सिनेजीवन: कमल हासन बोले- बच्चों को जवाब की जगह मिल रही हैं लाठियां और थलपति विजय की आखिरी फिल्म पर इमोशनल हुए अरुण विजयबॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट देश में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अपनी आवाज उठाई है। वहीं अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों की परेशानियों को समय रहते सुना जाना चाहिए था।
आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नोट साझा करते हुए लिखा, ”पिछले कुछ दिनों ने मेरा दिल कई बार तोड़ा और फिर उम्मीद के साथ उसे जोड़ा। हर उस छात्र के पीछे एक सपना, परिवार की उम्मीद, वर्षों की मेहनत और त्याग की कहानी छिपी होती है। छात्र सिर्फ अपने लिए आवाज नहीं उठा रहे हैं, बल्कि वे उन लोगों की उम्मीदों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया है। छात्रों का साहस समाज के सामने यह सवाल रखता है कि क्या हम वास्तव में उन लोगों की बात सुन रहे हैं, जो देश का भविष्य संभालने वाले हैं।”
वहीं, अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाए। कमल हासन ने कहा कि जब बच्चों की परेशानियों को समय रहते नहीं सुना जाता, तो हालात गंभीर हो जाते हैं।
उन्होंने लिखा, ”हमें तब सुनना चाहिए था, जब एक बच्चा रोया था लेकिन हमने तब तक इंतजार किया, जब तक बहुत सारे बच्चों की आवाज खामोश नहीं हो गई।”
कमल हासन ने शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”ऐसी व्यवस्था, जहां पढ़ाई और सीखने की जगह सिर्फ कोचिंग का दबाव बढ़ जाए, जहां जिज्ञासा की जगह डर पैदा हो और जहां योग्यता की जगह गलत तरीके आगे आने लगें, वह व्यवस्था कमजोर हो जाती है। जब बच्चों को जवाब देने की जगह बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं तो यह देश की विफलता है।”
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बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट देश में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अपनी आवाज उठाई है। वहीं अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों की परेशानियों को समय रहते सुना जाना चाहिए था।
आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नोट साझा करते हुए लिखा, ”पिछले कुछ दिनों ने मेरा दिल कई बार तोड़ा और फिर उम्मीद के साथ उसे जोड़ा। हर उस छात्र के पीछे एक सपना, परिवार की उम्मीद, वर्षों की मेहनत और त्याग की कहानी छिपी होती है। छात्र सिर्फ अपने लिए आवाज नहीं उठा रहे हैं, बल्कि वे उन लोगों की उम्मीदों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया है। छात्रों का साहस समाज के सामने यह सवाल रखता है कि क्या हम वास्तव में उन लोगों की बात सुन रहे हैं, जो देश का भविष्य संभालने वाले हैं।”
वहीं, अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाए। कमल हासन ने कहा कि जब बच्चों की परेशानियों को समय रहते नहीं सुना जाता, तो हालात गंभीर हो जाते हैं।
उन्होंने लिखा, ”हमें तब सुनना चाहिए था, जब एक बच्चा रोया था लेकिन हमने तब तक इंतजार किया, जब तक बहुत सारे बच्चों की आवाज खामोश नहीं हो गई।”
कमल हासन ने शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”ऐसी व्यवस्था, जहां पढ़ाई और सीखने की जगह सिर्फ कोचिंग का दबाव बढ़ जाए, जहां जिज्ञासा की जगह डर पैदा हो और जहां योग्यता की जगह गलत तरीके आगे आने लगें, वह व्यवस्था कमजोर हो जाती है। जब बच्चों को जवाब देने की जगह बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं तो यह देश की विफलता है।”

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