गुमशुदा लोगों के मामले में नियमों में बदलाव किया गया है। अब हर वो गुम इंसान जो बालिग हो, पुरुष हो या महिला, उसे पुलिस अब अपहरण मानकर ही ट्रीट करेगी। स…और पढ़ें
HighLights
- अब तक पुलिस अधिकांश गुम इंसानों को खोई हुई वस्तु मानकर ट्रीट करती थी
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुमशुदगी को महज मिसिंग पर्सन रिपोर्ट (एमपीआर) तक सीमित रखने की परंपरा बदल गई है
- अब पुलिस को उसकी पूरी फाइल बनाकर चार्ज शीट तक पेश करना होगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गुमशुदा लोगों के मामले में नियमों में बदलाव किया गया है। अब हर वो गुम इंसान जो बालिग हो, पुरुष हो या महिला, उसे पुलिस अब अपहरण मानकर ही ट्रीट करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंदौर में भी गुमशुदगी के मामलों को महज मिसिंग पर्सन रिपोर्ट (एमपीआर) तक सीमित रखने की परंपरा बदल गई है। लोगों का कहना है, अभी तक पुलिस अधिकांश गुम इंसानों को खोई हुई वस्तु मानकर ट्रीट करती थी। अब पुलिस को उसकी पूरी फाइल बनाकर चार्ज शीट तक पेश करना होगी।
गुमशुदगी को लेकर पुलिस ने सोमवार रात आजाद नगर में एक, तेजाजी नगर में दो, मल्हारगंज में दो, राजेंद्र नगर में दो, विजय नगर, खजराना में, कनाड़िया, तिलक नगर, पलासिया में एक तथा जूनी इंदौर में एक मामला धारा 140(3) के तहत दर्ज किया। अभी तक नाबालिगों के लापता होने पर धारा 137(2) के तहत अपहरण का मामला दर्ज होता था। यह धारा तब लागू होती है, जब किसी बालिग या विधिक संरक्षक की अभिरक्षा में रहने वाले व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना ले जाया जाता है।
यह होगा नई व्यवस्था में
नई व्यवस्था में एफआईआर दर्ज होने से विवेचना की कानूनी जिम्मेदारी बढ़ेगी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने, सीसीटीवी फुटेज खंगालने, कॉल डिटेल निकालने और संदिग्धों से पूछताछ जैसी कार्रवाई शुरू से ही अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। साथ ही रजिस्टर्ड डेटा पुलिस के खोजबीन के प्रयासों को भी बताएंगे।
औपचारिकताएं निभाईं तो केस वैसे ही पड़े रहेंगे
जानकारों का कहना है, कानून में बदलाव अपने आप में बड़ा कदम है। लेकिन, इसमें सफलता तभी मिलेगी जब पुलिस एफआईआर को गंभीरता से लेगी। आदेश पालन के लिए एफआईआर दर्ज कर जांच पुराने ढर्रे पर ही चलती रही तो यह व्यवस्था भी औपचारिकता बन जाएगी।
गंभीरता से काम करना होगा
अभी तक पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर लोगों को घर भेज देती थी। अब केस रजिस्टर्ड होने के बाद गंभीरता से काम करना होगा। – महेंद्र मौर्य, एडवोकेट
पहले भी हम गंभीर ही थे
पहले भी हम गुम इंसानों की मिसिंग पर्सन रिपोर्ट तैयार करते थे। डायरी मेंटेन होती थी। लगातार वॉचिंग करते थे। आदेश के बाद हमने भी गुम इंसानों के केस दर्ज कर लिए हैं। साथ ही हर थाने को इसमें और गंभीरता बरतने के निर्देश दिए हैं। – अमरेंद्र सिंह, एडिशनल डीसीपी जोन-2
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