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हांगकांग पर बदले अमेरिका के सुर: चीन का बड़ा दावा, क्या अब खत्म होगी कारोबारी तनातनी और मिलेगी राहत?

हांगकांग पर बदले अमेरिका के सुर: चीन का बड़ा दावा, क्या अब खत्म होगी कारोबारी तनातनी और मिलेगी राहत?

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक तनातनी अब कम होती नजर आ रही है। मैड्रिड में हुई आर्थिक वार्ता के बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने दावा किया है कि अमेरिका उस पुराने कार्यकारी आदेश को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसके तहत हांगकांग का विशेष व्यापारिक दर्जा खत्म किया गया था। इस फैसले को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात का असर दिखने लगा?

दो महीने पहले बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। हाल ही में चीन ने एक प्रमुख चर्च पादरी को भी रिहा किया था। अब माना जा रहा है कि साल के अंत में प्रस्तावित शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के संबंध और बेहतर हो सकते हैं।

इस फैसले की पांच बड़ी बातें

ट्रंप का पुराना आदेश खत्म

जुलाई 2020 में हांगकांग का विशेष व्यापारिक दर्जा समाप्त करने वाला कार्यकारी आदेश लागू किया गया था। इसे 2025 में एक साल के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

प्रतिबंधों में बदलाव

अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े कुछ प्रावधानों की अवधि समाप्त होने की जानकारी दी है।

नेताओं की सूची में बदलाव

हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली और पूर्व नेता कैरी लैम को पहली प्रतिबंध सूची से हटाकर दूसरे कानूनी प्रावधान के तहत अलग सूची में शामिल किया गया है।

चीन ने फैसले का किया स्वागत

बीजिंग ने इसे अमेरिका-चीन आर्थिक वार्ता में बनी सहमति को लागू करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।

हांगकांग सरकार की प्रतिक्रिया

हांगकांग प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका भविष्य में चीन की संप्रभुता और ‘एक देश, दो प्रणाली’ नीति का सम्मान करेगा।

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क्या हांगकांग में कमजोर पड़ गया है लोकतंत्र?

चीन का कहना है कि 2019 के बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 2020 का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून शांति बहाल करने के लिए जरूरी था। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों का आरोप है कि इस कानून के लागू होने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार काफी सीमित हो गए हैं। लोकतंत्र समर्थक कई प्रमुख नेताओं, जिनमें मीडिया कारोबारी जिमी लाई भी शामिल हैं, अब भी जेल में हैं। इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस ने फिलहाल कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है।

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