National Handloom Day 2026 Theme: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में हथकरघा का विशेष स्थान है। सदियों से भारतीय बुनकर अपनी कला और मेहनत से ऐसी उत्कृष्ट साड़ियां, शॉल, दुपट्टे और परिधान तैयार करते आए हैं, जिनकी पहचान पूरी दुनिया में है। इसी गौरवशाली परंपरा को सम्मान देने और देश के लाखों बुनकरों के योगदान को पहचान दिलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
साल 2026 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को मनाया जा रहा है। यह दिन केवल पारंपरिक वस्त्रों का उत्सव नहीं है, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’, आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण-अनुकूल फैशन को बढ़ावा देने का भी संदेश देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विट करके हस्तकरखा दिवस पर भारतीय बुनकरों की सराहना की और इस खास दिन की शुभकामनाएं दीं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि हथकरखा दिवस का इतिहास क्या है? इस दिन का महत्व और थीम समेत सभी जानकारी यहां मौजूद है।
राष्ट्रीय हथकरखा दिवस 2026 कब हैं?
- हथकरखा दिवस हर साल 7 अगस्त 2026 को मनाया जाता है।
- इस वर्ष 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। भारत सरकार द्वारा आज हथकरघा दिवस मनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय हथकरखा दिवस का इतिहास
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में भारत सरकार ने की थी।
- इसका उद्देश्य देश के लाखों बुनकरों को सम्मान देना था।
- साथ ही भारतीय हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना था।
7 अगस्त को ही क्यों मनाते हैं हथकरखा दिवस?
- 7 अगस्त को ही ये दिन मनाने की ऐतिहासिक वजह है।
- वर्ष 1905 में इसी दिन स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
- इसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया गया था।
- हथकरघा उद्योग इस आंदोलन का प्रमुख आधार बना और आज भी भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रीय हथकरखा दिवस की थीम 2026
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर सरकार का मुख्य फोकस भारतीय हथकरघा विरासत, नवाचार और टिकाऊ फैशन को बढ़ावा देना है।
- इसी क्रम में “Weaves of India” फेस्टिवल तथा Handloom Hackathon 2026 जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
- इनका उद्देश्य पारंपरिक बुनाई को आधुनिक तकनीक और युवाओं से जोड़ना है।
हथकरखा दिवस क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं,
-
भारतीय बुनकरों के योगदान का सम्मान करना।
-
देश की पारंपरिक बुनाई कला को संरक्षित करना।
-
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना।
-
ग्रामीण रोजगार और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना।
-
पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ फैशन को प्रोत्साहित करना।
-
युवाओं को भारतीय वस्त्र संस्कृति से जोड़ना।
हथकरघा उद्योग आज भी लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है और भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
Source link
#National #Handloom #Day #अगसत #क #कय #मनय #जत #ह #रषटरय #हथकरघ #दवस #जन #इतहस #महतव #औरथम



Post Comment