Datia Bypoll Result, CM Mohan Yadav, MP Politics, BJP Vs Congress, Datia Chunav Parinam, Mohan Yadav Statement, मध्यप्रदेश राजनीति, दतिया उपचुनाव परिणाम, सीएम मोहन यादव">विधानसभा चुनाव की तुलना में मिले ज्यादा वोट, दतिया उपचुनाव पर बोले सीएम डॉ. यादव
कहा- अगला चुनाव और ताकत से लड़ेंगे, यादव ने शिरोधार्य किया उप-चुनाव का परिणाम
Datia Bypoll Result CM Mohan Yadav: मध्यप्रदेश के दतिया उप-चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। जबकि, भाजपा चुनाव हार गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परिणाम को शिरोधार्य किया है। उनका मानना है कि भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा-लोकसभा-राज्यसभा चुनावों में ऐतिहासिक सफलता मिली है। भविष्य में बीजेपी और ताकत से चुनाव लड़ेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अगस्त को चुनाव परिणाम आने के बाद मीडिया से कहा कि दतिया विधानसभा सीट पहले कांग्रेस के पास थी। इस उपचुनाव में भाजपा को विधानसभा चुनाव की तुलना में 1700 अधिक वोट प्राप्त हुए हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और राज्यसभा चुनाव में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
भविष्य में और ताकत से लड़ेंगे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उपचुनाव का जनादेश हम शिरोधार्य करते हैं। आने वाले चुनावों में हम और अधिक ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे और विजय प्राप्त करेंगे।
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कहा- अगला चुनाव और ताकत से लड़ेंगे, यादव ने शिरोधार्य किया उप-चुनाव का परिणाम Datia…
'70 लोग एक ही बाथरूम में...' Salman Khan ने सुनाया दर्द भरा किस्सा zoomtventertainment.com Source link…
किताब में मोहब्बत, जुदाई, याद, दर्द और रिश्तों की भावनाओं को बहुत सादगी से लिखा गया है। कई ग़ज़ल ऐसी हैं जो पढ़ते ही मन में उतर जाती हैं और देर तक याद रहती हैं। यह सिर्फ ग़ज़ल की किताब नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बातों का एक खूबसूरत आईना है। शायरी तो ऐसे हैं कि हर महबूब को आशिक और आशिक को महबूब का दीदार करा दे।
हमनशीं में प्रस्तुत ग़ज़लें संवेदनशील मन, सच्ची मोहब्बत और गहरे मानवीय अनुभवों की बेहतरीन अभिव्यक्ति हैं। शायर ने प्रेम, विरह, इंतजार, तन्हाई और उम्मीद जैसे भावनात्मक विषयों को सहज, सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। ये ग़ज़लें पाठक के मन में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती हैं और अंत तक अपनी छाप छोड़ती हैं। हालाँकि कई ग़ज़लें अपने आप में मिठास लिए हुए है, पर उसमे एक खास ग़ज़ल है –
_अपनी उल्फत के वो नगमात मिले,_ _मिलना चाहा था मगर बीच में दीवार मिले….._ _आ के बैठे ही थे महफिल में, के बेजार उठे,_ _हमसे पहले भी तो, साकी के तलबगार मिले…._ _माना दुनिया में है खुदगर्ज-ओ-बेवफा ही नहीं,_ _माना हर गाम पर इन्सां भी खुद्दार मिले_ _घर से निकले थे वो दामन को बचाकर अपने_ _उन पर ही इल्जाम के छीटें सरे बाजार मिले_ _बाद मुद्दत के यह “कौशल” है होश में आये_ _गो जिंदगानी में ठोकर ही बार-बार मिले_
ग़ज़लों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी है। आशिक का अपनी महबूब को अपनी चाहत पेश करने का जो अंदाज है वह जज्बाती बना देता है। उदाहरण के तौर पर- _”ये करम मुझपर तेरी चाहतों का रहा,_ _कभी ओंस से बुझी प्यास तो कभी दरिया ने भी प्यासा रखा।”_
यह शायरी प्रेम की विडंबना और जीवन के विरोधाभासों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है। ‘ओस’ और ‘दरिया’ जैसे बिंबों का प्रयोग ग़ज़ल को सौंदर्य और गहराई प्रदान करता है।
इसी प्रकार- _”तुझे हासिल करने की ऐसी ज़िद रही,_ _तुझे खो कर भी पाने की उम्मीद रही।”_
यहाँ शायर अपने मर्म को ऐसे पेश करता है जैसे लगता है प्रेम की दृढ़ता, समर्पण और आशा का अत्यंत मार्मिक चित्रण हो। वहीं, “तन्हाइयों” और “यादों” का उल्लेख रचना को भावनात्मक विस्तार देता है। सहज भाषा, लयपूर्ण अभिव्यक्ति आम पाठकों के लिए भी पठनीय है। कठिन शब्दों या अलंकरणों के बजाय स्वाभाविक अभिव्यक्ति को महत्व दिया गया है, जिससे ग़ज़लें सीधे हृदय तक पहुँचती हैं। शायर की संवेदनशील दृष्टि और भावों की ईमानदारी इन रचनाओं को विशेष बनाती है।
_”जला रखा हूँ दीपक तेरे आने की चाहत लिए,_ _जलाना दिल न पड़े, तेरे न आने की सूरत में….”_
आनंद कौशल का यह ग़ज़ल-शायरी-संग्रह प्रेम-विरह, इंतज़ार-मिलन, साथ-तन्हाई और वफ़ा-बेवफ़ाई जैसी मानवीय संवेदनाओं को बेहद सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
_”अश्कों को दामन में छिपाये बैठा सारी रात,_ _शहरों को यूँ वीरानियों में डूबते देखा था…”_
प्रत्येक शेर में अनुभवों की गहराई और भावनाओं की सच्चाई झलकती है, जिससे पाठक स्वयं को इन रचनाओं से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यही कारण है कि यह संग्रह केवल साहित्य-प्रेमियों ही नहीं, बल्कि नए पाठकों को भी आकर्षित करने की क्षमता रखता है। आनदं कौशल ने अपनी हमनशीं में सिर्फ मोहब्बत, जुदाई, वफ़ा का हीं जिक्र नहीं किया है. उन्होंने वर्तमान सामाजिक और राजनितिक परिस्थितयों पर भी चोट की है।
_मुश्किलें हज़ार हैं दो जून रोटी की जुगाड़ में…..,_ _कितनी उम्मीदों को हर रोज देखता हूँ कबाड़ में….”_ और _”ये राजनीति का चरित्र है….._ _बोल और कृत्य विचित्र है…..”_
समग्र रूप से यह संग्रह प्रेम और जीवन की भावनाओं का सुंदर दस्तावेज़ है। आनंद कौशल की लेखनी संवेदनाओं को शब्दों का ऐसा रूप देती है, जो पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है। यह संग्रह समकालीन हिंदी-उर्दू शायरी के पाठकों के लिए एक सराहनीय और पठनीय कृति कही जा सकती है। अगर आप आसान भाषा में दिल को छू लेने वाली शायरी पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह किताब आपको ज़रूर अच्छी लगेगी। उम्मीद है कि शायरी पसंद करने वाले हर पाठक को इसमें अपने मन के भाव कहीं न कहीं ज़रूर मिलेंगे। आनंद कौशल जी को उनकी मर्मस्पर्शी कृति (हमनशीं) के लिए बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। …………… मधुप मणि “पिक्कू” पत्रकार, लेखक सह महासचिव, डब्ल्यूजेएआई
किताब में मोहब्बत, जुदाई, याद, दर्द और रिश्तों की भावनाओं को बहुत सादगी से लिखा गया है। कई ग़ज़ल ऐसी हैं जो पढ़ते ही मन में उतर जाती हैं और देर तक याद रहती हैं। यह सिर्फ ग़ज़ल की किताब नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बातों का एक खूबसूरत आईना है। शायरी तो ऐसे हैं कि हर महबूब को आशिक और आशिक को महबूब का दीदार करा दे।
हमनशीं में प्रस्तुत ग़ज़लें संवेदनशील मन, सच्ची मोहब्बत और गहरे मानवीय अनुभवों की बेहतरीन अभिव्यक्ति हैं। शायर ने प्रेम, विरह, इंतजार, तन्हाई और उम्मीद जैसे भावनात्मक विषयों को सहज, सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। ये ग़ज़लें पाठक के मन में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती हैं और अंत तक अपनी छाप छोड़ती हैं। हालाँकि कई ग़ज़लें अपने आप में मिठास लिए हुए है, पर उसमे एक खास ग़ज़ल है –
_अपनी उल्फत के वो नगमात मिले,_ _मिलना चाहा था मगर बीच में दीवार मिले….._ _आ के बैठे ही थे महफिल में, के बेजार उठे,_ _हमसे पहले भी तो, साकी के तलबगार मिले…._ _माना दुनिया में है खुदगर्ज-ओ-बेवफा ही नहीं,_ _माना हर गाम पर इन्सां भी खुद्दार मिले_ _घर से निकले थे वो दामन को बचाकर अपने_ _उन पर ही इल्जाम के छीटें सरे बाजार मिले_ _बाद मुद्दत के यह “कौशल” है होश में आये_ _गो जिंदगानी में ठोकर ही बार-बार मिले_
ग़ज़लों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी है। आशिक का अपनी महबूब को अपनी चाहत पेश करने का जो अंदाज है वह जज्बाती बना देता है। उदाहरण के तौर पर- _”ये करम मुझपर तेरी चाहतों का रहा,_ _कभी ओंस से बुझी प्यास तो कभी दरिया ने भी प्यासा रखा।”_
यह शायरी प्रेम की विडंबना और जीवन के विरोधाभासों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है। ‘ओस’ और ‘दरिया’ जैसे बिंबों का प्रयोग ग़ज़ल को सौंदर्य और गहराई प्रदान करता है।
इसी प्रकार- _”तुझे हासिल करने की ऐसी ज़िद रही,_ _तुझे खो कर भी पाने की उम्मीद रही।”_
यहाँ शायर अपने मर्म को ऐसे पेश करता है जैसे लगता है प्रेम की दृढ़ता, समर्पण और आशा का अत्यंत मार्मिक चित्रण हो। वहीं, “तन्हाइयों” और “यादों” का उल्लेख रचना को भावनात्मक विस्तार देता है। सहज भाषा, लयपूर्ण अभिव्यक्ति आम पाठकों के लिए भी पठनीय है। कठिन शब्दों या अलंकरणों के बजाय स्वाभाविक अभिव्यक्ति को महत्व दिया गया है, जिससे ग़ज़लें सीधे हृदय तक पहुँचती हैं। शायर की संवेदनशील दृष्टि और भावों की ईमानदारी इन रचनाओं को विशेष बनाती है।
_”जला रखा हूँ दीपक तेरे आने की चाहत लिए,_ _जलाना दिल न पड़े, तेरे न आने की सूरत में….”_
आनंद कौशल का यह ग़ज़ल-शायरी-संग्रह प्रेम-विरह, इंतज़ार-मिलन, साथ-तन्हाई और वफ़ा-बेवफ़ाई जैसी मानवीय संवेदनाओं को बेहद सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
_”अश्कों को दामन में छिपाये बैठा सारी रात,_ _शहरों को यूँ वीरानियों में डूबते देखा था…”_
प्रत्येक शेर में अनुभवों की गहराई और भावनाओं की सच्चाई झलकती है, जिससे पाठक स्वयं को इन रचनाओं से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यही कारण है कि यह संग्रह केवल साहित्य-प्रेमियों ही नहीं, बल्कि नए पाठकों को भी आकर्षित करने की क्षमता रखता है। आनदं कौशल ने अपनी हमनशीं में सिर्फ मोहब्बत, जुदाई, वफ़ा का हीं जिक्र नहीं किया है. उन्होंने वर्तमान सामाजिक और राजनितिक परिस्थितयों पर भी चोट की है।
_मुश्किलें हज़ार हैं दो जून रोटी की जुगाड़ में…..,_ _कितनी उम्मीदों को हर रोज देखता हूँ कबाड़ में….”_ और _”ये राजनीति का चरित्र है….._ _बोल और कृत्य विचित्र है…..”_
समग्र रूप से यह संग्रह प्रेम और जीवन की भावनाओं का सुंदर दस्तावेज़ है। आनंद कौशल की लेखनी संवेदनाओं को शब्दों का ऐसा रूप देती है, जो पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है। यह संग्रह समकालीन हिंदी-उर्दू शायरी के पाठकों के लिए एक सराहनीय और पठनीय कृति कही जा सकती है। अगर आप आसान भाषा में दिल को छू लेने वाली शायरी पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह किताब आपको ज़रूर अच्छी लगेगी। उम्मीद है कि शायरी पसंद करने वाले हर पाठक को इसमें अपने मन के भाव कहीं न कहीं ज़रूर मिलेंगे। आनंद कौशल जी को उनकी मर्मस्पर्शी कृति (हमनशीं) के लिए बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। …………… मधुप मणि “पिक्कू” पत्रकार, लेखक सह महासचिव, डब्ल्यूजेएआई
">आनंद कौशल की ‘हमनशीं’-दिल से निकली ग़ज़लें, इंसानी जज़्बातों का सजीव आईना
Anand Kaushal Hamnasheen: हमनशीं आनंद कौशल का पहला ग़ज़ल एवं शायरी संग्रह है। पाठकों को हमनशीं में सबसे अच्छी बात यह लगेगी कि इसकी ज़्यादातर ग़ज़लें सीधे दिल से निकली हुई लगती हैं। भाषा बिल्कुल आसान है, इसलिए हर ग़ज़ल को आसानी से समझ सकते है। कहीं भी शब्दों में बनावटीपन नहीं दिखता, बल्कि ऐसा महसूस होता है कि शायर ने हर पढ़ने वालों के जीवन के एहसासों को ही शब्दों में ढाला हो।
किताब में मोहब्बत, जुदाई, याद, दर्द और रिश्तों की भावनाओं को बहुत सादगी से लिखा गया है। कई ग़ज़ल ऐसी हैं जो पढ़ते ही मन में उतर जाती हैं और देर तक याद रहती हैं। यह सिर्फ ग़ज़ल की किताब नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बातों का एक खूबसूरत आईना है। शायरी तो ऐसे हैं कि हर महबूब को आशिक और आशिक को महबूब का दीदार करा दे।
हमनशीं में प्रस्तुत ग़ज़लें संवेदनशील मन, सच्ची मोहब्बत और गहरे मानवीय अनुभवों की बेहतरीन अभिव्यक्ति हैं। शायर ने प्रेम, विरह, इंतजार, तन्हाई और उम्मीद जैसे भावनात्मक विषयों को सहज, सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। ये ग़ज़लें पाठक के मन में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती हैं और अंत तक अपनी छाप छोड़ती हैं। हालाँकि कई ग़ज़लें अपने आप में मिठास लिए हुए है, पर उसमे एक खास ग़ज़ल है –
_अपनी उल्फत के वो नगमात मिले,_ _मिलना चाहा था मगर बीच में दीवार मिले….._ _आ के बैठे ही थे महफिल में, के बेजार उठे,_ _हमसे पहले भी तो, साकी के तलबगार मिले…._ _माना दुनिया में है खुदगर्ज-ओ-बेवफा ही नहीं,_ _माना हर गाम पर इन्सां भी खुद्दार मिले_ _घर से निकले थे वो दामन को बचाकर अपने_ _उन पर ही इल्जाम के छीटें सरे बाजार मिले_ _बाद मुद्दत के यह “कौशल” है होश में आये_ _गो जिंदगानी में ठोकर ही बार-बार मिले_
ग़ज़लों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी है। आशिक का अपनी महबूब को अपनी चाहत पेश करने का जो अंदाज है वह जज्बाती बना देता है। उदाहरण के तौर पर- _”ये करम मुझपर तेरी चाहतों का रहा,_ _कभी ओंस से बुझी प्यास तो कभी दरिया ने भी प्यासा रखा।”_
यह शायरी प्रेम की विडंबना और जीवन के विरोधाभासों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है। ‘ओस’ और ‘दरिया’ जैसे बिंबों का प्रयोग ग़ज़ल को सौंदर्य और गहराई प्रदान करता है।
इसी प्रकार- _”तुझे हासिल करने की ऐसी ज़िद रही,_ _तुझे खो कर भी पाने की उम्मीद रही।”_
यहाँ शायर अपने मर्म को ऐसे पेश करता है जैसे लगता है प्रेम की दृढ़ता, समर्पण और आशा का अत्यंत मार्मिक चित्रण हो। वहीं, “तन्हाइयों” और “यादों” का उल्लेख रचना को भावनात्मक विस्तार देता है। सहज भाषा, लयपूर्ण अभिव्यक्ति आम पाठकों के लिए भी पठनीय है। कठिन शब्दों या अलंकरणों के बजाय स्वाभाविक अभिव्यक्ति को महत्व दिया गया है, जिससे ग़ज़लें सीधे हृदय तक पहुँचती हैं। शायर की संवेदनशील दृष्टि और भावों की ईमानदारी इन रचनाओं को विशेष बनाती है।
_”जला रखा हूँ दीपक तेरे आने की चाहत लिए,_ _जलाना दिल न पड़े, तेरे न आने की सूरत में….”_
आनंद कौशल का यह ग़ज़ल-शायरी-संग्रह प्रेम-विरह, इंतज़ार-मिलन, साथ-तन्हाई और वफ़ा-बेवफ़ाई जैसी मानवीय संवेदनाओं को बेहद सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
_”अश्कों को दामन में छिपाये बैठा सारी रात,_ _शहरों को यूँ वीरानियों में डूबते देखा था…”_
प्रत्येक शेर में अनुभवों की गहराई और भावनाओं की सच्चाई झलकती है, जिससे पाठक स्वयं को इन रचनाओं से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यही कारण है कि यह संग्रह केवल साहित्य-प्रेमियों ही नहीं, बल्कि नए पाठकों को भी आकर्षित करने की क्षमता रखता है। आनदं कौशल ने अपनी हमनशीं में सिर्फ मोहब्बत, जुदाई, वफ़ा का हीं जिक्र नहीं किया है. उन्होंने वर्तमान सामाजिक और राजनितिक परिस्थितयों पर भी चोट की है।
_मुश्किलें हज़ार हैं दो जून रोटी की जुगाड़ में…..,_ _कितनी उम्मीदों को हर रोज देखता हूँ कबाड़ में….”_ और _”ये राजनीति का चरित्र है….._ _बोल और कृत्य विचित्र है…..”_
समग्र रूप से यह संग्रह प्रेम और जीवन की भावनाओं का सुंदर दस्तावेज़ है। आनंद कौशल की लेखनी संवेदनाओं को शब्दों का ऐसा रूप देती है, जो पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है। यह संग्रह समकालीन हिंदी-उर्दू शायरी के पाठकों के लिए एक सराहनीय और पठनीय कृति कही जा सकती है। अगर आप आसान भाषा में दिल को छू लेने वाली शायरी पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह किताब आपको ज़रूर अच्छी लगेगी। उम्मीद है कि शायरी पसंद करने वाले हर पाठक को इसमें अपने मन के भाव कहीं न कहीं ज़रूर मिलेंगे। आनंद कौशल जी को उनकी मर्मस्पर्शी कृति (हमनशीं) के लिए बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। …………… मधुप मणि “पिक्कू” पत्रकार, लेखक सह महासचिव, डब्ल्यूजेएआई
Anand Kaushal Hamnasheen: हमनशीं आनंद कौशल का पहला ग़ज़ल एवं शायरी संग्रह है। पाठकों को…
Features,Health,Health Update,Injury,Instagram,Rashmika Mandanna,Social Media">Rashmika Mandanna breaks silence on “painful” hip injury: “I treated my body like a machine”
Actor Rashmika Mandanna has shared a candid health update with fans, revealing that she is recovering from a painful hip injury that forced her to take an unexpected break from work. After being away from social media for some time, the actor returned with an emotional Instagram post explaining the reason behind her absence and reassuring fans that she is on the road to recovery.
Rashmika Mandanna breaks silence on “painful” hip injury: “I treated my body like a machine”
Along with the note, Rashmika posted a series of photographs from her recovery at home, including selfies, moments with her pet dogs, puzzle-solving sessions, desserts and thoughtful gifts she received from well-wishers.
Rashmika explains her injury
In her post, Rashmika admitted that she had initially hoped to keep the injury private but eventually decided to share the update with her followers. She revealed that this was her third injury in succession and reflected on how she had been pushing herself physically: “It happened awhile ago ya and this is my 3rd injury back to back. I should definitely learn to treat my body like a human body and not some machine.”
The actor went on to explain that one of the tendons connecting her right hip to her leg had detached during a dance sequence for her upcoming film Mysaa. She wrote, “There are four tendons on each side of your hip that connect your hip to your leg and one of those tendons on my right hip apparently had detached and that has to attach again, for me to be able to lift my leg up and stuff. This happened during my dance shoot for Mysaa. My God, that’s the most aggressive film I’ve ever done for sure!”
Rashmika Mandanna says, “Don’t worry, I’m fine”
Despite the painful injury, Rashmika maintained an optimistic outlook and assured fans that the situation was under control: “Don’t worry. It hurts but it’s not unbearable.”
She jokingly added that the forced break felt like a reminder from God to slow down, saying that if it were left to her, she would never take time off. The actor also shared that her previous injuries had all been “random” and the result of what she described as “freak accidents.” While recovering, Rashmika said she has been spending her time solving puzzles, relaxing at home and enjoying desserts, though she admitted she misses her regular workout routine.
She confessed that staying away from exercise has been one of the biggest challenges during recovery, as she usually relies on intense workouts and running to stay fit. Her upbeat attitude struck a chord with fans, who filled the comments section with messages wishing her a speedy recovery.
Once she recovers, Rashmika is expected to resume work on an impressive lineup of projects. The actor will next be seen in Mysaa, followed by Ranabaali, Pushpa 3, Animal Park and Rakka.
For now, however, Rashmika is focusing on healing, while assuring fans that she will continue to share updates as she progresses through her recovery.
फैंस को पसंद आईं तस्वीरें
तस्वीरें शेयर करते हुए अभिनेत्री ने कैप्शन में लिखा है ‘इश्क’। सोनल की तस्वीरों पर फैंस कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा ‘भारत में ताज महल के बाद आप मुझे सबसे ज्यादा पसंद हो।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आपसे एक बार मिलने की इच्छा है।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आप इमरान हाशमी के साथ अच्छी लगती हो।’ कई दूसरे यूजर्स ने अभिनेत्री की तारीफ की है।
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सोनल चौहान
– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
‘मिर्जापुर’ की स्टारकास्ट
आपको बता दें कि सोनल चौहान अपकमिंग फिल्म ‘मिर्जापुर’ में विद्या का किरदार निभाएंगी। इस फिल्म में अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, जितेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल और रवि किशन होंगे। ये वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ पर आधारित होगी।
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सोनल चौहान
– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
पहली फिल्म से मशहूर हुईं अभिनेत्री
यह गौरतलब है कि सोनल चौहान ने 2008 में फिल्म ‘जन्नत’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। दर्शकों को इमरान हाश्मी के साथ उनकी केमेस्ट्री पसंद आई थी। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय करने की वजह से साल 2009 के फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस के लिए नामांकन मिला था।
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फैंस को पसंद आईं तस्वीरें
तस्वीरें शेयर करते हुए अभिनेत्री ने कैप्शन में लिखा है ‘इश्क’। सोनल की तस्वीरों पर फैंस कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा ‘भारत में ताज महल के बाद आप मुझे सबसे ज्यादा पसंद हो।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आपसे एक बार मिलने की इच्छा है।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आप इमरान हाशमी के साथ अच्छी लगती हो।’ कई दूसरे यूजर्स ने अभिनेत्री की तारीफ की है।
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सोनल चौहान
– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
‘मिर्जापुर’ की स्टारकास्ट
आपको बता दें कि सोनल चौहान अपकमिंग फिल्म ‘मिर्जापुर’ में विद्या का किरदार निभाएंगी। इस फिल्म में अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, जितेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल और रवि किशन होंगे। ये वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ पर आधारित होगी।
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सोनल चौहान
– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
पहली फिल्म से मशहूर हुईं अभिनेत्री
यह गौरतलब है कि सोनल चौहान ने 2008 में फिल्म ‘जन्नत’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। दर्शकों को इमरान हाश्मी के साथ उनकी केमेस्ट्री पसंद आई थी। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय करने की वजह से साल 2009 के फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस के लिए नामांकन मिला था।
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सोनल चौहान अपनी अपकमिंग फिल्म ‘मिर्जापुर’ को लेकर चर्चा में हैं। इस बीच उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। तस्वीरों के साथ उन्होंने एक प्यारा शब्द लिखा है। सोनल चौहान की तस्वीरों को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं।
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सोनल चौहान
– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
सोनल की पोस्ट में क्या है?
सोनल चौहान ने अपनी जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें देखा जा सकता है कि उन्होंने शानदार लहंगा और चोली पहना है। उनकी चोली पर शानदार कढ़ाई है। उन्होंने मैचिंग ज्वैलरी पहनी है। अभिनेत्री ने दोनों हाथों पर अपना दुपट्टा डाला है। डार्क मेकअप और खुले बालों से उन्होंने अपने लुक को पूरा किया है।
फैंस को पसंद आईं तस्वीरें
तस्वीरें शेयर करते हुए अभिनेत्री ने कैप्शन में लिखा है ‘इश्क’। सोनल की तस्वीरों पर फैंस कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा ‘भारत में ताज महल के बाद आप मुझे सबसे ज्यादा पसंद हो।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आपसे एक बार मिलने की इच्छा है।’ एक और यूजर ने लिखा ‘आप इमरान हाशमी के साथ अच्छी लगती हो।’ कई दूसरे यूजर्स ने अभिनेत्री की तारीफ की है।
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– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
‘मिर्जापुर’ की स्टारकास्ट
आपको बता दें कि सोनल चौहान अपकमिंग फिल्म ‘मिर्जापुर’ में विद्या का किरदार निभाएंगी। इस फिल्म में अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, जितेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल और रवि किशन होंगे। ये वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ पर आधारित होगी।
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– फोटो : इंस्टाग्राम@sonalchauhan
पहली फिल्म से मशहूर हुईं अभिनेत्री
यह गौरतलब है कि सोनल चौहान ने 2008 में फिल्म ‘जन्नत’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। दर्शकों को इमरान हाश्मी के साथ उनकी केमेस्ट्री पसंद आई थी। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय करने की वजह से साल 2009 के फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस के लिए नामांकन मिला था।
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इंटरनेट डेस्क। अपने जमाने की बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्री मुमताज का आज जन्मदिन है। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1947 को मुंबई में हुआ था। मां और चाची दोनों के फिल्मी दुनिया में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम करने के कारण मुमताज का झुकाव भी फिल्मों की ओर ही रहा।
इसी कारण उन्होंने बतौर बाल कलाकार सिनेमा में अपनी शुरुआत कर दी थी। उन्होंने 'सोने की चिड़िया' नाम की फिल्म से डेब्यू किया। ये फिल्म साल 1958 में रिलीज हुई थी। उन्होंने दारा सिंह जैसे दिग्गज के साथ भी 16 फिल्मों में अभिनय किया। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना के साथ उन्होंने लगातार आठ सुपरहिट फिल्में देकर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई। मुमताज की न सिर्फ अदाकारी को बल्कि उनकी खूबसूरती और डांस को भी काफी दर्शकों ने खूब पसंद किया।
बॉलीवुड के इन कलाकारों के साथ किया काम
साल 1967 में आई फिल्म 'राम और श्याम' से मुमताज को पहली बार बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद मुमताज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें धर्मेंद्र, दारा सिंह, दिलीप कुमार, संजीव कुमार, फिरोज खान और शम्मी कपूर जैसे एक्टर्स कलाकारों के साथ कम करने का मौका मिला।
राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी जोड़ी
हालांकि उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी। राजेश खन्ना और मुमताज ने बैक टू बैक आठ सफल फिल्में दो रास्ते, सच्चा झूठा, रोटी, आप की कसम, अपना देश, दुश्मन, बंधन और प्रेम की कहानी दी। दोनों ने 10 से ज्यादा फिल्मों में एक साथ अभिनय किया। मुमताज जब अपने कॅरियर के शिखर पर थी तक हिंदू बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर सभी का चौंका दिया। माधवानी अमेरिका में पले-बढे हैं।
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इंटरनेट डेस्क। अपने जमाने की बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्री मुमताज का आज जन्मदिन है। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1947 को मुंबई में हुआ था। मां और चाची दोनों के फिल्मी दुनिया में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम करने के कारण मुमताज का झुकाव भी फिल्मों की ओर ही रहा।
इसी कारण उन्होंने बतौर बाल कलाकार सिनेमा में अपनी शुरुआत कर दी थी। उन्होंने 'सोने की चिड़िया' नाम की फिल्म से डेब्यू किया। ये फिल्म साल 1958 में रिलीज हुई थी। उन्होंने दारा सिंह जैसे दिग्गज के साथ भी 16 फिल्मों में अभिनय किया। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना के साथ उन्होंने लगातार आठ सुपरहिट फिल्में देकर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई। मुमताज की न सिर्फ अदाकारी को बल्कि उनकी खूबसूरती और डांस को भी काफी दर्शकों ने खूब पसंद किया।
बॉलीवुड के इन कलाकारों के साथ किया काम
साल 1967 में आई फिल्म 'राम और श्याम' से मुमताज को पहली बार बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद मुमताज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें धर्मेंद्र, दारा सिंह, दिलीप कुमार, संजीव कुमार, फिरोज खान और शम्मी कपूर जैसे एक्टर्स कलाकारों के साथ कम करने का मौका मिला।
राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी जोड़ी
हालांकि उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी। राजेश खन्ना और मुमताज ने बैक टू बैक आठ सफल फिल्में दो रास्ते, सच्चा झूठा, रोटी, आप की कसम, अपना देश, दुश्मन, बंधन और प्रेम की कहानी दी। दोनों ने 10 से ज्यादा फिल्मों में एक साथ अभिनय किया। मुमताज जब अपने कॅरियर के शिखर पर थी तक हिंदू बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर सभी का चौंका दिया। माधवानी अमेरिका में पले-बढे हैं।
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Birthday Special,Mumtaz, Rajesh Khanna, Hindi news">Birthday Special: मुमताज ने राजेश खन्ना के साथ दी लगातार 8 सुपरहिट फिल्में, कॅरियर के पीक पर की शादी, जानें रोचक बातें
इंटरनेट डेस्क। अपने जमाने की बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्री मुमताज का आज जन्मदिन है। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1947 को मुंबई में हुआ था। मां और चाची दोनों के फिल्मी दुनिया में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम करने के कारण मुमताज का झुकाव भी फिल्मों की ओर ही रहा।
इसी कारण उन्होंने बतौर बाल कलाकार सिनेमा में अपनी शुरुआत कर दी थी। उन्होंने 'सोने की चिड़िया' नाम की फिल्म से डेब्यू किया। ये फिल्म साल 1958 में रिलीज हुई थी। उन्होंने दारा सिंह जैसे दिग्गज के साथ भी 16 फिल्मों में अभिनय किया। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना के साथ उन्होंने लगातार आठ सुपरहिट फिल्में देकर बॉलीवुड में अपनी विशेष पहचान बनाई। मुमताज की न सिर्फ अदाकारी को बल्कि उनकी खूबसूरती और डांस को भी काफी दर्शकों ने खूब पसंद किया।
बॉलीवुड के इन कलाकारों के साथ किया काम
साल 1967 में आई फिल्म 'राम और श्याम' से मुमताज को पहली बार बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद मुमताज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें धर्मेंद्र, दारा सिंह, दिलीप कुमार, संजीव कुमार, फिरोज खान और शम्मी कपूर जैसे एक्टर्स कलाकारों के साथ कम करने का मौका मिला।
राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी जोड़ी
हालांकि उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा राजेश खन्ना के साथ पसंद की गई थी। राजेश खन्ना और मुमताज ने बैक टू बैक आठ सफल फिल्में दो रास्ते, सच्चा झूठा, रोटी, आप की कसम, अपना देश, दुश्मन, बंधन और प्रेम की कहानी दी। दोनों ने 10 से ज्यादा फिल्मों में एक साथ अभिनय किया। मुमताज जब अपने कॅरियर के शिखर पर थी तक हिंदू बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर सभी का चौंका दिया। माधवानी अमेरिका में पले-बढे हैं।
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Live news in Hindi, Breaking News Hindi LIVE, 3 August updates, Aaj ki taaja khabar, Latest Hindi News, Breaking news today, world news in hindi, parliament, Breaking News live in hindi, Taza samachar, आज की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, लेटेस्ट न्यूज, बिग ब्रेकिंग न्यूज, बड़ी खबरें, दिनभर की बड़ी खबरें">
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Latest News Today Live Updates in Hindi : मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना जारी। पल पल की जानकारी…
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Latest News Today Live Updates in Hindi : मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और…
'यह बहुत काबिल लोगों का एक ग्रुप है', 'इंडियाज बेस्ट डांसर 5' में बॉलीवुड गानों…
राम कपूर ने इस एपिसोड के दौरान खुलासा किया कि साल 2011 में उनका हिट शो बड़े अच्छे लगते हैं उनके बर्ताव के चलते बंद हो गया था। उन्होंने सेट पर कई बार देरी से आने और साथियों के साथ में बुरा बर्ताव करने के अलावा शराब की लत से जूझने के बारे में भी खुलासा किया।
राम कपूर का तीसरा राज
लॉकअप सीजन 2 के हाल ही के एपिसोड में राम कपूर ने खुलासा किया कि मैंने 27 साल तक इंडस्ट्री में काम किया है। जिसमें कई सारी फिल्में भी की है और बहुत कुछ काम किया है। फिर भी मेरी पहचान एक ही शो से बन गई थी। जिसका नाम ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ हैं। मैंने पूरी दुनिया से छुपा कर रखा था और मेरी पत्नी को भी नहीं पता था।”
बुरे डिप्रेशन से जूझ चुके हैं राम कपूर
राम कपूर ने बताया कि “शो के वक्त में अपनी जिंदगी के सबसे बुरे डिप्रेशन से गुजर रहा था और मेरे वजन के चलते भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार मिला था। मेरी इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी थी कि कुछ वक्त के लिए मैं सबसे ज्यादा रेटिंग वाला टीवी स्टार बन चुका था।”
राम कपूर का 400 से 600 रहता था शुगर लेवल
एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा था और डॉक्टरों ने मुझसे कह दिया था कि मैं बहुत अनहेल्दी हूं। 6 महीने के अंदर मेरी मौत भी हो सकती है और मुझे डायबिटिक स्ट्रोक भी हो सकता है क्योंकि मैं दिन में तीन बार इंसुलिन लिया करता था। मेरा शुगर लेवल 400 से 600 के बीच में रहा करता था और मैं दिन में 14 घंटे तक काम भी किया करता था।”
सेट पर दारू पिया करते थे राम कपूर
राम कपूर आगे बताते हैं कि “मैं किसी को भी इस बारे में बताना नहीं चाहता था क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा प्यार और पैसा मिल रहा था। मैं यह सब कैसे छोड़ सकता था? मैं बहुत ज्यादा बुरा व्यक्ति बन चुका था और मैं शूटिंग पर 6-6 घंटे लेट पहुंचता था। हर किसी से बहुत बुरी तरीके से बर्ताव करता था और मैं सेट पर दारू पिया करता था।”
राम कपूर को खुद पर आती है शर्म
राम कपूर ने आगे यह भी बताया कि आज जब वह पीछे मुड़कर खुद को देखते हैं तो उन्हें अपने इस बर्ताव पर बहुत ज्यादा शर्म आती है। अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि इसके चलते उनकी निजी जिंदगी और प्रोफेशनल जिंदगी पर भी बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा है।
राम कपूर ने इस एपिसोड के दौरान खुलासा किया कि साल 2011 में उनका हिट शो बड़े अच्छे लगते हैं उनके बर्ताव के चलते बंद हो गया था। उन्होंने सेट पर कई बार देरी से आने और साथियों के साथ में बुरा बर्ताव करने के अलावा शराब की लत से जूझने के बारे में भी खुलासा किया।
राम कपूर का तीसरा राज
लॉकअप सीजन 2 के हाल ही के एपिसोड में राम कपूर ने खुलासा किया कि मैंने 27 साल तक इंडस्ट्री में काम किया है। जिसमें कई सारी फिल्में भी की है और बहुत कुछ काम किया है। फिर भी मेरी पहचान एक ही शो से बन गई थी। जिसका नाम ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ हैं। मैंने पूरी दुनिया से छुपा कर रखा था और मेरी पत्नी को भी नहीं पता था।”
बुरे डिप्रेशन से जूझ चुके हैं राम कपूर
राम कपूर ने बताया कि “शो के वक्त में अपनी जिंदगी के सबसे बुरे डिप्रेशन से गुजर रहा था और मेरे वजन के चलते भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार मिला था। मेरी इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी थी कि कुछ वक्त के लिए मैं सबसे ज्यादा रेटिंग वाला टीवी स्टार बन चुका था।”
राम कपूर का 400 से 600 रहता था शुगर लेवल
एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा था और डॉक्टरों ने मुझसे कह दिया था कि मैं बहुत अनहेल्दी हूं। 6 महीने के अंदर मेरी मौत भी हो सकती है और मुझे डायबिटिक स्ट्रोक भी हो सकता है क्योंकि मैं दिन में तीन बार इंसुलिन लिया करता था। मेरा शुगर लेवल 400 से 600 के बीच में रहा करता था और मैं दिन में 14 घंटे तक काम भी किया करता था।”
सेट पर दारू पिया करते थे राम कपूर
राम कपूर आगे बताते हैं कि “मैं किसी को भी इस बारे में बताना नहीं चाहता था क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा प्यार और पैसा मिल रहा था। मैं यह सब कैसे छोड़ सकता था? मैं बहुत ज्यादा बुरा व्यक्ति बन चुका था और मैं शूटिंग पर 6-6 घंटे लेट पहुंचता था। हर किसी से बहुत बुरी तरीके से बर्ताव करता था और मैं सेट पर दारू पिया करता था।”
राम कपूर को खुद पर आती है शर्म
राम कपूर ने आगे यह भी बताया कि आज जब वह पीछे मुड़कर खुद को देखते हैं तो उन्हें अपने इस बर्ताव पर बहुत ज्यादा शर्म आती है। अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि इसके चलते उनकी निजी जिंदगी और प्रोफेशनल जिंदगी पर भी बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा है।
">“सेट पर पीता था दारू,मेरी वजह से हुआ शो बंद…”, राम कपूर का बड़ा खुलासा, बोले- मैं 6 महीने में मरने…
Ram Kapoor Drink Alcohol On Set: नेटफ्लिक्स का रियलिटी शो लॉकअप सीजन 2 इस समय काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और इसमें अभिनेता राम कपूर ने भी हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। हाल ही में शो के इविक्शन टास्क के दौरान एक्टर ने अपना तीसरा सीक्रेट बताया और फिनाले में अपनी जगह पक्की कर ली।
राम कपूर ने इस एपिसोड के दौरान खुलासा किया कि साल 2011 में उनका हिट शो बड़े अच्छे लगते हैं उनके बर्ताव के चलते बंद हो गया था। उन्होंने सेट पर कई बार देरी से आने और साथियों के साथ में बुरा बर्ताव करने के अलावा शराब की लत से जूझने के बारे में भी खुलासा किया।
राम कपूर का तीसरा राज
लॉकअप सीजन 2 के हाल ही के एपिसोड में राम कपूर ने खुलासा किया कि मैंने 27 साल तक इंडस्ट्री में काम किया है। जिसमें कई सारी फिल्में भी की है और बहुत कुछ काम किया है। फिर भी मेरी पहचान एक ही शो से बन गई थी। जिसका नाम ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ हैं। मैंने पूरी दुनिया से छुपा कर रखा था और मेरी पत्नी को भी नहीं पता था।”
बुरे डिप्रेशन से जूझ चुके हैं राम कपूर
राम कपूर ने बताया कि “शो के वक्त में अपनी जिंदगी के सबसे बुरे डिप्रेशन से गुजर रहा था और मेरे वजन के चलते भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार मिला था। मेरी इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी थी कि कुछ वक्त के लिए मैं सबसे ज्यादा रेटिंग वाला टीवी स्टार बन चुका था।”
राम कपूर का 400 से 600 रहता था शुगर लेवल
एक्टर ने आगे बात करते हुए बताया कि “मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा था और डॉक्टरों ने मुझसे कह दिया था कि मैं बहुत अनहेल्दी हूं। 6 महीने के अंदर मेरी मौत भी हो सकती है और मुझे डायबिटिक स्ट्रोक भी हो सकता है क्योंकि मैं दिन में तीन बार इंसुलिन लिया करता था। मेरा शुगर लेवल 400 से 600 के बीच में रहा करता था और मैं दिन में 14 घंटे तक काम भी किया करता था।”
सेट पर दारू पिया करते थे राम कपूर
राम कपूर आगे बताते हैं कि “मैं किसी को भी इस बारे में बताना नहीं चाहता था क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा प्यार और पैसा मिल रहा था। मैं यह सब कैसे छोड़ सकता था? मैं बहुत ज्यादा बुरा व्यक्ति बन चुका था और मैं शूटिंग पर 6-6 घंटे लेट पहुंचता था। हर किसी से बहुत बुरी तरीके से बर्ताव करता था और मैं सेट पर दारू पिया करता था।”
राम कपूर को खुद पर आती है शर्म
राम कपूर ने आगे यह भी बताया कि आज जब वह पीछे मुड़कर खुद को देखते हैं तो उन्हें अपने इस बर्ताव पर बहुत ज्यादा शर्म आती है। अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि इसके चलते उनकी निजी जिंदगी और प्रोफेशनल जिंदगी पर भी बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा है।
Ram Kapoor Drink Alcohol On Set: नेटफ्लिक्स का रियलिटी शो लॉकअप सीजन 2 इस समय…
Batwara 1947,Bollywood,Karan Deol,News,Patna,Patna Sahib,Promotions,Sunny Deol">EXCLUSIVE: Sunny Deol and Karan Deol to seek blessings at Patna Sahib during Batwara 1947 promotions
The promotional campaign for Batwara 1947 is in full swing, with the cast travelling across multiple cities ahead of the film’s theatrical release on August 14, 2026. As part of the ongoing tour, Sunny Deol and his son Karan Deol are scheduled to visit Takht Sri Patna Sahib, one of the holiest Sikh pilgrimage sites, during their stop in Patna.
EXCLUSIVE: Sunny Deol and Karan Deol to seek blessings at Patna Sahib during Batwara 1947 promotions
According to the makers, the actors will offer prayers and seek blessings for the success of the film at the revered shrine, which is among the five Takhts—the highest seats of authority in Sikhism. The visit forms part of the film’s promotional activities as the team continues to engage with audiences across the country in the lead-up to the release.
The Patna leg of the tour has already witnessed enthusiastic participation from fans. During their visit to the city, Sunny Deol and Karan Deol were greeted by large crowds, reflecting the anticipation surrounding the upcoming period drama. The actors are expected to interact with audiences while continuing to promote the film before heading to their next destination.
Directed by Rajkumar Santoshi, Batwara 1947 is set against the backdrop of the Partition of India and explores the human stories that unfolded during one of the most significant chapters in the subcontinent’s history. The recently released trailer offered audiences a glimpse into the emotional narrative, highlighting themes of loss, resilience and hope.
The film also marks the reunion of Sunny Deol and Rajkumar Santoshi after nearly three decades. The actor-director duo previously collaborated on acclaimed films including Ghayal, Damini and Ghatak, making Batwara 1947 one of their most anticipated collaborations in recent years. Featuring an ensemble cast, the film stars Shabana Azmi, Sunny Deol, Preity G Zinta, Karan Deol, Ali Fazal and Abhimanyu Singh in pivotal roles.
Produced by Aamir Khan and Aparna Purohit under the banner of Aamir Khan Productions, Batwara 1947 features music composed by A. R. Rahman, with lyrics penned by Javed Akhtar.
With the nationwide promotional campaign gathering momentum, the team’s visit to Patna Sahib is expected to be one of the key highlights of the tour. As the release date draws closer, Batwara 1947 continues to build anticipation among audiences eager to watch the Rajkumar Santoshi directorial on the big screen when it arrives in cinemas worldwide on August 14, 2026.