शासकीय नियमों और विभागीय गाइडलाइन के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर को हर महीने कम से कम 5 लीगल ड्रग सैंपल लेना अनिवार्य होता है। यानी पिछले 6 महीनों में ड्रग इंस्पेक्टर अजीत कुमार जैन को 30 लीगल सैंपल लेने थे, लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि इस अवधि में केवल 8 सैंपल लेकर ही महज खानापूर्ति कर दी गई। सैंपलिंग में इस ढिलाई और औपचारिकता के चलते जिले में नशीले सिरप, प्रतिबंधित गोलियों और अमानक दवाओं का नेटवर्क लगातार मजबूत होता चला गया। शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों के मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाओं की बिक्री की शिकायतें लगातार मिलती रहीं, लेकिन कार्रवाई शून्य के बराबर रही।
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