डेनमार्क में तैयार डायबिटिज के नियंत्रण के लिए सप्ताह में एक बार लगाए जाने वाला इंसुलिन ‘अवीकली‘ इंदौर में आ गया है। अब इंदौर के डायबिटिज के मरीजों ने…और पढ़ें
HighLights
- डायबिटिज के नियंत्रण के लिए सप्ताह में एक बार लगाए जाने वाला इंसुलिन ‘अवीकली‘ इंदौर में आ गया है
- अब इंदौर के डायबिटिज के मरीजों ने पेन वाले इस इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है
- इस इंसुलिन के उपयोग के लिए चिकित्सकों के साथ डायबिटिज के मरीजों में भी जागरूकता दिख रही है
उदयप्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर। डेनमार्क में तैयार डायबिटिज के नियंत्रण के लिए सप्ताह में एक बार लगाए जाने वाला इंसुलिन ‘अवीकली‘ इंदौर में आ गया है। अब इंदौर के डायबिटिज के मरीजों ने पेन वाले इस इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है। इस इंसुलिन के उपयोग के लिए चिकित्सकों के साथ डायबिटिज के मरीजों में भी जागरूकता दिख रही है।
इस इंसुलिन के आने से मरीजों को रोज-रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने से से राहत मिलेगी और कई मरीजों ने अब इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है। कंपनी के इंदौर डिपो पर गुरुवार को 500 अ‘वीकली‘ इंसुलिन के पेन पहुंचे है। यहां से भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों को भी ये इंसुलिन भेजी गई।
इंदौर में दवा बाजार के डिस्ट्रीब्युटर के पास पहुंचने के साथ ये इंसुलिन शुक्रवार से इंदौर के डायबिटिज के मरीजों के हाथों में भी पहुंची और मरीजों ने इसका उपयोग करना भी शुरु किया। जानकारों के मुताबिक शुरुआत में कम संख्या में डायबीटिज के मरीज इसका इस्तेमाल कर रहे है। अगले एक से दो माह में इसका उपयोग करने वालों की संख्या बढ़ेगी।
शरीर में निकलती है दो तरह की इंसुलिन
हमारे शरीर बीटा कोशिकाएं दो तरह से इंसुलिन निकाली है। जब-जब हम भोजन करते उसके साथ इंसुलिन बनता है। वही दूसरी 24 घंटे शरीर में इंसुलिन निकलती है। जिसे बैसल इंसुलिन कहा जाता है। किसी डायबिटिज के मरीजाें को उपचार के लिए बैैसल इंसुलिन देते है। इस इंसुलिन से मरीज की शुगर नियंत्रित होती है। वर्तमान में उपलब्ध इंसुलिन रोज लगाई जाती है।
इंसुलिन लगाने से ये है बड़ा बदलाव
वर्तमान में दवा बाजार व फार्मा दुकानों पर मिलने वाले इंसुलिन 24 से 36 घंटे के लिए कारगर है। अब डायबिटिज के मरीजों को सप्ताह में सिर्फ एक बार ही अवीकली इंसुलिन लगाना होगी।
अवीकली इंसुलिन का इस तरह होगा डोज
-इसके पेन में 10 के अनुपात में इंसुलिन का डोज लेने की सुविधा है। यानि 10 या 20 या 30 का डोज लगा सकेगे।
डायबिटिज मरीजों के लिए वर्तमान में दवा बाजार में उपलब्ध इंसुलिन के प्रकार
- वायल : इसे सुई व पेन से लगाते हैं।
- पेन वाले कॉट्रेज : इसे शरीर में सुई के माध्यम से लगाते हैं।
- इनहेल्ड इंसुलिन : जिस तरह अस्थमा के मरीज का इनहेलर होता है, उसी तरह भोजन के समय के उपयोग होता है।
- इंसुलिन पंप : यह पेट पर त्वचा की लेयर के नीचे लगता है। पेजरनुमा यह इंसुलिन यह एआई के माध्यम से 24 घंटे में शरीर अंदर शुगर की मात्रा को भांपकर डोज छोड़ सकता है। इसकी कार्टेज शरीर के ऊपर लगती है जो आसानी से बदली सकती है।
मौजूदा इंसुलिन निर्धारित समय के लिए रहते हैं प्रभावित
- अल्टा शार्ट एक्टिंग : छह घंटे
- इंटरमीडिएट : 12 से 16 घंटे
- लांग एक्टिंग : 24 घंटे
- अल्टा लांग एक्टिंग : 24 से 36 घंटे
दो प्रकार है इंसुलिन के
- बैसल इंसुलिन : इसके उपयोग से 24 घंटे में एक बार किया जाता है। इससे एक लेवल पर इंसुलिन बनता रहता है।
रेगुलर इंसुलिन
- शार्ट एक्टिंग : भोजन के आधे धंटे पहले लगाते है।
- रैपिड एक्टिंग : भोजन के 15 से 20 मिनट पहले लगाते है।
- अल्ट्रा रैपिड: भोजन के पांच से सात मिनट पहले लगाते है।
विशेषज्ञ की सलाह
सप्ताह में एक बार लगाए जाने वाले इंसुलिन का प्रयोग करने के दौरान मरीज को शुगर मॉनीटरिंग की फ्रिक्वेंसी को बढ़ाना चाहिए। जो मरीज दिन में दो बार शुगर की जांच करते है। इंसुलिन के बदलने के दौरान यदि किसी मरीज को हाइपोग्लासीमिया यानि शुगर कम होने की शिकायत हो तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करे। ऐसे मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना होगा। – डा. अजय गुप्ता, एंडाेक्राइनोलॉजिस्ट
रोज इंसुलिन को आइसपैक में रखने की समस्या निजात मिलेगी
अभी डायबिटिज मरीजों को साल में मरीज को 365 इंसुलिन के इंजेक्शन लगाना पड़ते हैं। अब साल में 365 के बजाए 52 इंसुलिन इंजेक्शन से काम हो जाएगा। इस तरह रोज इंसुलिन को आइसपैक में रखने की समस्या निजात मिलेगी। यदि सप्ताह में एक बार लगा ली तो उसके छूटने का डर नहीं रहेगा। इसके रिजल्ट उनते ही प्रभावी हैं जो अभी बाजार में मौजूदा इंसुलिन है। जिस तरह अभी मौजूद इंसुलिन के उपयोग के दौरा शुगर कम होने हाइपोग्लाइसीमिया होने व वजन बढ़ने की संभावना होती है। उसी तरह इस इस इंसुलिन के उपयोग पर प्रभाव पड़ने की संभावना होगी। यदि आपने इंसुलिन तो लगाया लेकिन निर्धारित समय पर भोजन नहीं किया तो भी यह कारगर नहीं होगी। ऐसे में चिकित्सक के परामर्श से इस इंसुलिन का डोज मरीज लगाएं। -डा. संदीप जुल्का, एंडोक्राइनोलाजिस्ट
दो से आठ डिग्री के तापमान पर फ्रिज में रखना होगा
इस इंसुलिन को दो से आठ डिग्री के तापमान पर फ्रिज में रखना होगा। जिस तरह अन्य किसी इंसुलनि को फ्रीजर में नहीं रख सकते। उस तरह इसे भी फ्रीजर में नहीं रखें। इसे रूम के सामान्य तापमान पर भी नहीं रखना चाहिए। इससे दवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। एक बार इंसुलिन को खोलने के बाद तीन माह में अंदर इसका उपयोग कर सकते हैं। -डॉ. मकरंद शर्मा, सचिव,आल इंडिया वैक्सीन डीलर एसोसिएशन
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