नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुआ है। शहर में नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बदलाव में महिलाओं की भूमिका भी पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। तकनीक, हेल्थकेयर, शिक्षा, फूड, एग्रीटेक और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में महिलाएं अपने स्टार्टअप शुरू कर रही हैं।
शहर की आर्थिकी में योगदान दे रहे कुल स्टार्टअप में से करीब 20 प्रतिशत स्टार्टअप की फाउंडर और को-फाउंडर महिलाआएं हैं। इसका मुख्य कारण आइडिया को कमर्शियल प्रोडक्टर में बदल पाना है। पहले जहां आइडिया सिर्फ लैब और प्रोजेक्ट तक सीमित रह जाते हैं। वहीं, महिलाएं अपनी स्किल निखारकर इन्हें स्टार्टअप में परिवर्तित कर रही है। खास बात यह है कि महिलाएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थ टेक, फिनटेक, सस्टेनेबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप में भी कार्य कर रही है।
पांच साल में लगातार बढ़ी महिला भागीदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी योजनाओं, इनक्यूबेशन सेंटरों, मेंटरशिप और निवेशकों की बढ़ती रुचि का सीधा लाभ महिलाओं को मिला है। इसी वजह से हर साल महिला संस्थापकों की संख्या बढ़ रही है। पहले जहां कई महिलाएं नौकरी को प्राथमिकता देती थीं, वहीं अब बड़ी संख्या में अपना व्यवसाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वर्तमान में इंदौर में 1300 से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं, इसमें करीब 20 प्रतिशत स्टार्टअप की फाउंडर महिलाएं हैं। इनमें कुछ स्टार्टअप ऐसे हैं, जिनमें महिलाएं को-फाउंडर के रूप में जुड़ी हुई है। जबिक, कोरोना काल के दौरान यह आंकड़ा 10 प्रतिशत के आस-पास ही था।
इसलिए बढ़ रही संख्या
आइटी एक्सपर्ट सोनाली अग्रवाल के अनुसार, कालेज स्तर पर स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा मिलने से छात्राओं में उद्यमिता के प्रति रुचि बढ़ी है। हैकाथान, स्टार्टअप प्रतियोगिताएं, बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं और मेंटरशिप कार्यक्रमों में भी लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही आइआइटी इंदौर, दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन, डीएवीवी इनक्यूबेशन सेंटर और एसजीएसआइटीएस इनक्यूबेशन फोरम सहित अन्य इनक्यूबेशन सेंटर रिसर्च आधारित स्टार्टअप को तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप और उद्योग से जोड़ने में मदद कर रहे हैं। इससे महिलाओं को अपने आइडिया को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
रिसर्च में बढ़ा योगदान
आईटी एक्सपर्ट वैशाली सोनी के अनुसार, पहले रिसर्च का काम अक्सर लैब तक सीमित रह जाता था। अब कई छात्राएं अपने रिसर्च को कमर्शियल प्रोडक्ट और व्यवसाय में बदलने की दिशा में काम कर रही हैं। मेडिकल, इंजीनियरिंग और साइंस से जुड़े कई नए आइडिया स्टार्टअप के रूप में विकसित हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
ये चुनौतियां अब भी
विशेषज्ञ दिव्या माथुर के अनुसार, भले ही स्टार्टअप के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ी हो, लेकिन चुनौतियां अब भी खत्म नहीं हुई है। सबसे बड़ी चुनौती शुरुआती स्तर पर फंडिंग की है। मजबूत बिजनेस माडल और बेहतर प्रस्तुति की कमजोरी के कारण महिलाओं को फंडिंग नहीं मिल पाती।
इस दिशा में कर रहीं कार्य
- हेल्थ टेक और मेडिकल इनोवेशन
- एजुकेशन टेक्नोलॉजी
- फूड प्रोसेसिंग और क्लाउड किचन
- ई-कॉमर्स
- एग्रीटेक
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान
- पर्यावरण और वेस्ट मैनेजमेंट
इस दिशा में कार्य कर रहीं महिलाएं
- डॉ. पेजा दुबे लैब में मशरूम के बीच तैयार कर रही है। इन बीजों और पराली का उपयोग कर किसान मशरूम की खेती कर सकते हैं। पूजा ने इसके लिए किसानों को ट्रेंनिंग भी है। इससे पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों के लिए भी आय के नए रास्ते सृजित हुए हैं।
- डीएवीवी की विद्यार्थियों ने प्रो. शिवांगी बांडे के नेतृत्व में एग्जास्केलेटान आर्म तैयार किया है। इसमें पुरवांशि गर्ग सहित अन्य विद्यार्थी शामिल है। इसका उपयोग प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्य के लिए किया जा सकता है। यह भारी वजन को उठाने में सक्षम है।
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