नई व्यवस्था में जीएसटी पंजीकृत करदाता को पत्र जारी करते समय विभाग के कॉरेस्पॉन्डेंस मॉड्यूल में उसका जीएसटीआइएन दर्ज किया जाएगा। सिस्टम इससे करदाता का नाम, पैन, सर्किल, कार्यालय या डिवीजन, जिला, राज्य और पिन कोड जैसी जानकारी स्वत: लेगा। अधिकारी पत्र की पीडीएफ तैयार कर उसे डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करेंगे। पीडीएफ अपलोड होते ही सिस्टम यूनिक डीआइएन और क्यूआर कोड तैयार करेगा। यही डीआइएन उस दस्तावेज की डिजिटल पहचान बनेगा।
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