘ऑक्सीजन हब’ के रूप में विकसित होगा और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा।

नागरिकों के लिए बनेंगे वॉकिंग ट्रैक और ओपन जिम

आईडीए ने अपने पुराने प्लान में बदलाव किया है। अब केवल घना जंगल ही नहीं, बल्कि आसपास की कॉलोनियों के लोगों के लिए आधुनिक गार्डन भी विकसित किया जाएगा। यहां वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम और बच्चों के लिए झूले लगाए जाएंगे, ताकि लोग प्रकृति के बीच समय बिता सकें। भविष्य में इस क्षेत्र को ईको-टूरिज्म और नेचर ट्रेल के रूप में भी विकसित करने की योजना है।

बड़े पौधे लगाए जाएंगे, बढ़ेगी जीवित रहने की संभावना

पौधों के बेहतर विकास और अधिक जीवित रहने की संभावना को देखते हुए इस बार वन विभाग या नगर निगम की छोटी पौध के बजाय निजी नर्सरी से 6 से 7 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे। सिटी फॉरेस्ट में नीम, पीपल, बरगद, जामुन और आम सहित 20 से अधिक पारंपरिक प्रजातियों के करीब 2.5 लाख पौधे रोपे जाएंगे।

विलुप्त होती प्रजातियों का भी होगा संरक्षण

परियोजना के एक विशेष हिस्से में उन दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण किया जाएगा, जो धीरे-धीरे जंगलों से समाप्त होती जा रही हैं। इनमें मांडू की इमली (बाओबाब), सलई, बिल्वपत्र और काला तेंदू जैसे पेड़ शामिल हैं। इससे शहर को हरियाली के साथ जैव विविधता संरक्षण का भी लाभ मिलेगा।

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