सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। …और पढ़ें
HighLights
- शीर्ष अदालत ने कहा, ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
- भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रख सकते
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है।
‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।
हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही मामले से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं का भी निस्तारण कर दिया गया।
इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त के SPE विंग से संबंधित सूचनाएं RTI के तहत मांगी जा सकेंगी, जिससे संस्था की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
EOW पर फिलहाल लागू नहीं होगा फैसला
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने अधिसूचना की वैधता की समीक्षा केवल लोकायुक्त के SPE विंग के संदर्भ में की है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को लेकर अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया है।
इसका अर्थ है कि संबंधित अधिसूचना फिलहाल EOW पर लागू रहेगी और इस फैसले का सीधा प्रभाव केवल लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) पर पड़ेगा।
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