अपूर्वा मखीजा से पंगा लेना शख्स को पड़ा भारी, सरेआम फिक्स किया इनफ्लुएंसर का रेट, फिर मांगनी पड़ी माफ़ी!
Apoorva Mukhija Slams Troller: अपूर्वा मखीजा एक सोशल मीडिया की मशहूर इनफ्लुएंसर है और आपको बता दें कि अक्सर वह विवादों में भी बनी रहती हैं। कुछ दिन पहले उनका एक ऐसा बयान वायरल हुआ था जिसके बाद में उनकी खूब आलोचना की गई थी।
अपूर्वा मखीजा का बयान वायरल
इस बयान में अपूर्वा ने कहा था कि “2 रुपए के रोल के लिए मैं किसी के साथ नहीं सोऊंगी, लेकिन अगर कोई दुबई का शेख मेरे ऊपर 10 से 15 करोड रुपए फेंक कर मारेगा तो मैं सोच सकती हूं।”
इसके बाद अपूर्वा का यह बयान इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ और उनका काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। काफी लोगों ने उनको कंट्रोल करना शुरू कर दिया था और कई लोग तो अपूर्वा को डायरेक्ट मैसेज करके गंदी बातें भी लिख रहे हैं और उन्हें शेम कर रहे हैं।
यूज़र ने किया अपूर्वा मखीजा को शेम
अपूर्वा मखीजा ने हाल ही में एक ऐसी यूजर की क्लास लगती है और यूजर के कमेंट का स्क्रीनशॉट उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर भी शेयर कर दिया। साथ ही उसकी कंपनी को भी टैग कर दिया। यूज़र ने कमेंट में लिखा था कि “कोई तुम्हारे लिए 10 से 12 करोड नहीं फेंकेगा। आखिर में 10 से 12000 में ही तुम बिकने वाली हो।”
अपूर्वा ने की यूज़र की शिकायत
अपूर्वा मखीजा ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर करके शख्स को कॉल आउट कर दिया। जिस कंपनी में वह शख्स काम करता है उसे इंस्टाग्राम पर मैसेज करके बताया कि उनका इम्प्लॉय किस तरीके से उन्हें शेम कर रहा है। लेकिन कंपनी द्वारा बताया गया कि वह शख्स उनकी कंपनी पहले ही छोड़ चुका है।
यूज़र ने मांगी माफ़ी
इसके बाद अपूर्वा मखीजा ने उस शख्स की करंट कंपनी को ढूंढा और उसकी शिकायत वहां पर की। साथ ही उनके फैंस ने भी इस यूजर की क्लास लगा डाली। बुरी तरीके से पब्लिक के बीच एक्सपोज होने के बाद में यूजर ने कमेंट के लिए अपूर्वा से माफी मांग ली। तब जाकर अपूर्व और यूजर के बीच का विवाद खत्म हुआ।
कौन हैं अपूर्वा मखीजा?
अगर हम अपूर्वा की बात करते हैं तो आपको बता दें कि वह अपने बेबाक और बिंदास एटीट्यूड के लिए काफी जानी जाती हैं। वह एक कंटेंट क्रिएटर है और उन्हें स्क्रीन पर ट्रेलर शो में भी देखा जा चुका है।
Apoorva Mukhija Slams Troller: अपूर्वा मखीजा एक सोशल मीडिया की मशहूर इनफ्लुएंसर है और आपको बता दें कि अक्सर वह विवादों में भी बनी रहती हैं। कुछ दिन पहले उनका एक ऐसा बयान वायरल हुआ था जिसके बाद में उनकी खूब आलोचना की गई थी।
अपूर्वा मखीजा का बयान वायरल
इस बयान में अपूर्वा ने कहा था कि “2 रुपए के रोल के लिए मैं किसी के साथ नहीं सोऊंगी, लेकिन अगर कोई दुबई का शेख मेरे ऊपर 10 से 15 करोड रुपए फेंक कर मारेगा तो मैं सोच सकती हूं।”
इसके बाद अपूर्वा का यह बयान इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ और उनका काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। काफी लोगों ने उनको कंट्रोल करना शुरू कर दिया था और कई लोग तो अपूर्वा को डायरेक्ट मैसेज करके गंदी बातें भी लिख रहे हैं और उन्हें शेम कर रहे हैं।
यूज़र ने किया अपूर्वा मखीजा को शेम
अपूर्वा मखीजा ने हाल ही में एक ऐसी यूजर की क्लास लगती है और यूजर के कमेंट का स्क्रीनशॉट उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर भी शेयर कर दिया। साथ ही उसकी कंपनी को भी टैग कर दिया। यूज़र ने कमेंट में लिखा था कि “कोई तुम्हारे लिए 10 से 12 करोड नहीं फेंकेगा। आखिर में 10 से 12000 में ही तुम बिकने वाली हो।”
अपूर्वा ने की यूज़र की शिकायत
अपूर्वा मखीजा ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर करके शख्स को कॉल आउट कर दिया। जिस कंपनी में वह शख्स काम करता है उसे इंस्टाग्राम पर मैसेज करके बताया कि उनका इम्प्लॉय किस तरीके से उन्हें शेम कर रहा है। लेकिन कंपनी द्वारा बताया गया कि वह शख्स उनकी कंपनी पहले ही छोड़ चुका है।
यूज़र ने मांगी माफ़ी
इसके बाद अपूर्वा मखीजा ने उस शख्स की करंट कंपनी को ढूंढा और उसकी शिकायत वहां पर की। साथ ही उनके फैंस ने भी इस यूजर की क्लास लगा डाली। बुरी तरीके से पब्लिक के बीच एक्सपोज होने के बाद में यूजर ने कमेंट के लिए अपूर्वा से माफी मांग ली। तब जाकर अपूर्व और यूजर के बीच का विवाद खत्म हुआ।
कौन हैं अपूर्वा मखीजा?
अगर हम अपूर्वा की बात करते हैं तो आपको बता दें कि वह अपने बेबाक और बिंदास एटीट्यूड के लिए काफी जानी जाती हैं। वह एक कंटेंट क्रिएटर है और उन्हें स्क्रीन पर ट्रेलर शो में भी देखा जा चुका है।
स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
Fitoor,emotional journey,girls,college, Hindi news">‘फितूर’ में दिखेगा को-एड कॉलेज में कदम रखने वाली लड़कियों का भावनात्मक सफर
स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम">
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
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लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्मू कश्मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप
बादल फटने से भारी तबाही
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम
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