डिजिटल डेस्क। मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत ने सबको चौंका दिया है। तीन बार अर्जी खारिज होने के बाद चौथी बार सोनम को जो राहत मिली, उसके पीछे कोई बड़ी दलील नहीं बल्कि पुलिस की एक छोटी सी ‘लिखने की गलती’ (Typo Error) रही।
आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर कानून के किस पेंच ने सोनम के लिए जेल के दरवाजे खोल दिए…
कैसे एक गलत नंबर ने बदला पूरा केस?
कानून की दुनिया में धाराओं का सही होना बहुत जरूरी है। इस मामले में पुलिस से सबसे बड़ी चूक धाराओं के उल्लेख में हुई। पुलिस ने एफआईआर (FIR) और गिरफ्तारी के दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) लिख दी थी। नए कानून (BNS), जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, उसमें 403(1) जैसी कोई धारा ही नहीं है। हत्या के लिए सही धारा 103(1) होनी चाहिए थी। पुराने कानून (IPC) में धारा 403 ‘संपत्ति के गबन’ से जुड़ी थी, न कि हत्या से।
कोर्ट ने क्यों दी जमानत?
पूर्वी खासी हिल्स जिला अदालत ने जब दस्तावेजों की जांच की, तो पाया कि यह सिर्फ एक जगह की गलती नहीं थी। गिरफ्तारी मेमो से लेकर केस डायरी तक, हर जगह गलत धारा लिखी थी। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में दो मुख्य बातें कहीं…
अधिकारों का उल्लंघन: कानूनन किसी को गिरफ्तार करने से पहले उसे यह बताना जरूरी है कि उसे किस अपराध के लिए पकड़ा जा रहा है। सोनम को कभी बताया ही नहीं गया कि उसे हत्या (धारा 103) के लिए गिरफ्तार किया गया है।
लापरवाही: पुलिस ने इसे ‘टाइपिंग की गलती’ बताया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि सभी कानूनी दस्तावेजों में एक जैसी गलती नहीं हो सकती। साथ ही, गिरफ्तारी के फॉर्म में किसी भी चेकबॉक्स पर टिक नहीं किया गया था, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।

वकील न होना भी बना सोनम का पक्ष
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि जब सोनम को पहली बार गाजीपुर की कोर्ट में पेश किया गया था, तब उसका पक्ष रखने के लिए वहां कोई वकील नहीं था। अगर वकील होता, तो यह तकनीकी गलती पहले ही पकड़ी जा सकती थी।
क्या है पूरा हनीमून मर्डर केस?
इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम से हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए। आरोप है कि सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची। मेघालय के ‘वेई सावदोंग फॉल्स’ के पास भाड़े के हत्यारों ने राजा की हत्या कर शव खाई में फेंक दिया। राजा का शव 2 जून को मिला और सोनम 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पकड़ी गई।

इन 4 शर्तों पर मिली राहत
जमानत का मतलब यह नहीं है कि सोनम बेगुनाह है। कोर्ट ने उसे कड़ी शर्तों के साथ छोड़ा है…
- वह सबूतों या गवाहों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी।
- हर पेशी पर उसे कोर्ट में हाजिर होना होगा।
- कोर्ट की इजाजत के बिना वह शहर से बाहर नहीं जा सकती।
- 50,000 रुपये का मुचलका और दो जमानती पेश करने होंगे।
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