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अमेरिका ने खत्म किया नेपाल का अस्थाई संरक्षित दर्जा, जानें ये क्या है?…इससे बढ़ेगी नेपालियों की मुश्किल

अमेरिका ने खत्म किया नेपाल का अस्थाई संरक्षित दर्जा, जानें ये क्या है?…इससे बढ़ेगी नेपालियों की मुश्किल

Image Source : AP
नेपाल की प्रतीकात्मक फोटो।

वॉशिंगटन/काठमांडू: अमेरिका ने नेपाल के लिए अस्थायी संरक्षित दर्जा समाप्त कर दिया है। इससे अमेरिका में रह रहे नेपालियोंकी मुश्किल बढ़ गई है। करीब 7,000 से अधिक नेपाली नागरिकों को लौटना पड़ सकता है। बता दें कि अमेरिका ने नेपाल को दिया गया अस्थायी संरक्षित दर्जा (Temporary Protected Status – TPS) समाप्त करने का फैसला लिया है। 

क्या है ये दर्जा और नेपाल को क्यों मिला था?

यह दर्जा नेपाल को 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद दिया गया था। अमेरिकी गृह मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह दर्जा 24 जून 2025 को समाप्त हो जाएगा और इसके बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। नेपाल को यह दर्जा पहली बार शक्तिशाली भूकंप आने के दौरान दिया गया था, जिसने देश को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। इस निर्णय के पीछे यह तर्क था कि प्राकृतिक आपदा के कारण नेपाल में सुरक्षित रूप से वापस लौटना संभव नहीं था। TPS के अंतर्गत अमेरिका में बिना किसी अन्य कानूनी दर्जे के रहने वाले लोगों को 18 महीने तक कानूनी रूप से रहने और काम करने की अनुमति मिलती है।

विस्तार की प्रक्रिया और संख्या

वर्तमान में अमेरिका में लगभग 12,700 नेपाली नागरिकों को TPS प्राप्त है, जिनमें से 5,500 से अधिक लोग अब तक अमेरिका में कानूनी स्थायी निवासी (Permanent Resident) बन चुके हैं। हालांकि TPS समाप्त होने के बाद, अन्य लगभग 7,000 नेपाली नागरिकों को अब संभावित रूप से अमेरिका छोड़कर वापस नेपाल लौटना होगा, जब तक कि वे किसी अन्य कानूनी तरीके से अमेरिका में रहने का आधार नहीं बना लेते।

अमेरिका ने किया ये ऐलान

‘हिमालयन टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी गृह मंत्री क्रिस्टी नोएम ने कहा कि TPS की मियाद समाप्त होने के बाद, प्रभावित व्यक्तियों को 5 अगस्त तक 60 दिन की अतिरिक्त अवधि दी जाएगी, ताकि वे अपने विकल्पों की समीक्षा कर सकें या वापसी की तैयारी कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय नेपाल में वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर लिया गया है, जहां अब जीवन सामान्य हो चुका है और TPS जारी रखने की मूलभूत आवश्यकता समाप्त हो चुकी है।

क्या हैं चिंताएं

इस निर्णय को कुछ सांगठनिक और मानवाधिकार समूहों ने चिंताजनक बताया है। उनका मानना है कि भले ही नेपाल अब आपातकालीन हालात से बाहर है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता अभी पूरी तरह से नहीं आई है। अमेरिका में रह रहे बहुत से नेपाली नागरिक सालों से अमेरिका की सामाजिक और आर्थिक प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं, और अब उन्हें अचानक लौटने के लिए मजबूर करना कठिन मानवीय संकट पैदा कर सकता है।

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