×
Indore News: प्रदेश के पहले मेंटल हेल्थ सेंटर का काम अटका, 22 करोड़ का प्रोजेक्ट 4 साल में भी पूरा नहीं हो सका

Indore News: प्रदेश के पहले मेंटल हेल्थ सेंटर का काम अटका, 22 करोड़ का प्रोजेक्ट 4 साल में भी पूरा नहीं हो सका

मध्य प्रदेश का पहला सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में 22 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट 2 साल में पूरा होना था, लेकिन 4 साल का समय बीत जाने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। अंतिम चरण में पहुंचे इसके निर्माण कार्य पर रिवाइज्ड एस्टीमेट की स्वीकृति, लगभग 2 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट और फंड की कमी के कारण एक बार फिर ब्रेक लग चुका है। इससे पूर्व भी भुगतान और फंड की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट 3 बार ठप हो चुका है।

यह भी पढ़ें…

Indore: इंदौर-दाहोद रेलवे ट्रेक की सुरंग में यात्रियों को घुटन न हो, इसलिए लग रहे पंखे

टेंडर और कार्य में देरी 

इस प्रोजेक्ट के टेंडर पीडब्ल्यूडी की प्लानिंग इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) के माध्यम से जारी किए गए थे, जिसकी कुल लागत 22 करोड़ 23 लाख रुपए तय हुई थी। भोपाल की एक एजेंसी ने 23 प्रतिशत कम दर पर लगभग 17.5 करोड़ रुपए में इसका ठेका लिया था। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 24 महीने की समय-सीमा तय की गई थी, परंतु फंड जारी होने में लगातार हो रही देरी के कारण 48 महीने बीत जाने पर भी काम पूरा नहीं हो सका है। शुरुआत में बिजली की एलटी लाइन शिफ्ट करने में हुई देरी से 3-4 महीने काम रुका रहा। इसके उपरांत भुगतान में देरी के चलते 2 बार लंबे समय तक निर्माण बंद रहा, जिसके संबंध में पीआईयू अधिकारियों ने लगातार पत्राचार किया। एजेंसी को बकाया राशि का भुगतान होने के उपरांत कुछ महीने पहले ही कार्य पुनः प्रारंभ हुआ था।

अतिरिक्त फंड और रिवाइज्ड एस्टीमेट का पेच

अतिरिक्त निर्माण और अन्य कारणों से प्रोजेक्ट को पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 2 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट और रिवाइज्ड एस्टीमेट की मंजूरी के लिए पीआईयू द्वारा प्रस्ताव आगे भेजा गया है। इसकी स्वीकृति के इंतजार में पिछले 1 महीने से काम फिर से बंद पड़ा है। इसके अतिरिक्त, एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों का लगभग 1.5 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान भी अभी अटका हुआ है। इस विषय पर पीडब्ल्यूडी (पीआईयू) की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आरती यादव ने बताया कि प्रक्रिया जारी है, जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा। 

2016 में बनी थी योजना

इस प्रोजेक्ट के तहत 60-60 सीटर क्षमता वाले गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल की 3 मंजिला इमारतें तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा ओपीडी बिल्डिंग भी लगभग बन चुकी है, जबकि वार्ड बिल्डिंग और कैंटीन का सिविल वर्क करीब-करीब पूरा है। वर्तमान में केवल बाहरी व आंतरिक फिनिशिंग, रंगाई-पुताई और परिसर के अंदर एप्रोच रोड का काम शेष है। प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी 60:40 के अनुपात में है, जिसमें राज्य के 40 प्रतिशत हिस्से की राशि जारी होने में देरी हो रही है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार यह योजना 2016 में बनी थी, जिसकी प्रारंभिक स्वीकृति में भी काफी विलंब हुआ था।

हम कई पत्र लिख चुके

शासकीय मनोचिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. वीएस पाल के अनुसार, लंबे समय से निर्माण पूरा होने की प्रतीक्षा की जा रही है, परंतु काम अभी तक अधूरा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से निर्माण एजेंसी को लगातार कई पत्र लिखे जा चुके हैं, फिर भी कार्य बंद है। यदि भवन समय पर हैंडओवर हो जाए, तो उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिसके लिए बजट पहले से स्वीकृत है। इसके अलावा आवश्यक फैकल्टी और स्टाफ पदों की स्वीकृति भी मिल चुकी है।

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नया मील का पत्थर

यह परियोजना केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य योजना (एनएमएचपी) के अंतर्गत स्वीकृत की गई थी। इस सेंटर के बनने से नशा मुक्ति केंद्र के साथ-साथ मनोरोगों के उपचार हेतु विभिन्न विशिष्ट केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह संस्थान एक रिसर्च सेंटर के रूप में नए शोधों को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा, जो प्रदेश का अपनी तरह का पहला विशेषज्ञ स्तर का मानसिक स्वास्थ्य केंद्र साबित होगा।

Source link
#Indore #News #परदश #क #पहल #मटल #हलथ #सटर #क #कम #अटक #करड #क #परजकट #सल #म #भ #पर #नह #ह #सक

Previous post

दुर्घटना में एक आंख गंवाई, इंदौर जिला कोर्ट ने बीमा कंपनी को 14 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का दिया आदेश

Next post

एमपी: चुनावी हलफनामे में 100 करोड़ की संपत्ति छिपाने का आरोप, मंत्री गोविंद सिंह पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

Post Comment