कोई व्यक्ति इंदौर का रहने वाला हो और गुजरात के एक अंजान राजनीतिक दल को आर्थिक मदद दे ये हैरान करने वाला है। इस टिप्पणी के साथ राष्ट्रीय समाजवादी पार्ट…और पढ़ें
HighLights
- इंदौर निवासी का गुजरात की पार्टी को चंदा देना संदेहास्पद, अपनी तरह का पहला निर्णय
- एक बैंक अधिकारी ने इस राजनीतिक दल को चंदा दिखाकर अपने आयकर रिटर्न में छूट हासिल की
- विभाग में इस राजनीतिक दल को सिर्फ चंदे का हेर-फेर करने के लिए बनाई गई पार्टी माना था
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर : कोई व्यक्ति इंदौर का रहने वाला हो और गुजरात के एक अंजान राजनीतिक दल को आर्थिक मदद दे ये हैरान करने वाला है। इस टिप्पणी के साथ राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (सेक्युलर) को दिए चंदे को आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल इंदौर ने बोगस करार दिया।
एक बैंक अधिकारी ने इस राजनीतिक दल को चंदा दिखाकर अपने आयकर रिटर्न में छूट हासिल की। विभाग में इस राजनीतिक दल को सिर्फ चंदे का हेर-फेर करने के लिए बनाई गई पार्टी माना था। इसी आधार पर करदाता द्वारा बीते वर्षों में ली गई छूट खारिज कर टैक्स-पेनाल्टी की मांग निकाल दी।करदाता इसके खिलाफ आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल पहुंचा था।
करदाता धीरज वैद्य की अपील पर आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल की डबल बेंच ने निर्णय सुनाया है।इन्होंने असेसमेंट ईयर 2019-20 में 5 लाख रुपये राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (सेक्युलर) को चंदा दिए जाने की रसीद लगाकर आयकर की धारा 80जीजीसी में दानराशि पर टैक्स छूट हासिल की थी। चंदे की राशि हटाकर अपनी आय 75 लाख 86 हजार रुपये दर्शाई थी।
पहले आयकर के असेसमेंट अधिकारी और फिर डिप्टी कमिश्नर आयकर ने इस छूट को खारिज कर दिया था। करदाता की असल आय 80 लाख 86 हजार रुपये से ज्यादा मानते हुए टैक्स-पेनाल्टी व ब्याज चुकाने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद करदाता ट्रिब्यूनल पहुंचा और अपील दाखिल की। चंदे की रसीद पेश करते हुए कहा कि रजिस्टर्ड राजनीतिक दल को दिए चंदे पर नियमानुसार आयकर छूट मिलना चाहिए।
छापे में पता चले फर्जी दल
इस पर आयकर ने ट्रिब्यूनल में दलील दी कि अहमदाबाद में सितंबर 2022 में आयकर ने एक समूह पर छापा मारा था। इसमें 23 ऐसे राजनीतिक दलों का पता चला था जो सिर्फ चंदे का हेरफेर करने के लिए बनाए गए थे। इनमें राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (सेक्युलर) का नाम भी शामिल है।
आयकर ने इस बारे में रसीद-कागज और वाट्सएप चैट भी बरामद किए थे। ये दल 1.5 से 5 प्रतिशत कमीशन लेकर चंदे की रसीद देते थे और बाकी पैसा नकद में लौटा देते थे। आयकर ने कहा कि आगे की पूछताछ में इस दल की अध्यक्ष संध्यासिंह और उनके पति बिश्वजीतसिंह के बयान भी हुए थे।
सिंह ने माना था कि एक सीए रितेश सिंह के साथ वो चंदे की रसीद और कमीशन का रैकेट चला रहे थे। इस पार्टी ने नियमानुसार चुनाव आयोग में भी त्रेमासिक रिटर्न दाखिल नहीं किया था। दलील से सहमत होते ट्रिब्यूनल ने मुंबई में आए ऐसे एक ओर निर्णय का संदर्भ भी दिया और करदाता की अपील खारिज कर आयकर की अतिरिक्त कर की मांग पर मुहर लगा दी।
शुरू हुई बहस
इंदौर ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए निर्णय के बाद बहस भी शुरू हो गई है। दरअसल इंदौर क्षेत्र में राजनीतिक चंदे पर दिए नोटिस और छूट समाप्त करने के 10 हजार से ज्यादा प्रकरण लंबित है। ट्रिब्यूनल की टिप्पणी पर कर विशेषज्ञ सहमति नहीं है क्योंकि आयकर एक्ट में राजनीतिक चंदे को लेकर ऐसी कोई रोक नहीं है कि करदाता अपने क्षेत्र के दल को ही चंदा दे।
इसी तरह इससे पहले रायपुर और जयपुर के आयकर ट्रिब्यूनल ऐसे चंदे के मामले में करदाता से पक्ष में निर्णय सुना चुके हैं। साथ ही सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं कि इसी दल को दिए चंदे के मामले में ट्रिब्युनल की एकल पीठ ने राजकोट में पक्ष में निर्णय सुनाते हुए 90 प्रतिशत चंदे को वैध माना था। उस समय निर्णय सुनाने वाले ट्रिब्यूनल के सदस्य अब इंदौर में समान प्रकरण में उलट निर्णय दे रहे हैं।
कोर्ट में जा सकता है प्रकरण
आयकर एक्ट कहता है कि करदाता को चंदे से जुड़ी रसीद प्रस्तुत करना होगा और बैंकिंग चैनल से दान देना होगा। करदाता की यह जवाबदेही आयकर एक्ट में नहीं है कि वह सुनिश्चित करे कि राजनीतिक दल नियम कानून के अनुसार चल रहा है या नहीं। राजनीतिक दलों को चंदा देकर छूट लेने वालों में 90 प्रतिशत से ज्यादा वेतनभोगी है।आसार है कि ताजा निर्णय को भी कोर्ट में चुनौती मिलेगी। -मिलिंद वाधवानी, वाइस चेयरमैन, सीए ब्रांच इंदौर
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