55 वर्षीय रामस्वरूप शिवहरे बताते हैं कि वह मूल रूप से बर्रा गांव के रहने वाले हैं। 1981 में जब वह छठवीं कक्षा में थे, तब बेहतर पढ़ाई के लिए बड़े भाई के साथ अशोकनगर आए थे। यहां उन्होंने बीएससी गणित, एमए अंग्रेजी साहित्य और बीएड तक की शिक्षा 1995 में पूरी की। शुरुआत में उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में 700 रुपए प्रतिमाह पर पढ़ाना शुरू किया, लेकिन उनके मन में युवाओं के लिए कुछ अलग करने की चाह थी।
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