‘1993 मुंबई धमाके रोक सकते थे संजय दत्त..’ उज्जवल निकम फिर खोले बंद पन्ने, कह डाली ये बात?
Sanjay Dutt 1993 Blast: संजय दत्त का जीवन कितना उलझा हुआ रहा है ये बात किसी से छिपी नहीं है। स्टारडम के साथ साथ पुलिस केस और जेल काटने के अलावा कई मामलों में उनका नाम शामिल रहा है।
मुंबई में 1993 में उनका नाम बम धमाकों में आया था और इसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई थी। लेकिन अब राज्यसभा सांसद और एडवोकेट उज्जवल निकम का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने खुलकर संजय दत्त पर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि संजय दत्त अगर चाहते तो 1993 में हुए बम धमाकों को रोक सकते थे। इस दौरान उज्जवल निकम ‘द लल्लनटॉप’ से बात कर रहे थे।
उज्जवल निकम का दावा..
उज्जवल निकम ने अभिनेता को लेकर कई तरह के राज खोले हैं। उनका कहना है कि, जब संजय दत्त कविक्शन के समय मेरे पास आए थे तो वो बुरी तरह से कांप रहे थे। मुझसे बोले कि, सर मैने कुछ नहीं किया है। इस दौरान मैने उनसे कहा कि, संजू मीडिया देख रही है। अबु सलेम एक ट्रक भरकर हथियार लाया था और संजय दत्त का दोश सिर्फ इतना था उनको हथियारों का शौक था और बॉलीवुड पर पूरी तरह से उस वक्त दुबई का कंट्रोल था। उज्जवल निकम का ये बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। उनका कहना है कि, संजय दत्त चाहते तो वो ब्लास्ट रुक सकते थे क्योंकि वो पुलिस को हथियारों की जानकारी दे सकते थे। संजय दत्त अब जेल काट चुके हैं और उनके ऊपर अब किसी तरह का कोई केस नहीं है। संजू अक्सर जेल को लेकर बात करते हैं जो कि काफी डरावना अनुभव रहा है।
संजय दत्त पर बनी फिल्म
संजय दत्त के जीवन पर एक फिल्म बनी थी जिसका नाम संजू था। रणबीर कपूर ने संजय दत्त का धमाकेदार किरदार निभाया था। इस फिल्म संजय दत्त के जीवन के तमाम किस्सों पर नजर डाली गई है। कई सीन भी दिखाए गए हैं जो कि उनके केस से जुड़े थे। फिलहाल संजय दत्त काम कर रहे हैं और परिवार के साथ काफी खुश हैं।
Sanjay Dutt 1993 Blast: संजय दत्त का जीवन कितना उलझा हुआ रहा है ये बात किसी से छिपी नहीं है। स्टारडम के साथ साथ पुलिस केस और जेल काटने के अलावा कई मामलों में उनका नाम शामिल रहा है।
मुंबई में 1993 में उनका नाम बम धमाकों में आया था और इसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई थी। लेकिन अब राज्यसभा सांसद और एडवोकेट उज्जवल निकम का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने खुलकर संजय दत्त पर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि संजय दत्त अगर चाहते तो 1993 में हुए बम धमाकों को रोक सकते थे। इस दौरान उज्जवल निकम ‘द लल्लनटॉप’ से बात कर रहे थे।
उज्जवल निकम का दावा..
उज्जवल निकम ने अभिनेता को लेकर कई तरह के राज खोले हैं। उनका कहना है कि, जब संजय दत्त कविक्शन के समय मेरे पास आए थे तो वो बुरी तरह से कांप रहे थे। मुझसे बोले कि, सर मैने कुछ नहीं किया है। इस दौरान मैने उनसे कहा कि, संजू मीडिया देख रही है। अबु सलेम एक ट्रक भरकर हथियार लाया था और संजय दत्त का दोश सिर्फ इतना था उनको हथियारों का शौक था और बॉलीवुड पर पूरी तरह से उस वक्त दुबई का कंट्रोल था। उज्जवल निकम का ये बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। उनका कहना है कि, संजय दत्त चाहते तो वो ब्लास्ट रुक सकते थे क्योंकि वो पुलिस को हथियारों की जानकारी दे सकते थे। संजय दत्त अब जेल काट चुके हैं और उनके ऊपर अब किसी तरह का कोई केस नहीं है। संजू अक्सर जेल को लेकर बात करते हैं जो कि काफी डरावना अनुभव रहा है।
संजय दत्त पर बनी फिल्म
संजय दत्त के जीवन पर एक फिल्म बनी थी जिसका नाम संजू था। रणबीर कपूर ने संजय दत्त का धमाकेदार किरदार निभाया था। इस फिल्म संजय दत्त के जीवन के तमाम किस्सों पर नजर डाली गई है। कई सीन भी दिखाए गए हैं जो कि उनके केस से जुड़े थे। फिलहाल संजय दत्त काम कर रहे हैं और परिवार के साथ काफी खुश हैं।
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम">
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
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लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्मू कश्मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप
बादल फटने से भारी तबाही
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
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शिल्पा शिंदे और श्रेया कालरा हाल ही में शिवांगी जोशी की मिमिक्री करती दिखाई दीं। इस दौरान शिल्पा शिंदे आउट ऑफ कंट्रोल ही हो गईं। वीडियो में शिल्पा, शिवांगी के बोलने के अंदाज की मिमिक्री करते हुए कहती है, ‘अरे यार, मेरे पास तो कोई सीक्रेट ही नहीं है। कितना एक्ट करूं? मैं बहुत इनोसेंट हूं। मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं वर्जिन हूं। मैं शादी के बाद ही करूंगी।’
शिल्पा के मिमिक्री अंदाज पर श्रेया भी हंसने लगती हैं, और फिर वह अभिनेता हर्षद चोपड़ा की मिमिक्री करते हुए कहती हैं, “शिवांगी, तुम क्या सोच रही हो?” इसके बाद वह खुद ही शिवांगी के अंदाज में जवाब देती हैं, “पता नहीं, लेकिन जब ये सीक्रेट रिवील होगा ना, तब मैं बहुत हंसूंगी, क्योंकि इसमें था ही कुछ नहीं।”
यह पहली बार नहीं है जब शिल्पा शिंदे का व्यवहार शिवांगी जोशी को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी एक एपिसोड में शिल्पा ने कंट्रोलर के रूप में शिवांगी को हर्षद चोपड़ा से कम बात करने का ऑर्डर दिया था। उस समय भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शिल्पा के रवैये को गलत बताया था।
शिल्पा शिंदे और श्रेया कालरा हाल ही में शिवांगी जोशी की मिमिक्री करती दिखाई दीं। इस दौरान शिल्पा शिंदे आउट ऑफ कंट्रोल ही हो गईं। वीडियो में शिल्पा, शिवांगी के बोलने के अंदाज की मिमिक्री करते हुए कहती है, ‘अरे यार, मेरे पास तो कोई सीक्रेट ही नहीं है। कितना एक्ट करूं? मैं बहुत इनोसेंट हूं। मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं वर्जिन हूं। मैं शादी के बाद ही करूंगी।’
शिल्पा के मिमिक्री अंदाज पर श्रेया भी हंसने लगती हैं, और फिर वह अभिनेता हर्षद चोपड़ा की मिमिक्री करते हुए कहती हैं, “शिवांगी, तुम क्या सोच रही हो?” इसके बाद वह खुद ही शिवांगी के अंदाज में जवाब देती हैं, “पता नहीं, लेकिन जब ये सीक्रेट रिवील होगा ना, तब मैं बहुत हंसूंगी, क्योंकि इसमें था ही कुछ नहीं।”
यह पहली बार नहीं है जब शिल्पा शिंदे का व्यवहार शिवांगी जोशी को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी एक एपिसोड में शिल्पा ने कंट्रोलर के रूप में शिवांगी को हर्षद चोपड़ा से कम बात करने का ऑर्डर दिया था। उस समय भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शिल्पा के रवैये को गलत बताया था।
">‘मैं तो वर्जिन हूं मैं शादी के बाद ही करूंगी’ शिल्पा शिंदे ने उछाला शिवांगी जोशी की वर्जिनी का मामला
Shilpa Shinde Virginity Comment On Shivangi Joshi: रियलिटी शो लॉक अप सीजन 2 हर गुजरते दिन के नए विवाद खड़े कर रहा है। शो में शिल्पा शिंदे के एंटर होने के बाद से लड़ाई-झड़गे कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं। अब शिल्पा शिंदे ने शिवांगी जोशी के ऊपर एक ऐसा आपत्तिजनक कमेंट कर दिया है कि जिससे सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
शिल्पा शिंदे और श्रेया कालरा हाल ही में शिवांगी जोशी की मिमिक्री करती दिखाई दीं। इस दौरान शिल्पा शिंदे आउट ऑफ कंट्रोल ही हो गईं। वीडियो में शिल्पा, शिवांगी के बोलने के अंदाज की मिमिक्री करते हुए कहती है, ‘अरे यार, मेरे पास तो कोई सीक्रेट ही नहीं है। कितना एक्ट करूं? मैं बहुत इनोसेंट हूं। मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं वर्जिन हूं। मैं शादी के बाद ही करूंगी।’
शिल्पा के मिमिक्री अंदाज पर श्रेया भी हंसने लगती हैं, और फिर वह अभिनेता हर्षद चोपड़ा की मिमिक्री करते हुए कहती हैं, “शिवांगी, तुम क्या सोच रही हो?” इसके बाद वह खुद ही शिवांगी के अंदाज में जवाब देती हैं, “पता नहीं, लेकिन जब ये सीक्रेट रिवील होगा ना, तब मैं बहुत हंसूंगी, क्योंकि इसमें था ही कुछ नहीं।”
यह पहली बार नहीं है जब शिल्पा शिंदे का व्यवहार शिवांगी जोशी को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी एक एपिसोड में शिल्पा ने कंट्रोलर के रूप में शिवांगी को हर्षद चोपड़ा से कम बात करने का ऑर्डर दिया था। उस समय भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शिल्पा के रवैये को गलत बताया था।
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