×
टैक्स ऑडिट में देरी पर डेढ़ लाख की पेनाल्टी, छोटी चूक भी पड़ सकती है भारी, सेमिनार में बोले विशेषज्ञ

टैक्स ऑडिट में देरी पर डेढ़ लाख की पेनाल्टी, छोटी चूक भी पड़ सकती है भारी, सेमिनार में बोले विशेषज्ञ

मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) इंदौर ज़ोन ने नई टैक्स आडिट व्यवस्था की बारीकियों को समझाने के लिए शनिवार को सेमिनार आयोजित किया। व…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 08:07:06 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 08:07:06 AM (IST)

सेमिनार में कर विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन। (एआई इमेज)

HighLights

  1. मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन इंदौर ज़ोन ने नई टैक्स ऑडिट व्यवस्था की बारीकियों को समझाने के लिए सेमिनार आयोजित किया
  2. सुझाव दिया कि ऑडिट रिपोर्ट फाइनल करने से पहले हर नियम और आंकड़ों का बारीकी से मिलान करें
  3. ऑडिट में जीएसटी, टीडीएस, एआइएस, 26 एएस और वित्तीय विवरणों में दिखाई देने वाले सभी आंकड़ों का मिलान भी करना है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) इंदौर ज़ोन ने नई टैक्स आडिट व्यवस्था की बारीकियों को समझाने के लिए शनिवार को सेमिनार आयोजित किया। विशेषज्ञ वक्ताओं ने कर पेशेवरों को सुझाव दिया कि ऑडिट रिपोर्ट फाइनल करने से पहले हर नियम और आंकड़ों का बारीकी से मिलान करें।

टैक्स ऑडिट का मतलब सिर्फ खातों की जांच और फार्म 3 सीडी भरना भर नहीं है बल्कि ऑडिट में आपकों जीएसटी, टीडीएस, एआइएस, 26 एएस और वित्तीय विवरणों में दिखाई देने वाले सभी आंकड़ों का मिलान भी करना है। आंकड़ों और ऑडिट फार्म में अंतर दिखा तो यह अनियमितता या कमी की श्रेणी में आ जाएगा।

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर 1.50 लाख रुपये तक की पेनाल्टी

कर पेशेवरों के साथ विशेषज्ञ वक्ताओं ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर 1.50 लाख रुपये तक की पेनाल्टी के प्रविधान को अव्यवहारिक बताया। करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स के सामने इसकी कानूनी वैधता और व्यवहारिकता पर सवाल भी खड़े किए।

सेमिनार में मुख्य वक्ता एवं अहमदाबाद से आए सीए पलक पावागढ़ी थे। उन्होंने “नई टैक्स आडिट व्यवस्था एवं व्यावहारिक रिपोर्टिंग की बारीकियां” विषय पर टैक्स ऑडिट की बदलती प्रकृति और रिपोर्टिंग की बारीकियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने कहा कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले केवल बुक्स ऑफ अकाउंट्स की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का आपसी मिलान और उनके बीच अंतर का उचित विश्लेषण भी आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से असेसमेंट ईयर 2026-27 के टैक्स ऑडिट को लेकर महत्वपूर्ण व्यावहारिक बिंदुओं पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि ऑडिटर को टर्नओवर रिसीप्ट का बुक्स, जीएसटी रिटर्न, टीडीएस डाटा, एआईएस एवं अन्य उपलब्ध सूचनाओं से रिकांसिलिएशन करना चाहिए। दूसरे तकनीकी सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सीए सुमित नेमा ने “लीगल वैलिडिटी आफ़ पेनाल्टी अप टू “1.50 लाख फॉर डिले इन टैक्स ऑडिट” विषय पर कानूनी पहलुओं को विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 271बी के अंतर्गत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में निर्धारित समय के भीतर ऑडिट करवाने अथवा रिपोर्ट फर्निंश करने में डिफ़ॉल्ट की स्थिति में पेनाल्टी का प्रविधान है।सेमिनार का संचालन एमपीटीसीए के सचिव सीए शैलेन्द्र सिंह सोलंकी ने किया। दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं का परिचय सीए कीर्ति जोशी ने प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रैक्टिकल और लीगल इश्यूज पर विशेषज्ञों से सवाल किए, जिनका विस्तार से समाधान किया गया।

यह भी पढ़ें- Income Tax Return फार्म में हुए 10 बदलाव, जरा सी चूक से आ सकता है नोटिस

Source link
#टकस #ऑडट #म #दर #पर #डढ #लख #क #पनलट #छट #चक #भ #पड #सकत #ह #भर #समनर #म #बल #वशषजञ

Previous post

CWG 2026: पीएम मोदी से भारतीय दल की मुलाकात जारी, पदक विजेताओं से संवाद कर रहे प्रधानमंत्री

Next post

टीकमगढ़ में मानसून सक्रिय, रुक-रुक कर बारिश जारी: खरीफ फसलों को मिली राहत, अगले दो दिन अच्छी बारिश की संभावना – Tikamgarh News

Post Comment