संख्या नियंत्रण और क्षमता प्रबंधन – भविष्य में बाघों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना और उनके संतुलन को बनाए रखना ज़रूरी हो गया है।
सुरक्षित रहवास और शाकाहारी जीवों की कमी – जिस तेजी से बाघ बढ़ रहे हैं, उस अनुपात में संरक्षित वन क्षेत्र सीमित हैं। विकास परियोजनाओं और सडक़ों के निर्माण से दखल बढ़ा है। बाघों के लिए शाकाहारी वन्यजीवों (शिकार) की कमी हो रही है।
मानव-बाघ और आपस में संघर्ष – जंगलों में इंसानी गतिविधियों के प्रवेश से बाघों के बीच वर्चस्व को लेकर आपसी संघर्ष बढ़ गया है।
इंसानों और मवेशियों की सुरक्षा – जंगलों से निकल रहे बाघों की चपेट में आने से ग्रामीणों और मवेशियों की जान को खतरा बढ़ गया है।
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