नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पश्चिम व दक्षिण-पश्चिम दिशा से हवा चली। दिन में बादल छाए रहे। तापमान बढ़ने से उमस से लोग परेशान हुए। अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा की रफ़्तार 25 किमी रही। अब तक एरोड्रम मौसम केंद्र पर 329 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिन मौसम ऐसा ही बना रहेगा।
खरीफ सीजन 2026 में इंदौर जिले में समय पर हुई हल्की बारिश और अनुकूल मौसम के कारण साेयाबीन की बोवनी पिछले वर्ष की तुलना में 8.35 प्रतिशत बढी़ है। कृषि विभाग के आंकडों के अनुसार 2.33 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी हुई है, जबकि वर्ष 2025 में यह रकबा 2.14 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार 19528 हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश होने के बाद मौसम साफ रहने से खेतों में समय पर बोवनी का कार्य पूरा हो सका। पिछले वर्ष लगातार तेज बारिश के कारण कई क्षेत्रों में सोयाबीन की बोवनी प्रभावित हुई थी, जिससे किसानों ने दूसरी फसलों का विकल्प चुना था। इस बार मौसम अनुकूल रहने से किसान फिर सोयाबीन की ओर लौटे हैं।
खरीफ बोवनी का रकबा भी पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है
जिले में कुल खरीफ बोवनी का रकबा भी पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है। इस वर्ष अब तक दो लाख 52 हजार 585 हेक्टेयर में बोवनी हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह दो लाख 52 हजार 429 हेक्टेयर थी। हालांकि कुल रकबे में बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन फसलों के चयन में परिवर्तन हुआ है।सोयाबीन के साथ ही इस बार बाजरे का रकबा भी बढ़ा है। पिछले वर्ष केवल 4 हेक्टेयर में बोया गया बाजरा इस बार बढ़कर 52 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कुछ किसानों ने बाजरे जैसी कम पानी वाली फसलों को भी प्राथमिकता दी है।उप संचालक कृषि सीएल केवड़ा का कहना है कि जिले में लक्ष्य के अनुसार खरीफ फसलों की बोवनी पूरी हो चुकी है।शुरुआत में बारिश होने के बाद मौसम साफ रहने से जिले में बोवनी समय पर हुई।सोयाबीन का रकबा इस बार बड़ा है।
मक्का, मूंग और उड़द का रकबा घटा
सोयाबीन के बढ़ते रकबे के साथ मक्का, उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली और उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र घटा है। मक्का का रकबा घटकर 9,485 हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 12,210 हेक्टेयर था। उड़द की बोवनी 1,105 हेक्टेयर से घटकर केवल 62 हेक्टेयर, मूंग 1,350 हेक्टेयर से घटकर 102 हेक्टेयर और अरहर 2,810 हेक्टेयर से घटकर 360 हेक्टेयर रह गई। मूंगफली का रकबा भी 219 हेक्टेयर पर सिमट गया है, जबकि उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र 19,800 हेक्टेयर से घटकर 8,635 हेक्टेयर रह गया।
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