नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर एसडीएम जगदीश धनगर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
उन्होंने झूठ शपथ पत्र के लिए कोर्ट से माफी मांगी और कहा कि टाइपिंग में गलती की वजह से शपथ पत्र में यह लिखा गया था कि अहमदाबाद के निजी अस्पताल का भुगतान हो गया है, लेकिन अहमदाबाद के निजी अस्पताल का भुगतान अब तक हुआ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया में है।
धनगर ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सात दिन में अस्पताल का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हादसे में घायल लोगों ने उपचार के लिए बांबे अस्पताल और अरबिंदो अस्पताल में जो राशि जमा कराई थी वह भी उन्हें वापस दिलवाने की प्रक्रिया एक सप्ताह में शुरू कर दी जाएगी।
शासन का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि चूंकि मुआवजे के लिए नगर निगम और शासन दोनों बराबरी से जिम्मेदार हैं, इसलिए घायलों के उपचार का खर्च दोनों बराबरी से वहन करेंगे। मामले में अब 27 अगस्त को सुनवाई होगी।
सुमन नगर में हुए हादसे को लेकर हाई कोर्ट में चल रही यह जनहित याचिका एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है। याचिका में उन्होंने जिम्मेदारों पर आपराधिक केस दर्ज करने और घायलों को निश्शुल्क उपचार उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हादसे में झुलसे लोगों का निश्शुल्क उपचार उपलब्ध कराने और गंभीर रूप से झुलसी युवती को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजने का आदेश दिया था।
याचिका की सुनवाई के दौरान वार्ड 31 के पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम एफआइआर में शामिल किया जा चुका है। 6 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान एसडीएम जगदीश धनगर ने कोर्ट को बताया था कि हादसे में घायल लोगों के उपचार के बिल का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका है। इस बात के समर्थन मेें उन्होंने शपथ पत्र भी दिया था।
याचिकाकर्ता ने इस पर आपत्ति ली और कोर्ट को बताया कि शपथ पत्र झूठा है। घायलों के उपचार का बिल अब भी बकाया है। इस पर कोर्ट ने धनगर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए थे। शुक्रवार को धनगर उपस्थित हुए और झूठे शपथ पत्र के लिए कोर्ट से माफी मांगी। उनका कहना था कि टाइपिंग में गलती से बिल का भुगतान हो चुका है लिखा गया है। दरअसल बिल के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है और एक सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी।
शासन और निगम दोनों को देना होगा उपचार का खर्च
शुक्रवार को हुई सुनवाई में यह बात भी स्पष्ट हो गई कि कोर्ट ने प्रथमदृष्टत: इस हादसे के लिए नगर निगम और शासन दोनों को बराबरी का जिम्मेदार माना है। दो पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा कि चूंकि नगर निगम और शासन मुआवजे के लिए बराबरी के जिम्मेदार हैं, इसलिए घायलों के उपचार का खर्चा दोनों बराबरी से वहन करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने अवंतिका गैस कंपनी को भी पक्षकार बनाने के आदेश दिए हैं।
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